भारत को 2022 में 18 लाख करोड़ का विदेशी कर्ज चुकाना पड़ेगा। जानें विस्तार से

भारत के लिए बर्ष 2022 बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत को अगले 12 महीनों में करीब $256 बिलियन डॉलर विदेशी कर्ज वापस करना पड़ेगा। इसलिए इसका अधिक दवाब भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी पड़ने वाला है। क्योंकि विदेशी कर्ज का ज्यादातर हिस्सा विदेशी मुद्रा भंडार से ही चुकाया जायेगा। इसलिए हम देखेंगे कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 2022 में लगभग 450 बिलियन डॉलर तक रहने वाला है।  अभी हमारा विदेशी मुद्रा भंडार 632 बिलियन डॉलर है जबकि कुछ महिने पहले तक यह 800 बिलियन डॉलर से अधिक था। 

विदेशी कर्ज हमेशा लंबे समय के लिए लिया जाता है। जबकि भारत ने 256 बिलियन डॉलर का विदेशी कर्ज करीब 15 से 20 बर्ष पहले लिया था और उसको पुनः वापस करने का समय आ। गया है। 

भारतीय उधारकर्ताओं को विदेशी कर्ज बाहरी वाणिज्यिक उधार  (ईसीबीएस)  अनिवासी उधारदाताओं द्वारा विदेशी मुद्रा में दिया गया ऋण हैं। भारत के निगमों और PSUS सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUS) द्वारा विदेशी धन प्राप्त करने की सुविधा के लिए ईसीबीएस का भारत में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।

बाहरी वाणिज्यिक उधार (ईसीबीएस)

बाहरी वाणिज्यिक उधार (ईसीबीएस) भारत में अनिवासी उधारदाताओं द्वारा विदेशी मुद्रा में भारतीय उधारकर्ताओं को दिए गए ऋण हैं। भारतीय निगमों और PSUS (सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों) द्वारा विदेशी धन तक पहुंच की सुविधा के लिए उनका भारत में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।

अगर हम बात करें कि बाहरी वाणिज्यिक उधार (ईसीबीएस) में वाणिज्यिक बैंक ऋण, खरीदारों का ऋण, आपूर्तिकर्ताओं का ऋण, प्रतिभूतिकृत उपकरण जैसे फ्लोटिंग रेट नोट और फिक्स्ड रेट बॉन्ड आदि शामिल हैं। भारत के विदेशी कर्ज वाणिज्यिक उधार (कमर्शियल उधार) का सबसे बड़ा हिस्सा है। जोकि करीब 213.2 बिलियन डॉलर (37.40%) है। इसके बाद दूसरा स्थान एनआरआई जमा का जमा का है। जोकि करीब 141.9 बिलियन डॉलर (24.89%) बैठता है।

मार्च 2021 के अनुसार, भारत का विदेशी कर्ज

  1. बहुपक्षीय 69.7 (12.23%)
  2. द्विपक्षीय 31.0 (5.44% )
  3. निर्यात ऋण 6.5 (1.14%)
  4. वाणिज्यिक उधार 213.2 (37.40%)
  5.  एनआरआई जमा 141.9 (24.89%)
  6.  रुपया ऋण 1.0 (0.18%)
  7.  कुल दीर्घकालिक ऋण 468.9 (82.26%)

  •  कुल अल्पकालिक ऋण 101.1 (17.4%)
  •  कुल विदेशी ऋण 570.0 (100%)

भारत का लम्बे समय वाले कर्ज का हिस्सा 82.26% हैं जोकि करीब 468 बिलियन डॉलर बनता है और कम अंतराल वाले विदेशी कर्ज का हिस्सा 17.74% है। जो अमेरिकी डॉलर में 101.1 बिलियन डॉलर बनता है। मार्च 2021 के अनुसार, भारत पर कुल विदेशी कर्ज 570 बिलियन डॉलर है। 

भारत विदेशी कर्ज लेता क्यों

किसी भी देश को अपने विकास के लिए विदेशी धन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। जिसमें विदेशी कर्ज सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि परियोजनाओं के लिए ज्यादा मात्रा में धन की जरूरत होती है। कोई भी देश विदेशी कर्ज से मुक्ति नही पा सकता है। इसलिए भारत को भी विकास के लिए बड़े पैमाने पर विदेशी धन की आवश्यकता है। चाहें वो कर्ज़ के रूप में ही न लिया जाए।

भारत सरकार को 256 बिलियन डॉलर का विदेशी कर्ज चुकाने में अधिक परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। जिसका कारण हमारा विदेशी मुद्रा भंडार है और जबकि सरकार एक तरफ कर्ज वापस करेंगी और दूसरी तरफ से पुनः कर्ज़ ले लेंगी। यह एक हमेशा चलने वाली प्रक्रिया है। हा लेकिन भारत एक आर्थिक तौर पर मज़बूत देश है। जिससे भारत को कम ब्याज दर पर विदेशी कर्ज प्राप्त हो जाता है। जबकि श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे देशों को उच्च ब्याज दर पर विदेशी कर्ज प्राप्त हो पाता है। क्योंकि गरीब देशों में कर्जदाताओं को अपने पैसे के डूबने का डर बना रहता है। जबकि भारत जैसे देश में मुनाफे का सौदा होता है और उनको अपने पैसे को लेकर कोई चिंता या भय नहीं होता है।

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