दुर्गा पूजा यूनेस्को की Intangible Cultural Heritage विरासत सूची में शामिल हुई, इस मामले में चीन भारत से कहीं आगे।

दुर्गा पूजा बंगाल और पूरे भारत की अमर सनातन संस्कृति का अहम हिस्सा है। जिसको  हिन्दूओ के साथ साथ बौद्ध, जैन और सिख भी धूम धाम से मनाते हैं। बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान बड़े बड़े दुर्गा पूजा पंडालों को सजाया संवारा जाता है और हर बंगाली बड़ी श्रद्धा से मां दुर्गा की साधना करता है। 



भारत की सनातन संस्कृति के इस अहम त्यौहार दुर्गा पूजा को यूनेस्को ने अपनी मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची  2021 में (Inscribed in 2021 on the Representative List of the Intangible Cultural Heritage of Humanity)  शामिल कर लिया है। 


यह इतनी बड़ी खुशखबरी है कि भारत के पीएम मोदी ने ट्विटर पर अपनी खुशी जाहिर की है। हर भारतीय के लिए बड़े गर्व और खुशी की बात!  दुर्गा पूजा हमारी सर्वोत्तम परंपराओं और लोकाचार को उजागर करती है।  और, कोलकाता की दुर्गा पूजा एक ऐसा अनुभव है जो हर किसी के पास होना चाहिए।



यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची

यूनेस्को अपनी मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में धरती की प्राचीन विरासतों को जगह देता है। जिसमें कोई त्यौहार, भाषा, कला, नृत्य, और दूसरी प्राचीन परम्पराओं को शामिल किया जाता है। यूनेस्को में शामिल सभी विरासतों का प्रचार होता है, जिससे दुनिया उसके बारे में जानती है। इसी तरह दुर्गा पूजा का भी दुनिया में प्रचार होगा, जिससे लोग दुर्गा पूजा के महत्व को जान सकेंगे।

कुल देशों की विरासतें शामिल

अभी तक यूनेस्को की Intangible Cultural Heritage of Humanity list में 138 देशों की 618 विरासतों को शामिल किया गया है। जिसमें सबसे ज्यादा चीन की 42 सांस्कृतिक विरासतें शामिल हैं। इस लिस्ट में  भारत की दुर्गा पूजा सहित 14 विरासतें शामिल हैं। अगर हम भारत की विशाल सांस्कृतिक विरासत को देखें तो यह संख्या बेहद कम है। हमें यूनेस्को की इस लिस्ट में एक अच्छा स्थान मिलना चाहिए क्योंकि भारत में हजारों कलाएं, भाषाएं, और हर क्षेत्र की अपनी अलग संस्कृती है। अगर सच में कहूं, हमारा देश संस्कृतियों का देश है। भारत के  पड़ोसी देश पाकिस्तान और बांग्लादेश की यूनेस्को की Intangible Cultural Heritage of Humanity list में मात्र 4-4 ही विरासतें शामिल हैं। अगर हम पश्चिमी देश फ्रांस की बात करें तो इस लिस्ट में उसकी 24 प्राचीन विरासतें शामिल हैं।

भारत की विरासतें शामिल

यूनेस्को की इस लिस्ट में भारत की ओर पहली बार वैदिक जप (Tradition of Vedic Chanting 2008) को शामिल किया गया था। क्योंकि वेदों के जपने और मंत्रो को बोलने की एक अलग क्रिया होती है, जो बेहद खूबसूरत और आकर्षक होती है। इसके बाद रामलीला (2008),  छाऊ नृत्य(2010), योग (2016) , कुम्भ मेला (2017), नवरोज (2016) और Kutiyattam, Sanskrit theatre (2008) में शामिल किए गए थे। यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में भारत की कुल 14 विरासतें शामिल हैं।

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