भारत ने श्रीलंका को अंधेरे में डूबनेसे बचाने के लिए 500 मिलियन डॉलर का क्रेडिट लाइन दिया।

श्रीलंका इन दिनों आर्थिक कंगाली के मुहाने पर खड़ा है। जिसका असर दिखना शुरू भी हो गया है। श्री लंका की गोटाबाया राजपक्षे की सरकार के पास इतना पैसा नहीं है कि वह बड़े पैमाने पर ईंधन को विदेश से आयात कर श्री लंका को चलाया जा सकें।


श्रीलंका की सरकार इस समस्या को लेकर भारत के पास आईं। इसलिए भारत सरकार ने मंगलवार, 18 जनवरी 2022 को श्रीलंका के लिए 500 मिलियन डॉलर की क्रेडिट लाइन की घोषणा की। श्रीलंका इन 500 मिलियन डॉलर का उपयोग पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद के लिए करेगा। क्योंकि यह दक्षिण एशिया का छोटा सा द्वीप राष्ट्र बड़े पैमाने पर ईंधन और ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। अगर भारत सरकार श्रीलंका को यह क्रेडिट लाइन नहीं देती। तो वहां बिजली की गम्भीर समस्या उत्पन्न हो सकती थी। वहां के मंत्री ने कहा था कि यदि कुछ नहीं किया गया तो पूरा देश बुधवार तक अंधेरे में डूब सकता है।

भारतीय उच्चायोग ने कहा कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने श्रीलंका के विदेश मंत्री जीएल पेइरिस को अपने लिखे पत्र में महत्वपूर्ण सहायता और  $500 मिलियन अमरीकी डालर की क्रेडिट लाइन देने पर सहमत हुए हैं।

श्रीलंका को 2022 में 6 बिलियन डॉलर का कर्ज़ चुकाना पड़ेगा

श्रीलंका को इस वर्ष करीब 6 बिलियन डॉलर का विदेशी कर्ज चुकाना है। क्योंकि वहां की सरकार ने कई दशक पहले बॉन्ड जारी किए थे। अब इसकी किस्त का भुगतान करने समय आ गया है। श्रीलंका को जुलाई में 1 बिलियन डॉलर का विदेशी कर्ज वापस देना है। इसमें भी राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे की सरकार को 2022 में चीन को 2 बिलियन डॉलर कर्ज़ की किस्तें वापस करनी है। अभी हाल ही में चीन के विदेश मंत्री वांग ही श्रीलंका गए थे। तब वहां के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने वांग ही से कर्ज़ की किस्तों की तारीख़ आगे बढ़ाने के लिए कहा था। क्योंकि उनके पास इतना पैसा ही नहीं है कि वह चीन के कर्ज़ को वापस कर सकें।

भारत की अतरिक्त मदद

इस सबके बावजूद, भारत ने श्री लंका को 900 मिलियन डॉलर का सीधा कर्ज़ देने का ऐलान किया। जो उसको कुछ अस्थिरता प्रदान करेगा। भारत सरकार ने श्री लंका की खाने पीने की समस्याओं के लिए 1.5 बिलियन डॉलर का ओर क्रेडिट लाइन देने का वादा किया। 

भारत श्रीलंका की बढ़ चढ़कर मदद कर रहा है। जिसका भी एक कारण चीन हैं। क्योंकि जैसे ही भारत श्री लंका पर से अपने हाथ हटायेगा। चीन श्रीलंका के एयरपोर्ट, हाईवे और बंदरगाह को अपने कब्जे में ले लेगा। जबकि भारत अपनी सुरक्षा के लिए चिंतित है। यहीं कारण है कि भारत इस छोटे से द्वीप राष्ट्र को कई अरब डॉलर दिए जा रहा है।

श्रीलंका बॉन्ड से पैसा क्यों नहीं ले सकता

श्रीलंका के पास भारत की मदद लेने के अलावा कोई चारा नहीं है। क्योंकि यह देश अब बॉन्ड भी जारी नहीं कर सकता है और यदि बॉन्ड जारी भी करता हैं तो उस पर ब्याज की दर बहुत ज्यादा होगी। अभी हाल ही में फिंच ने श्री लंका के बांड की रेटिंग CC से घटाकर CCC कर दिया है। यहीं प्रमुख कारण है कि श्री लंका बड़े पैमाने पर बॉन्ड से पैसा इक्कट्ठा नही कर सकता है।

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