अमेरिका में एंटी इस्लामोफोबिया बिल पास, भारत और चीन प्रभाव पड़ना तय

हम सब जानते हैं कि इस समय अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी की सरकार है और उसका नेतृत्व जोए बाइडेन कर रहें हैं, जो अमेरिका के राष्ट्रपति भी हैं। 



इन दिनों अमेरिका की हाउस ऑफ सीनेट से एक कानून दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है और अगर यह अमेरिका की उच्च सदन प्रतिनिधि सभा से पारित हो जाता है। तो इसके भारत और चीन पर गम्भीर प्रभाव पड़ सकतें हैं। क्योंकि इस बिल के प्रावधान बेहद ही शाक्तिशाली और विवादास्पद हैं। इस बिल से अमेरिका के मुस्लिम सांसद पूरी दुनिया में एंटी इस्लामोफोबिया फैलाने वाले देशों की पहचान कर सकतें हैं। अर्थात् इस बिल से अमेरिकी मुस्लिम सांसद सीधे तौर पर भारत और चीन को टारगेट करेंगे। क्यों कि अमेरिका में भी भारत की तरह तुष्टिकरण की नीति चल रही है, जिसकी कर्ताधर्ता वर्तमान रूलिंग पार्टी है।

अमेरिकी एंटी इस्लामोफोबिया बिल

इस बिल की खासियत है कि यह अमेरिकी सरकार में एंटी इस्लामोफोबिया की रोकधाम के लिए एक अलग विभाग बनायेगा। इस बिल के अनुसार, यह विभाग पुरी दुनिया में मुस्लिमों के ऊपर अत्याचार करने वाले देशों की पहचान करेगा और उनको दंडित करेगा। इससे समझ सकतें हों कि यह बिल भारत और अमरीकी संबंधों में सुधार की जगह दरार भी डाल सकता है। क्योंकि अमेरिका का यह विभाग सीधे तौर पर भारत को निशाना बनायेगा। चीन तो अमेरिका की कोई बात मानता ही नहीं है। जिससे उस पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। 




अमेरिकी सांसद इलान उमर

इलान उमर अमरीकी की निम्न सदन हाउस ऑफ सीनेट की सांसद हैं, यहीं अमेरिकी सीनेट में एंट्री इस्लामोफोबिया बिल लेकर आईं हैं। जब यह बिल अमेरिकी सीनेट में लेकर आईं थीं तब डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों ने उन पर आंतकवाद को बढावा देने का आरोप लगाया। जिससे डेमोक्रेटिक सांसद नाराज हों गए और उन्होनें इस बिल को अपना समर्थन दे दिया। हालाकि अधिकतर डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद भारत विरोधी रहें हैं। 




इलान उमर के भारत और चीन पर आरोप

इलान उमर का साफ कहना है कि जब यह बिल कानून बन जायेगा। तब उनका निशाना भारत और चीन होगें। उन्होनें भारत पर इस्लाम विरोधी भावनाओं को भड़काने का आरोप लगाया है और मुस्लिमों पर अत्याचार के आरोप भी लगाए हैं। इलान उमर भारत संसद द्वारा पारित सीएए कानून को गलत बताती हैं, जिसके बारे उनका कहना कि इस कानून से भारतीय मुसलमानों की नागरिकता समाप्त हो जायेगी। जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है और भारत सरकार ने भी इसे एक अफवाह कहा है।

इमान उमर चीन का विरोध उइगुर मुस्लिमों के कारण करती हैं। क्योंकि चीन उइगर मुस्लिमों पर घोर अत्याचार कर रहा है और अमेरिका की किसी भी बात को भाव नही दे रहा है। अगर देखा जाए तो अमेरिकी डेमोक्रेट्स सांसद भारत को मानवता पर भाषण देते हैं। लेकिन चीन और पाकिस्तान के मामले पर चुप रहते हैं। जबकि भारत का मुस्लिम समुदाय दुनिया में कुछ अमीर देशों को छोड़ दिया जाय। तो सबसे ज्यादा सुखी जीवन व्यतीत कर रहा है। पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इराक सीरिया, लीबिया और यमन से भारतीय मुसलमानों की हजार गुना अच्छी स्थिति है। 

इस्लामोफोबिया के कारण

इस्लामोफोबिया शब्द का इस्तेमाल इस्लामिक सहयोग संगठन के द्वारा ज्यादा किया गया है। क्यों कि OIC ने भारत पर इस्लामोफोबिया फैलाने का आरोप लगाया था। जिसमें उनका कहना है कि भारत में लोग मुस्लिम विरोधी भावनाओं को बढावा दे रहे हैं। 

OIC के अतिरिक्त यूनाइटेड नेशंस ने भी कहा है कि पूरी दुनिया में इस्लाम विरोधी भावनाएं बढ़ रही हैं।  जिसकी यूएन ने कुछ रिपोर्ट भी जारी की हैं। यूएन के अनुसार, यूरोप में 40% लोग इस्लाम विरोधी भावनाएं रख रहें हैं और यह ट्रेंड बड़ी तेजी से बढ़ रहा है। हालाकि यूएन ने इसका कारण भी बताया है कि पूरी दुनिया में इस्लाम विरोधी भावनाएं बढ़ने का प्रमुख कारण आंतकवाद है। क्योंकि कुछ देश अपने फायदे के लिए आंतकवाद को बढावा दें रहें हैं। जिसका सीधा असर मुस्लिम समुदाय पर पड़ रहा है। यूएन का कहना है कि आंतकवाद को बढावा देने वाले देशों को पहचानना होगा और उनको दंडित करना होगा। जिससे इस्लामोफोविया को दुनिया भर में फैलने से रोका जा सकें।


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