मध्य एशियाई देश 2022 में गणतंत्र दिवस समारोह के मेहमान होगें, सभी देशों का भारत के साथ विशेष महत्व।

भारत सरकार ने 2022 की रिपब्लिक डे परेड पर पांच महत्वपूर्ण देशों को आमंत्रण दिया है, जो मध्य एशिया से आते हैं। लेकिन यह पहली बार है, कि भारत किन्हीं मध्य एशियाई देशों को ज्यादा महत्व दे रहा है। इस बार तो भारत सरकार पांचों मध्य एशियाई देशों के समूह को अपने 26 जनवरी के रिपब्लिक डे पर बुला रहीं है। इन पांच मध्य एशियाई देशों में उज़्बेकिस्तान, तजाकिस्तान , तुर्कमेनिस्तान और किर्गिस्तान शामिल हैं।

भारत में कुछ वर्षों में देखा गया है कि भारत केवल एक देश को अपने गणतंत्र दिवस समारोह पर आमंत्रित नहीं करता है। बल्कि देशों के एक समूह को ही आमंत्रण दिया है, खासकर मोदी सरकार में ऐसा ज्यादा देखने को मिला है। मोदी सरकार ने 2015 के गणतंत्र दिवस पर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को आमंत्रित किया था, 2018 में सभी आसियान देशों को आमंत्रण दिया था और अब 2022 के गणतंत्र दिवस पर सभी पांचों मध्य एशियाई देशों को बुलाया। जिससे साफ झलक रहा है कि पीएम मोदी ने गणतंत्र दिवस की परेड को भारत की विदेश नीति का अहम हिस्सा बना दिया है, जो भारत के दूसरे देशों के साथ संबंधों में प्रगाढ़ता और मधुरता लाने का काम कर रही है।

मध्य एशियाई देश

सभी मध्य एशियाई सोवियत संघ से संबंधित हैं, क्योंकि कभी ये सभी देश USSR का अहम हिस्सा थे। लेकिन अमेरिका और सोवियत संघ के बीच चले शीत युद्ध में सोवियत संघ 1991 में पूर्णतः बिखर गया। सोवियत संघ के बिखराव से 15 देशों का जन्म हुआ था, जिनमें ये पांच मध्य एशियाई देश भी शामिल थे। जिनकी जनसंख्या 72,960,000 है और क्षेत्रफल 4,003,451 वर्ग किलोमीटर (1,545,741 sq mi) है। अगर इस क्षेत्र की जीडीपी की बात करें तो यह करीब 300 बिलियन डॉलर है और प्रति व्यक्ति आय 4000 अमेरिकी डॉलर है। इन सभी देशों में इस्लाम बहुसंख्यक धर्म हैं। हालाकि यहां के लोगों की जीवन शैली अफ़ग़निस्तान, पाकिस्तान और भारतीय मुसलमानों से विपरीत है।

भारत के लिए महत्वपूर्ण मध्य एशियाई देश

भारत के लिए सभी पांचों मध्य एशियाई देश बहुत अधिक महत्वपूर्ण भूमिका रखते हैं। इन सभी देशों की भारत को बहुत ज्यादा जरूरत है, इसी कारण से पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में अपना पहला दौरा  2015 में इन्हीं पांच मध्य एशियाई देशों का किया था।  इसके अलावा ये सभी देश खनिज सम्पदा से परिपूर्ण हैं, जहां तेल, गैस और यूरेनियम के विशाल भंडार मौजूद हैं। जिससे भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूर्ण कर सकता है।

इन सभी बातों के अतिरिक्त, इस्लामिक कट्टरपंथ भारत और मध्य एशियाई देशों की  एक जैसी समस्या है। अब तो अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान शासन है, जो बेहद कट्टर और इस्लामिक सोच का एक सुन्नी मत वाला आतंकी संगठन है। जिसके इस्लामिक कट्टरपंथी विचार भारत और मध्य एशियाई देशों में फैलाने का डर है। जबकि भारत और मध्य एशियाई देशों की जनसंख्या कट्टर इस्लामी विचारों की धुर विरोधी रही है।

भारत के द्वारा मध्य एशियाई देशों को आर्थिक सहायता

भारत सरकार मध्य एशियाई देशों से व्यापारिक संबंध प्रगाढ़ करना चाहती है, लेकिन पाकिस्तान भारत को मध्य एशिया से जुड़ने का रास्ता ही नहीं देता है। इसलिए भारत ने ईरान के चबहार बंदरगाह के रास्ते मध्य एशियाई देशों में जानें का रास्ता खोजा है। भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच व्यापार की असीम संभावनाएं हैं, जिसके लिए भारत ने सभी मध्य एशियाई देशों को 2020 में कनेक्टिविटी और ऊर्जा साझेदारी को बढावा देने के लिए 1 बिलियन डॉलर का लाइन ऑफ क्रेडिट देने की घोषणा की थी।


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