मंगल ग्रह पर 3 अरब वर्ष पहले नदियां व झीलें थी, लेकिन वायुमंडल व वातावरण में आए परिर्वतन ने मंगल ग्रह को वीरान बना दिया

अमेरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने मंगल ग्रह पर पानी को लेकर एक दावा किया है। उसका कहना है कि हमारे सौर मंडल के लाल ग्रह पर आज से 2 अरब वर्ष पूर्व पानी बड़ी मात्रा में मौजूद था। 

फोटो नासा द्वारा

नासा के वैज्ञानिकों ने कहा है कि मंगल ग्रह की सतह पर आज से लगभग 2 से 2.5 अरब वर्ष पूर्व बड़ी संख्या में नदियां और झीलें बहती थी। जोकि मानव सभ्यता के लिए एक महत्वपूर्ण ख़ोज मानी जा सकती है और एक चेतावनी भी समझ सकतें हैं। 

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आज से लगभग 1 से 1.5 वर्ष पूर्व मंगल ग्रह की सतह का तरल पानी भाप बनकर उड़ गया। जोकि ग्रह के वायुमंडल में आए परिवर्तन के कारण हुआ था। इसी के साथ ग्रह का वातावरण भी समय के साथ बदलता गया। हालाकी यह सच्चाई भी है कि हमारे लाल ग्रह का अधिकतर पानी खनिज चट्टानों के बीच में मौजूद है। जोकि करीब 40 से 99% तक हो सकता है।

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हमारे नाना नानी हमेशा मंगल ग्रह को सौर मंडल का लाल ग्रह भी कहा करते थे। जोकि वास्तव में लाल रंग का ही है। जिसका कारण मंगल ग्रह की सतह पर मौजूद आयरन ऑक्साइड है। इसी वजह से यह लाल रंग का है। 

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मगंल ग्रह सौर मंडल के केंद्र सूर्य से चौथे स्थान पर काबिज है। जो हमारी धरती के तुरन्त बाद आता है। मंगल ग्रह का व्यास 6791 किलोमीटर है। जबकि धरती का व्यास 12755 किलोमीटर है।  अर्थात् हमारी धरती आकार के मामले में मंगल ग्रह से दोगुनी है।

मगंल ग्रह पर मौजूद पानी

नासा दुनिया की पहली अंतरिक्ष एजेंसी है, जिसने मगंल ग्रह पर ज्यादा ध्यान दिया है। इसी चरण में उसने मार्स रिकोनीसेंस ऑर्बिटर को मगंल ग्रह की कक्षा में स्थापित किया। इसी ऑर्बिटर ने नासा को बताया कि मगंल ग्रह का जेजोरा क्रेटर एक विशाल नदी का स्थल था। यह ख़ोज मानव जीवन के लिए नए दरबाजे खोल सकती है और यह पहली सीढ़ी है। जिससे साबित किया जा सके कि मगंल ग्रह पर अभी भी जीवन मौजूद है।

फोटो नासा द्वारा

मगंल ग्रह की सतह को ठीक से देखने पर ऐसा लगता है कि वहां कभी नदियों में बाढ़ आती हों। जिससे मगंल की सतह पर धरती की तरह चिन्ह प्रकट हो गए। वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्रह पर गर्म और आर्द्र दोनों तरह का मौसम था। जिसका प्रमाण नीचे की तीन परतों में पानी का निरंतर प्रवाह है। 

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उच्च रेजुल्यूशन डिजिटल कैमरों का उपयोग करते हुए, लीस्क और एहलमैन ने पाया कि कई लवण अवसाद में थे तथा उथले तालाबों के लिए, हल्के ढलान वाले ज्वालामुखी मैदानों पर पर मौजूद थे। इसके अलावा वैज्ञानिकों ने पास में घुमावदार, शुष्क चैनल भी पाए। 

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लाल ग्रह पर नमक खनिज की ख़ोज 14 वर्ष पहले ही हो गई थी।  यह बड़ी ख़ोज नासा के मार्स ओडिसी ऑर्बिटर द्वारा की गई थी, जिसे उसने 2001 में लांच किया था।

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