रूस ने जापान के खिलाफ परमाणु क्षमता से लैस मिसाइल प्रणाली तैनात की, रूस कुछ बड़ा करने वाला है।

रूस भारत का सबसे विश्वास पूर्ण मित्र हैं। लेकिन रूस के वर्तमान के कार्य भारत की विदेश नीति को असमंजस में डाल रहें हैं। रूस ने हाल में ही जापान के खिलाफ अपना परमाणु क्षमता लैस सिस्टम तैनात कर दिया है। इस घटना चक्र ने पूरे जापान में पैनिक का माहौल उत्पन्न कर दिया है।

जापान के प्रसिद्ध समाचार पत्र जापान टुडे के अनुसार, रूस ने जापान के निकट पैसिफिक सागर में अपना परमाणु क्षमता से लैस सिस्टम को तैनात किया है। रूस की सेना ने यह तटीय रक्षा मिसाइल प्रणाली प्रशांत द्वीप कुरील द्वीप के पास तैनात किया है।

दरअसल रूस और जापान के बीच कुछ प्रशांत द्वीपों को लेकर बहुत बड़ा विवाद है। सेकंड विश्व युद्ध के बाद, रूस और जापान दोनों प्रशांत महासागर में उपस्थित कुरील द्वीप समूह को लेकर दावा करते हैं। कुरील द्वीप, जिसे जापान अपने उत्तरी क्षेत्र का हिस्सा मानता है। यह जापान में होक्काइडो से कमचटका प्रायद्वीप तक लगभग 1,300 किमी उत्तर पूर्व में फैला है। जबकि रूस कुरील द्वीप समूह को सुदूर पूर्व में 'सखालिन ओब्लास्ट' का हिस्सा मानता है। कुरील द्वीप समूह में 50 द्वीप मौजूद हैं, इन 50 में से 20 पर रूस का कब्जा है। 

रूस के जापान के पास परमाणु क्षमता से लैस मिसाइल प्रणाली को तैनात करने के दो कारण हैं। पहला रूस अगले 2 से 3 महीनों में यूक्रेन पर आक्रमण करने वाला है और आधे या पूरे यूक्रेन को रूस का हिस्सा बना लेगा। दूसरा कारण जापान का बढ़ता रक्षा बजट हैं। जापान ने इस वर्ष 2021 में  6.8 बिलियन डॉलर की वृद्धि की है। जिससे उसका रक्षा बजट 47 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 53.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर हों गया है। जिससे रूस थोड़ा सहम गया है और वह धीरे धीरे जापान की घेरा बंदी करना चाहता है। 

एक ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि जापान और रूस सेकंड विश्व युद्ध में एक दुसरे के शत्रु थे। विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद, रूस और जापान ने एक समझौता किया था। जिसमें दोनो देशों के बीच शान्ति के लिए कोई बातचीत नहीं हुई थी, बस दोनों देश थोड़े समय के लिए युद्ध नहीं लड़ेंगे।

जबकि भारत और पाकिस्तान के बीच 1971 की लड़ाई के बाद एक शान्ति समझौता हुआ था। जिसको भारत के राज्य हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में 2 जुलाई 1972 को किया गया था। दुनिया जिसे आज शिमला समझौता के नाम से जानते हैं।

हालाकि रूस इस बात को अच्छी तरह से जानता है कि जापान को अमेरिका के "परमाणु अंब्रेला" के तहत सुरक्षा प्रदान है। जिसके अनुसार अगर कोई परमाणु शक्ति से संपन्न देश जापान पर परमाणु बॉम्ब से हमला करता है। तो जापान पर किया गया। यह हमला अमेरिका पर माना जाएगा और अमेरिका इस हमले का जबाव परमाणु हमला करके देगा।

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