नई पीढ़ी की प्रलय मिसाइल की विशेषताएं, जो उसे पृथ्वी मिसाइल से अलग बनाती है।

भारत के डीआरडीओ ने 22 दिसम्बर 2021 को नई पीढ़ी की सतह से सतह मार करने वाली शॉर्ट रेंज बैलेस्टिक प्रलय मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। इस मिसाइल का परिक्षण ओडीशा के अब्दूल कलाम द्वीप पर किया गया है, भारत में विकसित प्रलय  मिसाइल डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन के सभी पैरामीटर पर सही साबित हुई है। 

DRDO द्वारा ज़ारी प्रलय मिसाइल का परिक्षण

प्रलय मिसाइल की विशेषताएं

भारत में विकसित प्रलय मिसाइल एक कम दूरी की मिसाइल है, जो ठोस प्रणोदक रॉकेट मोटर और दूसरी नई पीढ़ी की तकनीकों से संचालित होती है। इसको बड़ी सरलता से मोबाइल लॉन्चर से लॉन्च भी किया जा सकता है और इसी के साथ बीच रास्ते में ही इसका पथ बदला जा सकता है। चाहें लक्ष्य गतिमान अवस्था में ही क्यों न हों। तब भी प्रलय मिसाइल से उसका बच निकलना नामुमकिन होगा। प्रलय मिसाइल की मार्गदर्शन प्रणाली में अत्याधुनिक नेविगेशन प्रणाली और एकीकृत एवियोनिक्स भी लगाया गया है। 

प्रलय मिसाइल  पृथ्वी  मिसाइल की जगह लेगी

भारत की पृथ्वी सतह से सतह मार कर सकने वाली छोटी दुरी की बैलेस्टिक मिसाइल है। जिसे भी भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा ही विकसित किया गया है। 

पृथ्वी  मिसाइल बेहद पुराने समय की मिसाइल है, जो 1990 के दशक की मिसाइल है। जबकि आधुनिक समय में लंबी दूरी की मिसाइल का ज्यादा इस्तेमाल नहीं होता है। इसके अलावा भारत के पास एक शक्तिशली छोटी दूरी की बैलेस्टिक मिसाइल भी नहीं थी। यहीं कारण है कि भारतीय वायु सेना को एक आधुनिक युग की छोटी दूरी तक मार कर सकने वाली बैलेस्टिक मिसाइल की जरूरत थी। 

प्रलय मिसाइल को विकसित करने की योजना

भारतीय वायु सेना को एक नई पीढ़ी की सतह से सतह मार कर सकने वाली बैलेस्टिक मिसाइल की सख्त जरूरत थीं। प्रलय मिसाइल को विकसित करने की परियोजना के लिए मार्च 2015 में 332.88 के बजट की मंजूरी दी थी। 2020 तक प्रलय मिसाइल की परियोजना की लागत 427 करोड़ रुपए (57 मिलियन डॉलर) तक पहुंच गई थी।


पाकिस्तान की कम दूरी की  बैलेस्टिक मिसाइल

पाकिस्तान के पास छोटी दूरी तक मार कर सकने वाली बैलेस्टिक मिसाइलों भी हैं। जिनमें कुछ पाकिस्तान में ही विकसित हैं और कुछ चीन से प्राप्त की गई हैं। 

1.गजनवी - (320 किमी)

2.एम-11 — (350 किमी) (चीन)

3.शाहीन - (750 किमी)

4.शाहीन- I - (900 किमी) 

5.शाहीन-आईए - (1000 किमी)

वैसे देखा जाए तो भारत अब पाकिस्तान को अपना प्रमुख दुश्मन नहीं मानता है। अब भारत का पहला और प्रमुख दुश्मन चीन है। उसी को देखते हुए भारत अपना मिसाइल प्रोग्राम आगे बढ़ा रहा है। आज भारत अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का परिक्षण कर रहा है, हम सब जानते हैं कि एक ICBM मिसाइल की मारक क्षमता 5000 किलोमीटर से अधिक की होती है। जबकि पाकिस्तान के लिए 2000 किलोमीटर तक की मिसाइल की जरूरत होती है। जिससे साफ हो जाता है कि भारत अब चीन को ध्यान में रख कर अपनी रक्षा प्रणाली आधुनिक बना रहा है। जबकि अब भारत  पाकिस्तान की मिसाइलों को एस 400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम से आसानी से मार गिरा सकता है।

भारत दूसरी कम दूरी की बैलेस्टिक मिसाइलों को विकसित कर रहा

भारत केवल एक ही छोटी दूरी की बैलेस्टिक मिसाइल ही नहीं बना रहा है। प्रलय मिसाइल के अतिरिक्त डीआरडीओ प्रहार, प्रगति और प्रणाश जैसी शॉर्ट रेंज मिसाइलों को भी विकसित कर रहा है। जिनकी मारक क्षमता इस प्रकार होगी।

1. प्रहार, 150 किलोमीटर (93 मील)

2. प्रगति,170 किमी (110 मील)

3. प्रणाश,200 (120 मील)

इनके अलावा भारत के पास शॉर्ट रेंज मिसाइलों में पृथ्वी 1 (150 किमी) पृथ्वी-II(250 किमी) पृथ्वी-III (350 किमी)और धनुष (150 से 400 किमी ) हैं।


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