भारत अपनी स्पेस स्टेशन 2030 तक बना लेगा, जो भारतीय इतिहास का सबसे मंहगा निर्माण होगा।

भारत इसरो के नेतृत्व में अंतरिक्ष में शानदार सफलताएं प्राप्त कर रहा है, जिसकी एक झलक मून मिशन और मंगलयान हैं। इन सबके बाद भारत 2024 तक अंतरिक्ष में अपने अंतरिक्ष यात्री भी भेजने जा रहा है। लेकिन ये सब मिशन भी छोटे पड़ रहें हैं। क्योंकि भारत सरकार ने ऐलान कर दिया है कि भारत 2030 तक अंतरिक्ष में अपनी स्पेस स्टेशन स्थापित कर देगा।




भारत की स्पेस स्टेशन 2030

भारत सरकार के एक महत्वपूर्ण मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया है कि भारत की पहली स्पेस स्टेशन अंतरिक्ष में 2030 तक लॉन्च कर दी जायेगी। ये घोषणा बताती है कि हम अपने आने वाले भविष्य के लिए कितने संजीदा हैं। हम कभी नहीं चाहेंगे कि भारत दुनिया में दूसरे देशों से पीछे रहें। इसलिए भारत अपने इतिहास की सबसे मंहगी वस्तु बनाने जा रहा है। अभी तक भारत ने सबसे महंगी चीजें भी बनाई हैं, जिनमें 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' 442 मिलियन डॉलर और अब हम 2024 तक गगनयान मिशन लॉन्च करने जा रहे हैं। जिसकी कुल खर्च 10,000 करोड़ रुपए होगी।


लेकिन भारत अपने इतिहास की सबसे बड़ी और मंहगी वस्तु बनाने जा रहा है, जो भारत के ज्ञान और कौशल का नमूना होगा। भारत की स्पेस स्टेशन भारत के इतिहास की सबसे  क्योंकि भारत का एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत भी इससे कम कीमत का है, जिसको बनाने की कुल लागत 23000 करोड़ है। भारत को 2030 तक अंतरिक्ष में अपनी स्पेस स्टेशन बनाने के लिए करीब 85,000 करोड़ रुपए खर्च करने होंगे। 


इसरो के चीफ के सिवान ने भारतीय स्पेस स्टेशन के बारे में 2019 में कुछ जानकारी दी थी, जिसमें उन्होंने बताया था कि भारत की स्पेस स्टेशन का वजन लगभग 20 टन हो सकता है। 

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन

अगर हम मानव इतिहास की सबसे मंहगी वस्तु की बात करें तो वह धरती पर नहीं है। हां अंतरिक्ष में जरूर मौजूद है, मानव ने अपने इतिहास की सबसे महंगी वस्तु स्पेस में बनाई है, जिसको पूरी दुनिया अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के नाम से जानती है। जिसको बनाने में 15 से अधिक देश शामिल रहें हैं। जिनमें अमेरिका, रूस, यूरोपीय यूनियन और जापान प्रमुख हैं, इन सभी देशों ने मिलकर मानव निर्मित सबसे मंहगी वस्तु अंतरिक्ष में बनाई थीं। ISS को बनाने में 100 बिलियन डॉलर से अधिक का खर्च आया था, स्पेस स्टेशन के हर वर्ष के रख रखाव का खर्च 10,000 से अधिक तक बैठ जाता है।  अगर आईएसएस के वजन की बात करें तो इसका कुल वजन 420,000 किलोग्राम तक है, जो करीब 440 कारों के बराबर बैठता है।

चीन की स्पेस स्टेशन, तियांगोंग

चीन की स्पेस स्टेशन बन कर तैयार भी हो गई है, जिसका नाम तियांगोंग रखा गया है। इसके विभिन्न हिस्से होगें। जिनको अंतरिक्ष में एक एक कर भेजा जायेगा और फिर इन सभी को स्पेस में ही जोड़ा जायेगा। हालाकि चीन ने अपने स्पेस स्टेशन की लागत के बारे में दुनिया को कुछ नहीं बताया है। लेकिन इसका भार ISS से 20% के करीब होगा, चीन की अंतरिक्ष स्टेशन का भार 66 टन होगा।जिससे कुछ वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि चीन की स्पेस स्टेशन का कुल खर्च 25 बिलियन डॉलर है। चूंकि चीन ने अपनी स्पेस स्टेशन के दो प्रोटोटाइप भी अंतरिक्ष में भेजे हैं। जिससे इसकी लागत बढ़कर 30 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई है।

अंतरिक्ष स्टेशन का इतिहास

सोवियत संघ स्पेस के क्षेत्र में अमेरिका और पश्चिमी देशों से बहुत आगे निकल चुका था, जिसकी एक झलक अंतरिक्ष स्टेशन के मामले में दिखती है। पहली स्पेस स्टेशन अमेरिका ने नहीं बल्कि सोवियत संघ ने बनाई थीं, जिसको 19 अप्रैल 1971 को लॉन्च किया था। सोवियत संघ की पहली स्पेस स्टेशन का नाम Salyut 1 था।


लेकिन सोवियत संघ 1991 में टूट गया और अब वह एक आर्थिक शक्ती भी नहीं रहा था। जिससे अमेरिका को। बहुत खुशी हुई थी और उसने रूस को ऑफर दिया कि वह अमेरिका और पश्चिमी देशों से मिलकर एक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन  का निर्माण करवा सकता है। जिसके परिणाम स्वरूप दुनिया को पहली अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन  मिली, जो मानव इतिहास की सबसे मंहगी वस्तु है।

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