पाकिस्तान कभी भी आर्थिक तौर पर टूट सकता, पाकिस्तानी सरकार के पास देश चलाने के लिए पैसा ही नहीं बचा।

दुनिया के आर्थिक विशेषज्ञों को अब लग रहा है कि पाकिस्तान का आर्थिक संकट बहुत गहरा होता जा रहा है, जिसका सीधा असर पाकिस्तान के एक राष्ट्र के रूप में बचे रहना मुश्किल होता जा रहा है।  

पाकिस्तान के आर्थिक संकट को वहां के पीएम इमरान खान के एक भाषण से समझा जा सकत। जिसमें वह कह रहें हैं कि उनके पास इतना पैसा भी नहीं है, जिससे एक देश (पाकिस्तान) को वर्तमान समय में चलाया जा  सकें। इमरान खान की इन बातों से स्पष्ट लग रहा है कि यदि पाकिस्तान ने अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं कर पाता है तो पाकिस्तान एक देश के रूप में ज्यादा समय तक टिका नहीं रह सकता है।

इमरान खान ने पाकिस्तान की आर्थिक दुर्दशा का जिम्मेदार लचर टैक्स व्यवस्था और उपनिवेशिक विरासत  को बताया है।  इसके अलावा उन्होंने पूर्व पाकिस्तानी नेताओं को भी पाकिस्तान के आर्थिक संकटों के लिए जिम्मेदार ठहराया है, जो स्वतंत्रता के बाद पाकिस्तान की बड़ी आबादी टैक्स व्यवस्था से जोड़ नहीं पाए थे। 

पूर्व पाकिस्तानी नेताओं व इमरान खान के दौरान कर्ज़

एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के भूतपूर्व नेताओं ने भी जमकर अपने ही देश को लूटा और मजेदार जिंदगी जी है। जिसकी अंदाजा इस बात लगाया जा सकता है कि  पाकिस्तान के भूतपूर्व नेताओं के शासन के दौरान पाकिस्तान का कर्ज़ 6 ट्रिलियन से 30 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपए हो गया है। 

पाकिस्तान ने इतना ज्यादा कर्ज़ ले रखा है कि आज पाक की कुल जीडीपी का 60 फीसदी हिस्सा कर्ज का ब्याज देने में चला जाता है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के अनुसार, सितंबर 2021 में पाकिस्तान का कुल कर्ज 50 लाख करोड़ रुपए हो गया है।

अगर इमरान खान सरकार की बात करें तो उनकी सरकार ने दैनिक आधार पर 1400 करोड़ रुपए उधार लिए हैं। पाकिस्तान के हर नागरिक पर 2018 में कर्ज़ 1 लाख 14 हजार था लेकिन आज इमरान की सरकार के दौरान यह बढ़कर 2 लाख 25 हजार रूपए हो गया है। 

पकिस्तान की वर्तमान आर्थिक स्थिति

यदि पाकिस्तान की वर्तमान आर्थिक स्थिति का आकलन करें तो पाकिस्तान की कुल जीडीपी अमेरिका के सबसे अमीर व्यक्ति इलोन मस्क की कुल आय से भी कम है। पाकिस्तान की वर्तमान जीडीपी 287 बिलियन अमेरिकी डॉलर है और जबकि इलोन मस्क की कुल आय 292 बिलियन डॉलर है।

अगर हम पाकिस्तान की वर्तमान अर्थव्यवस्था की कुल आय की बात करें तो यह भारत के केंद्रीय बजट के बराबर भी नहीं है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की कुल आय 21 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपए है, जो भारत के केंद्रीय बजट 34 लाख करोड़ रूपए के आस पास भी नहीं बैठती है।

इसके अलावा पाकिस्तान का व्यापार घाटा, उच्च मुद्रास्फीति, जीरो विदेशी निवेश (FDI ) जैसे कारण हैं, जिससे पाकिस्तान चारों तरफ से घिरा हुआ महसूस कर रहा है। जबकि पाकिस्तान में CPI (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) में 9.2 और मुद्रास्फीति में पिछले साल (2020) की तुलना में 9.2% की वृद्धि हुई है।

पाकिस्तान के द्वारा आयात

पाकिस्तान के आयात को देखकर ऐसा लग रहा है कि पाकिस्तानी  देशी वस्तुओं को उत्पादन करना भूल से गए हैं। पाकिस्तान में उत्पादन न होने के कारण , वहां खाने की वस्तुओं के आयात पर एक दशक में 10 बिलियन डॉलर खर्च किए गए हैं।  जबकि इससे पहले पाकिस्तान 10 बिलियम डॉलर का खाद्य सामग्री निर्यात किया करता था।

इसके अलावा पाकिस्तान का कुल आयात $53.785 bn डॉलर (FY2021) था और निर्यात मात्र $25.630 billion डॉलर हुआ है।

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर तालिबान का प्रभाव

तालीबान का प्रभाव पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर बड़े पैमाने पर पड़ा है। क्यों कि पाकिस्तान ने जिस तरह से खुले तौर पर तालीबान की सहायता की है, उससे दुनिया के लोगों का पाकिस्तान के प्रति नाराजगी उत्पन्न हुईं और उन्होनें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर Sanction Pakistan जैसी मुहिम चलाई हैं। 

जिसका परिणाम यह हुआ कि पाकिस्तान के शेयर बाजार में अमेरिकी प्रतिबंधों के डर बड़ी गिरावट आई थी, जिसके कारण पाकिस्तानी मुद्रा रुपए में भारी गिरावट देखी गई। इस समय 1 अमेरिकी डॉलर की कीमत पाकिस्तान के 169.3 रुपयों के बराबर है। पाकिस्तान की मुद्रा में इस वर्ष 2021 में केवल 6 महीनों में 15% की गिरावट आई है, जिसने पाकिस्तान की खरीद शक्ती को बर्बाद कर दिया है क्यों कि अब आयातकों को अधिक पाकिस्तानी मुद्रा देनी पड़ रही है। पाकिस्तानी मुद्रा में जारी गिरावट से मंहगाई में बड़ी तेजी से वृद्धि हुई है। 

पाकिस्तान के पीएम इमरान खान के आईएमएफ और विश्व बैंक पर आरोप

पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने पाकिस्तान की माली हालत का ठीकरा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक पर फोड़ रहे हैं। लेकिन इसमें जरा सी भी सच्चाई नहीं है, आज पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की यह हालत धार्मिक कट्टरता और आंतकवाद कारण है। 

जबकि IMF  ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को ढहने से बचाने के लिए 1980 से वर्तमान तक 13 बेलआउट पैकेज (Bailout package) दिए हैं।  अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने 13 वा बेलआउट पैकेज 2021 में ही दिया है, जिसको सुरक्षित करने में वह असफल रहा था।  क्योंकि पाक ने आईएमएफ की शर्तो को पूरा नहीं किया। 

इसके उल्ट इमरान खान ने आईएमएफ से पाकिस्तानी जीडीपी के 2% के बराबर 38, 000 करोड़ कर्ज़ की मांग रखी थी। लेकिन IMF को शक पैदा हो गया है कि यह अब कर्ज़ को लौटा नहीं सकतें हैं। इसलिए आईएमएफ ने कर्ज़ देने से इंकार कर दिया।

पाकिस्तान पर विदेशी कर्ज़

पाकिस्तान की केंद्रीय बैंक स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने विदेशी कर्ज़ के बारे में बताया कि पाकिस्तान का विदेशी कर्ज 116 बिलियन अमेरिकी डॉलर को पार कर गया है। 

1. जिनमें 7 बिलियन डॉलर IMF से, 11 बिलियन डॉलर पैरिस क्लब से,और 12 बिलियन डॉलर यूरो बॉन्ड व sukuk  से लिया गया है।

2. पाकिस्तान चीन की सीपेक परियोजना का शिकार हो गया है, इस परियोजना के द्वारा चीन ने पाकिस्तान को अपने कर्ज़ जाल में फंसा लिया है। चीन ने चाइना पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर के लिए पाकिस्तान को 17 बिलियन डॉलर का कर्ज दिया है। पाकिस्तान को 33 बिलियन डॉलर बहु द्विपक्षीय दानदाताओ से प्राप्त हुआ है। इसके अलावा पाक को 42 बिलियन डॉलर कर्ज़ G 20 व OIC से मिला है।

नवाज शरीफ और इमरान खान सरकार में पाकिस्तान का विदेशी कर्ज

2017 में, नवाज शरीफ की सरकार के दौरान, पाकिस्तान का विदेशी कर्ज 80 बिलियन डॉलर था, लेकिन जैसे ही इमरान खान नियाजी 2018 में पाकिस्तान की सत्ता में आए, तब से पाकिस्तान के विदेशी कर्ज में अथाह वृद्धि हुई है। 2018 में पाकिस्तान का विदेशी कर्ज 93 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, 2019 में 100 बिलियन डॉलर और 2020 में 110 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था। इस साल 2021 के नबंबर महीने के अंत तक विदेशी कर्ज 116 बिलियन डॉलर को पार कर गया। इमरान खान की सरकार ने पाकिस्तान के विदेशी कर्ज में 30 बिलियन डॉलर की वृद्धि की है और उनका यह भी कहना था कि उन्होंने पाकिस्तान का 20 बिलियन डॉलर का विदेशी कर्ज भी उतारा है। लेकिन पाकिस्तान के आर्थिक विशेषज्ञों ने उनकी पोल खोल दी, सभी पाकिस्तानि आर्थिक विशेषज्ञों ने कहा कि इमरान खान ने एक देश से कर्ज़ लिया और वहीं कर्ज़ से दूसरे देशों का कर्ज़ चुकाया है। जैसे आईएमएफ से लिया कर्ज़ चीन के कर्ज़ की किस्तों को चुकाया। क्योंकि पाकिस्तान ने सीपेक के नाम से कई बिलियन डॉलर का कर्ज लिया है।

यह बात भी एकदम स्पष्ट है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था विदेशी कर्ज के आधार पर खड़ी है, जिसके बंद होते ही वह ढह सकती है। दुनिया का एक 24 करोड़ आबादी वाला देश डिफॉल्टर घोषित हो सकता है।

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की बुरी हालत के कारण आंतकवाद और धार्मिक कट्टरपंथ  हैं, जिन्हें पाकिस्तान ने अपनी विदेश नीति का आधार बनाया है। वह पाकिस्तान ही है, जिसके कारण अमेरिका अफ़ग़ानिस्तान की जंग हार गया है। क्यों कि अगर पाकिस्तान तालिबान को अपना समर्थन नहीं देता तो आज अफ़ग़ानिस्तान के हालात कुछ अलग होते। इन सभी आतंकी संगठनों को पालने में पाकिस्तान की सेना और वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ है। 

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था  के दुश्मन

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के सबसे बड़े दुश्मन इस्लामिक कट्टरपंथ, भारत के प्रति घृणा, इस्लामिक आतंकवाद और  इस्लामिक कट्टरपंथियो के घृणित कार्य हैं। आज पाकिस्तान की 80% जनसंख्या धार्मिक तोर पर कट्टरपंथी है, जिनके अंदर पाकिस्तान के नेताओं और इस्लामी धार्मिक लोगों ने गैर मुस्लिमों के प्रति नफरत का जहर बोया है। जिनमें पाकिस्तान का ईश निंदा कानून इस्लामी कट्टरपंथियो का गैर मुस्लिमों के लिए हथियार का कार्य करता है। अभी कुछ दिनों पहले श्री लंका के एक मैनेजर को पाकिस्तान के इस्लामी कट्टरपंथियो ने ईश निंदा के आरोप में जला कर मार डाला था। 

पाकिस्तान के कट्टरपंथियों की हरकतों को देखकर वहां के ग्रह मंत्री फवाद चौधरी ने कहा है कि पाकिस्तान का सबसे बड़ा दुश्मन भारत नहीं है बल्कि पाकिस्तान में बैठे मुल्ले और इस्लामी कट्टरपंथी हैं।

फवाद चौधरी के अलावा पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल बाजबा भी कह चुके हैं कि पाकिस्तान को भू राजनीति  की अपेक्षा भू अर्थव्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए। उनका सीधा मतलब था कि पाकिस्तान को अब भारत से अपने आर्थिक सम्बंध स्थापित करने चाहिए। 

निष्कर्ष

अगर पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति नहीं सुधरती है तो यह मुल्क जल्द ही टूट कर बिखर जायेगा। इसी के साथ पाकिस्तान के परमाणु हथियार भारत और पूरी दुनिया के चिंता का कारण बन सकतें हैं। क्यों कि जैसे जैसे पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति बुरी हाई जायेगी, पाकिस्तान पर से वहां की सरकार और सेना की पकड़ ढीली होती जायेगी। यह समय आतंकी संगठनों के लिए परमाणु हथियार पाने के लिए एक दम सही होगा, क्यों कि पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई में भी इस्लामी कट्टरपंथियो की भरमार है। 

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