अनपढ़ तालिबान ने अपने एक क्लिक से करोड़ों रुपए गलत देश को भेज दिए, दुसरे देश ने लौटाने से इंकार कर दिया

तालिबान अब अफ़ग़ानिस्तान और पूरी दुनिया के लिए हकीकत बन चुका है। लेकिन इन लोगों को शासन करना बिल्कुल नहीं आता है। क्योंकि इन्होंने हमेशा बंदूक से गोलियां चलाई हैं। अभी कुछ महीने (सितंबर में) पहले तालिबान के एक आदमी ने धोखे से 6 करोड़ रुपए तजाकिस्तान को भेज दिए। जब यह बात तालिबान के सामने आई। तो अब तालीबान तजाकिस्तान से अपने रूपए वापस मांग रहा है। जबकि अफ़ग़ानिस्तान का पड़ोसी देश तजाकिस्तान ने इस पैसे को लौटाने से बिल्कुल इंकार कर दिया है। जिसकी सबसे बड़ी बजह खुद तालिबान है। क्योंकि तजाकिस्तान तालिबान को एक आतंकवादी संगठन मानता है। 


तालीबान से गलती होने का कारण

दरअसल अफ़ग़ानिस्तान की भूतपूर्व असरफ गनी की सरकार के समय तजाकिस्तान के संबंध प्रगाढ़ और मधुर थे। जिससे बहुत सारे अफगान लोग तजाकिस्तान में शरणार्थी के रूप में गए। इन्हीं लोगों के लिए भूतपूर्व असरफ गनी सरकार ने 6 करोड़ रुपए तजाकिस्तान को देने का ऐलान किया था। इन पैसों से तजाकिस्तान अफगानी लोगों के लिए विद्यालय खोलने बाला था। यहीं पर तालिबान के वित्त विभाग देखने वाले व्यक्ति से गलती हो गई और उसने गलती से 6 करोड़ रुपए तजाकिस्तान को भेज दिए। तालीबान अपना पैसा तजाकिस्तान से वापस करने को कह रहा है, लेकिन यहां दिक्कत यह है कि दुनिया और खुद तजाकिस्तान तालीबान को एक आतंकी संगठन मानती है, जिस कारण से वह चाह कर भी तालीबान को रूपए वापस नहीं लौटा सकता है। 


निष्कर्ष

इस बात से स्पष्ट होता है कि तालीबान ने अफ़ग़ानिस्तान में कब्ज़ा जरूर कर लिया है। लेकिन इनको शासन करना नहीं आता है। जबकि अफ़ग़ानिस्तान की भूतपूर्व की सरकार एक लोकतान्त्रिक सरकार थीं और उसके कर्मचारी योग्य और शिक्षित होते थे। किंतु तालीबान के सभी लोग अनपढ़ और गंवार हैं जिनको केवल एके 47 ही चलानी आती है। 

यहीं कारण है कि अमेरिका ने अफ़गानिस्तान की केंद्रीय बैंक के 10 अरब डॉलर रोक लगा रखी है। क्योंकि उसको डर है कि तालीबान इस पैसें को खर्च किस तरह से करेगा। एक डर यह भी है कि तालिबान इस धन का आतंक में इस्तेमाल कर सकता है।

भारत और मध्य एशियाई देशों ने तालीबान सरकार को स्वीकार करने से साफ़ इंकार कर दिया है। भारत सहित सभी मध्य एशियाई देशों का कहना है कि तालीबान ने एक लोकतान्त्रिक सरकार को बंदूक के दम पर उखाड़ फेंका है और फिर अपनी सरकार बनाई। इन्होंने लोगों के वोट हासिल कर सरकार नहीं बनाई है और ये लोग आम अफगानी का प्रतिनिधित्व भी नहीं करते हैं।

इस्लामिक सहयोग संगठन की 19 दिसम्बर को पाकिस्तान में विदेश मंत्रियों के लेवल की मीटिंग हुई थी, जहां अफ़ग़ानिस्तान की आर्थिक सहायता करने के लिए एक फंड बनाने की घोषणा की गई। लेकिन इस फंड की सच्चाई यह है कि इसमें अभी तक 1 अमेरीकी डॉलर तक नहीं आया। अगर ये थोड़ा बहुत फंड अफ़ग़ानिस्तान के लिए बना भी लेते हैं तो ओआईसी इस पैसों को अफगानी लोगों तक कैसे पहुंचाएगा। क्योंकि इस्लामिक सहयोग संगठन के देश भी सीधे तालीबान को। पैसें नहीं दे सकते हैं। अन्यथा फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) सीधे कार्यवायीं कर सकता है। क्योंकि किसी आतंकी को पैसा देना गैर कानूनी है।

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