2021 में रूस की आबादी में 12 लाख से अधिक की गिरावट, अब काम योग्य 8.1 करोड़ लोग ही बचे।

भारत अपनी विशाल जनसंख्या से परेशान हैं। जहां ज्यादा आबादी के कारण ढेर सारी समस्याएं हैं। जबकि दूसरी तरफ रूस जनसंख्या के महा कमी की ओर अग्रसर है। जहां हर वर्ष आबादी में बड़े पैमाने पर गिरावट देखने को मिल रही है।  इस खबर को पूरी दुनिया की मीडिया कवर कर रहीं है। कुछ तो कह रहें हैं कि 14.40 मिलियन नाकाफी हैं। पश्चिमी मीडिया तो यह भी कह रहा है कि रूस यूक्रेन को अपने देश में शामिल कर अपने आबादी संकट को दूर कर रहा है। 


दरअसल सांख्यिकी एजेंसी रोसस्टैट (ROSSTET) ने शुक्रवार 28 जनवरी को अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि रूस की आबादी में पिछले साल 2021 में एक मिलियन से अधिक लोगों की गिरावट आई है, जो 1992 में सोवियत संघ के बिखराव के बाद ऐतिहासिक है। इसमें 660,000 से अधिक लोगों की मौत केवल कोरोनोवायरस से हुईं है। कोविड 19 ने रूसी आबादी  के संकट को ओर अधिक गहरा कर दिया।

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वर्तमान में रूस की कुल आबादी 14.41 करोड़ लोग ही बचे हैं। जोकि धरती के विशाल भूभाग वाले देश को सुचारू ढंग से चलाने के लिए कम हैं। इसके अलावा इन 14.41 करोड़ लोगों में से योग्य 8.1 करोड़ ही हैं। जो काम करने के योग्य हैं और बचे लोग बूढ़े लोगों की आबादी है। 

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अगर इसी तरह से रूस की आबादी गिरती गई तो इसका असर रूस की रक्षा पर जरूर पड़ेगा। क्योंकि रूसी सेना में भर्ती होने वाले लोगों का संकट उत्पन्न हो रहा है। जिसका कारण है कि रूस की आबादी की औसत आयु 40 वर्ष के क़रीब है। जबकि भारत जैसे देश में यह 26 वर्ष है। 


रूस अपनी आबादी के संकट को प्रवास से पूर्ण कर सकता है। जिस तरह से पश्चिमी और अमेरिका जैसे देश करते हैं। वह भारत जैसे देश से ज्यादा बुद्धिमान और कुशल लोगों को अपने देश में बुला लेते हैं। जिससे ये सभी देश अपनी जनसंख्या की कमी को पूर्ण कर लेते हैं। अमेरिका तो विदेशी जनसंख्या पर ही खड़ा है। जबकि रूस ऐसा नहीं कर पा रहा है। क्योंकि रूस एक शक्तिशाली और आकर्षक इकोनॉमी नहीं है। वहां लोगों की औसत सैलरी 35 से 40 हजार के करीब है। 


सोवियत संघ ने अपनी आबादी को बढ़ाने के लिए कुंबरा कर लगाया था। जो लोग शादी नहीं करते थे, उन पर सोवियत संघ उनकी आय पर 6 से 7% का कर लगाती थी। लेकिन वर्तमान रूस अपने इतिहास के सबसे बुरा हाल से गुजर रहा है। आज दुनिया के विशाल देश की जन्म दर 1.5 तक आ गिरी है। जबकि अगर किसी देश को अपनी आबादी स्थाई रखनी है तो उसकी जन्म दर 2.1 आवश्य होनी चाहिए। अन्यथा इसके नीचे आते ही आबादी में गिरावट का चक्र शुरू हो जाता है।


रूस ही आबादी संकट से अकेले नहीं जूझ रहा है। कम आबादी के महासंकट से जापान, यूरोपीय देश, आस्ट्रेलिया, व ब्रिटेन भी सफ़र कर रहे है। 

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