पाकिस्तान ने सुकुक बॉन्ड जारी कर ऐतिहासिक गलती कर दी, इन इसलामिक बॉन्ड की ब्याज दर 8% , सभी पाकिस्तानी चुकाते चुकाते जन्नत में पहुंच जायेंगे।

पाकिस्तान के पीएम इमरान खान सुकूक बॉन्ड जारी नहीं करने की कसमें खा रहे थे। लेकिन जब कहीं से भी पाकिस्तान को कर्ज़ नहीं मिला। तो थक हार कर इमरान खान ने सुकुक बॉन्ड जारी किए। पाक को बिना गिरवी के कोई कर्ज़ देने को तैयार नहीं है। इसलिए अब इमरान सरकार अपने देश की सड़को, रेलवे , एयरपोर्ट और बंदरगाहों को गिरवी रख रहीं।

लाहौर मोटरवे को गिरवी रख दिया

पाकिस्तानी सरकार ने सुकुक बांड के माध्यम से इंटरनेशनल बाजार से 1 बिलियन डॉलर कर्ज़ उठाया है। लेकिन जब आप इस 1 बिलियन डॉलर कर्ज़ की ब्याज दर के बारे में जानेंगे। तो आपको इस बात का आभास होगा कि एक आर्थिक तौर पर संपन्न देश आसानी से कम ब्याज दर पर विदेशी कर्ज प्राप्त कर लेता है। दूसरी तरफ पाकिस्तान जैसे देश को उच्च ब्याज दर पर ऋण मिलता है। पाकिस्तान को 7 वर्षों के लिए 7.95 प्रतिशत ब्याज दर के अनुसार 1 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज प्राप्त हुआ है। 

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पाकिस्तान सरकार ने सुकुक बॉन्ड को इस्लामी बॉन्ड नाम दिया। जोकि इस्लामिक देशों के अमीर लोगों को प्रभावित करने के लिए पाकिस्तान का एक प्रोपेगेंडा है। लेकिन कर्ज देने वालों ने इस्लामिक एजेंडे में कतई विश्वास नहीं किया और भारी भरकम ब्याज दर पर ऋण दिया। 

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इस बॉन्ड में पाकिस्तान सरकार ने कहा कि यदि 7 वर्षों बाद पाकिस्तान कर्ज़ नहीं लौटा पाता है तो लाहौर-इस्लामाबाद मोटरवे को जब्त कर सकतें हैं और वह इसके मालिक बन जायेंगे। 

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अगर हम सुकुक बॉन्ड पर मूडीज की रेटिंग देखें। तो ये बॉन्ड सबसे गैर-निवेश  में आतें हैं और इनकी रेटिंग भी "B3" है। पाकिस्तान को यह कर्ज़ विदेशी कर्जदारों ने जोखिम उठाकर दिया है। हालाकि यह तभी दिया जब पाकिस्तान सरकार ने देश के प्रमुख सड़क मार्ग को गिरवी रखा।


पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय का कहना है कि पाकिस्तान को इस वर्ष कई विदेशी कर्जों की किस्त चुकानी है। इसलिए इन बॉन्ड के जरिए ओर कर्ज लिया जा रहा है। अभी हाल ही में पाकिस्तान को सऊदी अरब से 3 बिलियन डॉलर का कर्ज मिला था। लेकिन पाकिस्तान पर कर्ज इतना है कि इन 3 बिलियन डॉलर में से 2 बिलियन डॉलर खर्च हों गए। अर्थात् वह चीन या आईएमएफ के ब्याज की क़िस्त चुकाने में चले गए होगे। 


अगर हम पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार की बात करें तो वहां की सरकार ने बताया है कि 14 जनवरी तक पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 17 बिलियन डॉलर था। 

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