भारत-इजराइल की सुनहरी दोस्ती के 30 वर्ष पूरे , दोनों देशों की प्राचीन इमारतों पर झंडे बनाए गए

भारत-इज़राइल की दोस्ती के पूरे 30 वर्ष हो गए हैं। इसी उपलक्ष्य में दोनों देशों ने अपनी प्राचीन इमारतों पर राष्ट्रीय झंडो को फहराया। इसके अलावा दोनों देशों के संबंधों पर एक प्रतीक चिन्ह भी जारी किया गया। जिसमें भारत और इजराइल के राष्ट्रीय प्रतीक शामिल हैं।

वर्तमान समय में इजराइल भारत का सबसे अहम साझेदार और मित्र राष्ट्र है। लेकिन जिसे भारत ने 1950 अधिकारिक तौर पर राष्ट्र के रूप में मान्यता प्रदान कर दी थी। किंतु उससे राजनयिक संबंध स्थापित करने में 42 वर्ष लगा दिए गए। जबकि उसने भारत की पाकिस्तान के साथ युद्ध में हमेशा मदद की थी। 

भारत सरकार ने इजराइल के साथ राजनयिक संबंध 26 जनवरी 1992 में स्थापित किए। 2020 के आंकड़ों के साथ, भारत उन 160 देशों में शामिल है। जिन्होंने इजराइल को एक देश के रूप में मान्यता प्रदान की है। कभी इजराइल के धुर विरोधी अरब देश थे। अब वो भी इजराइल के घोर समर्थक बनते जा रहे हैं। जिनमें संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब शामिल हैं। यहां तक तुर्की ने मार्च 1949 में ही इजराइल को मान्यता दे चुका है। जबकि पाकिस्तान ने अभी तक इजरायल को मान्यता नहीं दी है। 

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भारत इजरायल के बीच कुछ समानताएं भी हैं, जैसा कि भारत इस वर्ष अपना 75 गणतंत्र दिवस मना रहा है और इजरायल अगले वर्ष अपना 75वा स्वतंत्रता दिवस मनायेगा। इसी लिए भारत-इजरायल दोनों मिलकर अपने 30 वर्षों के राजनयिक संबंधों पर जश्न मना रहे हैं।


वर्ष 2000 में, लाल कृष्ण आडवाणी वो पहले भारतीय मंत्री थे, जो इजरायल की यात्रा पर गए थे। जबकि इजराइली यात्रा पर जाने वाले पहले पहले विदेश मंत्री जसवंत सिंह जी थे। 2003 में, एरियल शरोन इज़राइल के पहले प्रधानमन्त्री बनें, जो भारत आने वाले पहले इजराइली पीएम थे। इसके बाद भारत से 2017 में प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी जी ने इजरायल की अपनी अधिकारिक यात्रा की और इजरायल भारत संबंध प्रगाढ़ हुए।  इज़राइल भले ही क्षेत्रफल में एक छोटा सा देश हों, किंतू वह रक्षा और कृषि क्षेत्र में भारत से बहुत आगे है। रक्षा क्षेत्र में दोनों मिलकर काम कर रहे हैं। इसके अलावा भारत सरकार ने इजरायल की MASHAV एजेंसी के साथ एक समझौता किया। MASHAV एक अंतर्राष्ट्रीय विकास सहयोग संगठन है।  जो कृषि क्षेत्र में भारतीय किसानों को ट्रेनिंग दे रहा है।

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