दुनिया ने चीन का बॉयकॉट शुरू किया, अमेरिका ने चीन के खिलाफ उठाया कड़ा कदम।

जिस तरह से वर्तमान में चीन की गैर जिम्मेदार हरकतें हैं, उससे दुनिया का हर देश परेशान हो गया है। अब उन्होंने चीन की हरकतों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। 

अमेरिका ने चीन में होने जा रहे शीतकालीन ओलंपिक 2022 का कूटनीतिक बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया है। इस मामले पर व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव ने बताया है कि चीन उइगर मुस्लिम लोगों का नरसंहार कर रहा है, चीन के इन्हीं अमानवीय कृत्यों के कारण अमेरिका चीन में होने जा रहे शीतकालीन ओलंपिक का कूटिनीतिक बहिष्कार करेगा। इस कूटिनीतिक बहिष्कार में यूएसए का कोई भी अधिकारी  शीतकालीन बीजिंग ओलंपिक में शामिल नहीं होगा।  

चीन अमेरिका पर भड़क गया

अमेरिका के इस कदम से चीन भड़क गया और उसकी निराशा ग्लोबल टाईम्स के संपादक के ट्वीट से समझी जा सकती है। जिसने अपने ट्वीट में लिखा कि केवल अति संकीर्णतावादी लोग ही अपनी अनुपस्थिति को एक शाक्तिशाली बहिष्कार के रुप में मानेंगे। अमेरिका के ज्यादातर अधिकारी कोविड 19 से संक्रमित हैं और वह चीन के कोविड 19 मानक के अनुसार चीन में नहीं आ सकतें हैं।  इसके अलावा ढीठ और दिखावा करने वाले हैं और आगे कहा कि अमेरिका के अधिकारी वे लोग हैं। जिन्हें बीजिंग के लोग कम से कम देखना पसंद करते हैं।

अमेरिका के साथी देशों का अनुसरण

दरअसल चीन इसलिए परेशान हैं कि अमेरिका के शीतकालीन बीजिंग ओलंपिक के बहिष्कार के ऐलान करने के बाद, दुसरे पश्चिमी देशों इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी, कनाडा और सभी यूरोपीय देशों ने भी अमेरिका का ही अनुसरण किया है। जिन्होंने भी निर्णय लिया है कि वे बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक का बहिष्कार करेंगे। 

ओलंपिक बहिष्कार के पीछे श्राप

अमेरिका और दूसरे पश्चिमी देशों ने बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक  का बहिष्कार किया है। लेकिन इसका चीन पर गम्भीर परिणाम पड़ सकतें हैं। जिसके इतिहास में कुछ उदाहरण देखने को मिल जातें हैं, जब जब किसी देश में होने जा रहे ओलंपिक खेलों का बहिष्कार हुआ है। तो उस देश के साथ अगले 10 वर्षों के अंदर बहुत बुरा हाल हुआ है।

क्रिस अलेक्जेंडर प्रेस रिपोर्टर 

1936 का जर्मन ओलंपिक का बहिष्कार

जब 1936 के समय में जर्मनी पर हिटलर का राज था, तब उसने अपने राज में यहूदियों का बड़े पैमाने पर नरसंहार किया था। जिसके जबाव में दूसरी बड़ी ताकतों ने 1936 के जर्मन ओलंपिक खेलों का बहिष्कार किया था। इस बहिष्कार के 10 वर्षों बाद जर्मनी विश्व युद्ध में हार गया था और जर्मनी टूटकर दो भागों में बंट गया।

सोवियत संघ

इसी तरह पश्चिमी देशों ने सोवियत संघ में होने वाले मॉस्को 1980 के शीतकालीन ओलम्पिक खेलों का बहिष्कार किया था। जिसके तुरन्त बाद पोलैंड का सॉलिडार्नोस अस्तित्व में आया और 1991 तक वारसॉ पैक्ट और सोवियत संघ बिखर गए।  सोवियत संघ के बिखरने से 15 नए देशों का जन्म हुआ था।

यहीं कारण है कि दुनिया आज पश्चिमी देशों के द्वारा किए जा रहे बीजिंग ओलंपिक के बहिष्कार को ओलंपिक इतिहास से जोड़ कर देख रहीं है। क्योंकि आज दुनिया बंट रही है, जिस प्रकार से प्रथम और द्वितीय स्थान युद्ध के दौरान दुनिया दो खेमों में बंट गई थी। इसी तरह बर्तमान काल में दुनिया खेमों में बंट रही है, जिससे लग रहा है कि दुनिया में शीघ्र कुछ बड़ा घटने वाला है। 

भारत पश्चिमी देशों से अलग राह पर

भारत सभी पश्चिमी देशों से अलग राह पर चल रहा है, जो सभी भारतीयों के दुख का कारण हैं। क्यों कि चीन आज भारत की सीमा पर गिद्ध नज़र बनाए बैठा हुआ है और हम चीन के शीतकालीन ओलंपिक 2022 का समर्थन कर रहें हैं। भारत ने हाल ही में RIC में चीन के शीतकालीन ओलंपिक का समर्थन किया है, जोकि भारत की विदेश नीति के लिए शर्म का कारण हैं।

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