पाकिस्तान के पीएम इमरान खान का बड़ा दुस्साहस, जिन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति का खुला अपमान कर दिया

भारत का पड़ोसी किस कदर से चीन के कब्जे में आ गया है, उसका इस बात से अनुमान लगा सकते हैं कि अमेरिका ने कुछ दिनों पहले लोकतंत्र पर शिखर सम्मेलन बुलाया था।  यह सम्मेलन 9 दिसम्बर से 10 दिसम्बर तक चलने वाला था।  जिसमें भारत, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, कनाडा, नेपाल और दूसरे पश्चिमी देश भी शामिल होने जा रहें हैं। लेकिन पाकिस्तान ने चीन के दवाब में आकर जोए बाइडेन द्वारा बुलाए गए लोकतन्त्र शिखर सम्मेलन में शामिल होने से इंकार कर दिया। 


पाकिस्तान की सबसे बड़ी गलती
पाकिस्तान अमेरिका के लोकतंत्र के शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं होने से इंकार कर दिया। लेकिन यह पाकिस्तान की सबसे बड़ी गलती साबित होने जा रही है। क्यों कि इससे भारत को सीधा फायदा होगा। अब अमेरिका  के नीति निर्धारकों को पाकिस्तान की सच्चाई का पता चल गया है कि वह अब अमेरिका का सहयोगी नही रहा है। जिससे अमेरिका भविष्य में पाकिस्तान पर बहुत बड़ी कार्यवायी भी कर सकता है।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था IMF और विश्व बैक के कर्ज पर टिकीं है, अमेरिका की इन सभी संस्थानों पर कड़ी पकड़  है। अमेरिकी दवाब में IMF और विश्व बैंक पाकिस्तान को कर्ज़ देने से मना कर देगें। इसके अलावा अमेरिका पाकिस्तान पर कड़े प्रतिबंध भी लगा सकता है। क्यों कि पाकिस्तान चीन की तरह अमेरिका के सामने ज्यादा समय तक टिका नहीं रह सकता है। 

पाकिस्तान के शामिल न होने का कारण ताइवान

पाकिस्तान  अमेरिका के लोकतान्त्रिक शिखर सम्मेलन में शामिल न होने का प्रमुख कारण ताइवान हो सकता है। क्यों कि अमेरिका ने चीन और रूस को इस सम्मेलन में नही बुलाया है। जबकि ताइवान को एक देश के रूप में अमेरिका ने लोकतान्त्रिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया है। चीनी दवाब के चलते पाकिस्तान ने  सम्मेलन में शामिल होने से इंकार किया है।

अभी कुछ महीने पहले पाक पीएम इमरान खान ने लोकतान्त्रिक व्यवस्था से अच्छा चीनी सिस्टम को बताया था, जिससे यह लग रहा है कि पाकिस्तान जल्द ही लोकतान्त्रिक व्यवस्था को त्याग सकता है। लेकिन क्या पाकिस्तान इसके लिए पूरी तरह जिम्मेदार है। क्यों कि चीनी सिस्टम को केवल शक्ति के दम पर बनाया रखा जा सकता है। जिस तरह से चीन ने Tiananmen Square पर विद्यार्थियों के विरोध को सैन्य टैंकों से से कुचल दिया था, जिसमें  करीब 10,000 से ज्यादा लोग मारे गए थे।  अगर पाकिस्तान विरोध को दबाने में विफल रहता है तो पाकिस्तान बांग्लादेश की भांति कई टुकड़ों में टूट सकता है।

पाकिस्तान ने जोए बाइडेन अपमान किया

पाकिस्तान का लोकतान्त्रिक शिखर सम्मेलन में शामिल न होना अमेरिका के राष्ट्रपति का खुला अपमान है। क्यों कि पाकिस्तान एक छोटा और भिखारी देश है। पाकिस्तान का निकट भविष्य में दुसरे देश भी अनुसरण कर सकते हैं, वे भी अमेरिका के द्वारा बुलाए गए शिखर सम्मेलन में भाग लेने से इंकार कर सकतें हैं। 
लेकिन इस बात से साफ दिख रहा है कि जोए बाइडेन के नेतृत्व में अमेरिका की सॉफ्ट पॉवर कम हुईं हैं। अब तो पाकिस्तान जैसा देश अमेरिका के कार्यक्रमों में हिस्सा नहीं ले रहा है और चीन के दवाब में आकर साफ इंकार कर रहा।

चीन पाकिस्तान के कदम से खुश

पाकिस्तान अमेरिका के लोकतान्त्रिक शिखर सम्मेलन में नहीं शामिल हों रहा है, जिससे चीन बहुत खुश हो गया है। चीनी मीडिया इसका जमकर प्रचार कर रही है।  चीन के CGTN न्यूज चैनल कहा कि पाकिस्तान अमेरिका के लोकतान्त्रिक शिखर सम्मेलन को छोड़ रहा है।

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