पाकिस्तान का आतंकी चेहरा फिर एक बार दुनिया के सामने आया, आतंकी संगठन तालीबान का विदेश मंत्री OIC मीटिंग में शामिल हुआ।

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद  में इस्लामी सहयोग का संगठन (OIC) का 17वा सत्र चल रहा है। जिसमें इस्लामिक देशों के विदेश मंत्री शामिल हों रहें हैं, जो मानवीय मूल्यों पर बात करेंगे। 

पाकिस्तान की खतरनाक चाल

इस बार OIC की विदेश मंत्रियों के सत्र को पाकिस्तान आयोजित कर रहा है और इसका फायदा पाकिस्तान ने उठाना शुरू कर दिया। पाकिस्तान ने अपने खतरनाक मंसूबों को उजागर कर दिया। क्योंकि पाकिस्तान ने इस्लामी सहयोग का संगठन की विदेश मंत्रियों की मीटिंग में आतंकवादी संगठन तालीबान को भी आमंत्रित किया है। जबकि अभी दुनिया के किसी भी देश ने तालीबान को मान्यता नहीं दी है। लेकिन पाकिस्तान तालीबान को मान्यता दिलवाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रहा है। यहीं कारण है कि पाकिस्तान के पीएम इमरान खान हर बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर से तालीबान को मान्यता देने की गुहार लगा रहे हैं। जिसके लिए वो दुनिया को आंतकवाद की धमकी भी दे रहें हैं। 

मध्य एशियाई देशों का वहिष्कार

सभी मध्य एशियाई देशों ने पाकिस्तान के मंसूबों को समझते हुए, इस्लामाबाद में विदेश मंत्रियों की मीटिंग में शामिल होने नहीं गए।  जबकि मध्य एशियाई देशों के 5 विदेश मंत्री भारत मध्य एशियाई विदेश मंत्री वार्ता में शामिल हुए। सभी सेंट्रल एशियाई देश किर्गिस्तान, उज़्बेकिस्तान, तजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज़्बेकिस्तान तालीबान को मान्यता देने को तैयार नहीं हैं। जबकि पाकिस्तान तालीबान के मान्यता दिलवाने के लिए पूरा जोर लगा रहा है। ये सभी देश जानते हैं कि पाकिस्तान आतंकियों का घर है और तालिबान के बड़े बड़े आतंकवादी 20 वर्षों तक पाकिस्तान में रहें थे। जिनकी पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई ने सुरक्षा की थी।

इमरान खान का OIC मीटिंग में कश्मीर राग

पाकिस्तान के राजनेताओं ने कश्मीर के कारण अपने पूरे देश को बर्बाद कर दिया है। क्यों कि पाक ने कश्मीर को पाने के लिए कई बड़े युद्ध लड़े। लेकिन जब वह युद्धों से सफल नहीं हुआ। तो उसने आंतकवाद का सहारा लिया और भारत के खिलाफ़ अपनी एक प्रॉक्सी वॉर छेड़ रखी है। कश्मीर पाकिस्तान में अफीम जैसा है, जिसको पाकिस्तान का हर राजनेता अपनी राजनीति चमकाने में कर रहा है। यहीं कारण है कि पाकिस्तान के पीएम इमरान ने इस्लामी सहयोग संगठन का इस्तेमाल करते हुए अपना कश्मीर मुद्दा उठा दिया। उन्होंने OIC मीटिंग में कहा कि कश्मीर के लोग इस्लामी सहयोग संगठन के देशों की ओर देख रहें हैं। 

तालीबान के विदेश मंत्री भी OIC मीटिंग में शामिल हुए

पाकिस्तान ने ओआईसी की मीटिंग में तालिबान सरकार के कार्यवाहक विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी को भी आमंत्रित किया है। पाकिस्तान तालिबान को ओआईसी मीटिंग में शामिल कराकर दुनिया को संदेश देना चाहता है। कि OIC देशों को तालीबान के बातचीत करने में कोई परेशानी नहीं है। जबकि सच्चाई यह है कि दुनिया तालिबान मुद्दे पर पाकिस्तान की जरा भी नहीं सुन रही है। 



लेकिन पाकिस्तान दुनिया में तालिबान को मान्यता दिलवाने के लिए मेहनत कर रहा है। जबकि पाकिस्तान ने अभी तक खुद तालिबान को मान्यता नहीं दी है। जिसकी एक झलक OIC के 17 वे सत्र में भी दिख रही है। जिसमें अफ़ग़ानिस्तान के पुराने झंडे को लगाया गया है जबकि तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान के झंडे को बदल दिया है।

इस्लामी सहयोग संगठन की मीटिंग पर आतंकी खतरा

इस्लामी सहयोग संगठन के ज्यादातर सदस्य देश शामिल नहीं हुए हैं। जिसका सबसे बड़ा कारण हैं, पाकिस्तान में बढ़ता आतंकवादी खतरा है। क्योंकि हाल में ही पाकिस्तान तालिबान ने शान्ति समझौता तोड़ दिया है और युद्ध की एक बार फिर घोषणा कर दी। 


इस्लामी सहयोग संगठन में 52 देश शामिल हैं और पाकिस्तान में मात्र 20 के करीब देशों के विदेश मंत्री ही शामिल हुए हैं।


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