ऑमिक्रॉन तेल का खेल बिगाड़ रहा, ऑमिक्रॉन के भय से तेल के दामों में गिरावट शुरू हो गई।

ऑमिक्रोन तेल उत्पादक देशों का खेल खराब करने जा रहा है, एक बार फिर तेल के दाम गिरने शुरू हो गए हैं। जिससे  तेल उत्पादक देशों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। 

कोविड 19 के वैरिएंट ओमिक्रोन की चिंताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है। अगर यह इसी तरह जारी रहती है तो भारत के उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल के मंहगे दामों से छुटकारा मिल सकता है।

तेल की कीमतों में गिरावट शुरू

हमने देखा है कि नवम्बर महीने से पहले तेल के दाम आसमान छू रहे थे, लेकिन नवम्बर महीने के बाद ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में सबसे बड़ी मासिक गिरावट दर्ज़ की गई है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की पिछले महीने कीमत 84.4 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब नीचे गिर कर 70.6 डॉलर प्रति बैरल पहुंच चुका है। इतनी बड़ी गिरावट आने का कारण है कि कोरोना वायरस के ओमिक्रोन संस्करण पर मौजूदा वैक्सीन प्रभावी ढंग से कार्य नहीं करेंगी। हालाकि अभी ओपेक देशों का ब्रेंट क्रूड ऑयल 70 डॉलर प्रति बैरल पर ठहरा हुआ है। लेकिन अगर ओमिक्रोन से दुनिया में संक्रमण की दर बढ़ती है तो इसका सीधा असर तेल के दामों पर पड़ेगा। तेल के दामों में गिरावट के दुसरे कारण

तेल के दामों में गिरावट का दूसरा सबसे बड़ा कारण गैर तेल उत्पादक देशों के द्वारा अपने आपातकालीन कच्चे तेल भंडार को योजनाबद्ध तरीके से रिलीज करना है, जिनमें अमेरिका, चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं। जिन्होंने बढ़ते तेल के दामों को कम करने के लिए ऐसा किया था, जो पिछले साल 2020 के अक्टुबर महीने में 43 डॉलर प्रति बैरल थे, लेकिन एक वर्ष बाद यह 85.5 डॉलर प्रति बैरल हो गए हैं।

गैर तेल उत्पादक देशों का तेल की कीमतों में गिरावट लाने का प्रयास

अमेरिका ने अपने आपातकालीन तेल भंडार से 50 मिलियन बैरल कच्चा तेल निकालने की घोषणा की थी, जबकि भारत ने 5, मिलियन, यूके ने 1.5 मिलियन कच्चा तेल आपातकालीन तेल भंडार से जारी किया था। जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल के दामों में गिरावट आई थी।

भारतीय बाजार पर असर

जब अंतरराष्ट्रीय स्तर तेल के दामों में वृद्धि होती है तो का सीधा असर भारत के लोगों को दिखाई पड़ता है। लेकिन जब तेल के दामों में गिरावट आती है तो इसका फायदा भारत की आम जनता को प्राप्त नही होता है। 

जिसका उदाहरण पिछले साल कोविड 19 के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम 20 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए थे। लेकिन भारत की तेल कंपनियों ने नुकसान का बहाना बनाकर तेल के दामों में कमी करने से इंकार कर दिया था। जिसका फायदा केंद्र सरकार ने भी उठाया था, जिसने 13 रूपए पेट्रोल  और 16 रुपए डीजल पर टैक्स बढ़ाया था।

हालाकि तेल के अथाह कीमतों के बढ़ता देख केंद्र सरकार ने दीवाली से पहले 10 रुपए पेट्रोल और 5 रूपए डीजल पर टैक्स कम किया था। जिसके बाद केंद्र सरकार का सभी राज्य सरकारों ने ऐसा ही किया था। जिससे आम आदमी को मंहगाई से थोड़ा आराम मिला था।

ओपेक

ओपेक पेट्रोलियम उत्पादक देशों का एक संगठन है, जिसमें 13 देश शामिल हैं। इसकी स्थापना 14 सितंबर 1960 को बगदाद में केवल 5 सदस्यों के द्वारा हुई थी।इसका मुख्यालय ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में है, लेकिन ऑस्ट्रिया इस संगठन का सदस्य देश नहीं हैं।

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