80% हिन्दू बहुमत वाले देश ने हामिद अंसारी को उपराष्ट्रपति 10 वर्षों तक बनाया, जब इसी जनता ने मोदी को पीएम बना दिया। तो देश अल्पसंख्यकों के लिए असुरक्षित हो गया

भारत की एक पुरानी कहावत है कि किसी व्यक्ति की योग्यता के हिसाब से पद देना चाहिए और उसे उसकी योग्यता से ज्यादा मिल जाएं तो वह उसे देने वाले के खिलाफ़ ही इस्तेमाल करेगा। यहीं कहावत आज भारत के भूतपूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी पर एक दम ठीक बैठ रहीं है। क्योंकि हामिद अंसारी 80% बहुमत वाले देश के 10 वर्षों तक उप राष्ट्रपति रहें हैं और जब इसी जनता ने अपना प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी को चुन लिया। तो आज देश इनकी नजरों में अल्पसंख्यकों के लिए सुरक्षित हो गया।


दरअसल हामिद अंसारी ने अमेरीकी सांसदो की कांग्रेस ब्रीफिंग में शामिल हुए थे। जिसका विषय भारत के बहुलवादी संविधान की रक्षा करना था। इसका आयोजन भारतीय अमेरिकी मुस्लिम परिषद और 15 अन्य संगठनों ने किया था। अगर हम भारतीय अमेरिकी मुस्लिम परिषद के बारे में करें। तो इसके नाम में लगा भारतीय केवल दिखावे के लिए है। बल्कि इसका असली काम भारत को अमेरिका की धार्मिक ब्लैक सूची में डलवाने का है। इसके सारे कार्यक्रम पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित होते हैं।

नोट;

भारतीय अमेरिकी मुस्लिम परिषद (आईएएमसी) को पहले भारतीय मुस्लिम परिषद- यूएसए के नाम से जाना जाता था  इसकी स्थापना 15 अगस्त 2002 को 2002 के गुजरात दंगों के जवाब में की गई थी।


आज हर भारतीय को जानकर हैरानी होगी कि अमेरिका में मौजूद इस भारतीय अमेरिकी मुस्लिम परिषद (आईएएमसी) के शेख उबैद के अब्दुल मलिक मुजाहिद के साथ गहरे संबंध हैं। क्योंकि यहीं अब्दुल मलिक उत्तरी अमेरिका में इस्लामिक सर्कल ऑफ़ नॉर्थ अमेरिका (ICNA) नाम की संस्था का नेतृत्वकर्ता करता है। जबकि यह संस्था पाकिस्तान की जमात-ए-इस्लामी की तरह हैं। जो अमेरीका पाकिस्तान का मोर्चा समाले हुए है। ICNA के पाकिस्तान के लश्कर जैसे आतंकवादी संगठनों के साथ संबंध भी हैं। वर्तमान IAMC का  रशीद अहमद मुखिया है। जो कभी इस्लामिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (IMANA) के कार्यकारी निदेशक (2008-17) भी रह चुका है। इसी पर कोविड 19 के सार्वजनिक फंड में घपला करने का आरोप भी लगा चुका है।

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भारत की ओर से हामिद अंसारी, स्वरा भास्कर और बंगलौर के आर्क बिशप को मिलाकर तीन  लोग कॉन्ग्रेस ब्रीफिंग में शामिल हुए थे। इसके अलावा अमेरिका की तरफ़ से अमेरिकी सीनेटर एड मार्के प्रस्तुत हुए थे।  मार्केट एक घोर भारत विरोधी अमेरिका सांसद है। जो भारत और अमेरीकी संबंधों को खराब करना चाहता है। इसी ने भारत अमेरिका के असैन्य परमाणु समझौते का विरोध किया था। जब भारत परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह्र में शामिल नहीं हो पाया था। तो इसने एनएसजी समूह के भारत विरोधी देशों की तारीफ़ की थीं।


भारत की ओर शामिल हामिद अंसारी ने इस ब्रीफिंग में जो कुछ कहा है। उसका यही अमेरिकी सांसद अमेरीकी कांग्रेस में भारत को बदनाम करने के लिए उपयोग करेगा। पूर्व उपराष्ट्रपति ने ब्रीफिंग में कहा कि हाल के वर्षों में, भारत ने "उन प्रवृत्तियों और प्रथाओं के उद्भव का अनुभव किया है। जो नागरिक राष्ट्रवाद के सुस्थापित सिद्धांत पर विवाद करते हैं"।  सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की एक नई और काल्पनिक प्रथा का परिचय देता है। यह एक धार्मिक बहुमत और एकाधिकार वाली राजनीतिक शक्ति की आड़ में चुनावी बहुमत पेश करना चाहता है। यह नागरिकों को उनके विश्वास के आधार पर अलग करना चाहता है, असहिष्णुता को बढ़ावा दे रहा है और यह भारत में बेचैनी और असुरक्षा को बढ़ावा देती है।


मार्के ने इस ब्रीफिंग में भारत के खिलाफ़ जहर उगलते हुए कहा कि भारत सरकार अल्पसंख्यक धर्मों की प्रथाओं को लक्षित कर रही है। सरकार एक ऐसा माहौल बनाती है, जहां भेदभाव और हिंसा जड़ ले सकती है। उन्होंने आगे कहा कि हाल के वर्षों में, हमने ऑनलाइन नफरत भरे भाषणों और नफरत के कृत्यों में वृद्धि देखी है, जिसमें मस्जिदों में तोड़फोड़, चर्चों को जलाना शामिल है।

अन्य तीन कांग्रेसी सांसदों  जिम मैकगोव.एम.  एंडी लेविन और जेमी रस्किन - का भी केंद्र में अलग अलग सरकारों के बावजूद भारत विरोधी स्टैंड लेने का इतिहास रहा है।  चाहें भारत में कांग्रेस की ही सरकार क्यों न रही हों।


रस्किन ने कहा कि भारत में धार्मिक अधिनायकवाद और भेदभाव के मुद्दे पर बहुत सारी समस्याएं उत्पन्न हो रहीं हैं।  इसलिए हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि भारत सभी के लिए धार्मिक स्वतंत्रता, स्वतंत्रता, बहुलवाद, सहिष्णुता और असहमति का सम्मान करने के मार्ग पर बना रहे।

यह सभी अमेरिकी सांसद प्रो पाकिस्तान हैं। जिनका काम ही भारत को हर मिनट कोशना है। भारत कोई भी व्यक्ति अपने लोगों को दबाना नहीं चाहता है और न कभी ऐसा किया है और न कभी ऐसा करेंगे। जबकि भारत के पड़ोस में बसे दो देश पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं पर हजारों प्रकार से इस्लामिक कट्टरपंथियों के अत्याचार होते हैं। अभी हाल ही में दुर्गा पूजा के समय बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर हिन्दू विरोधी दंगे हुए थे। जिनकी साजिश वहीं के इस्लामिक कट्टरपंथियों ने रची थी।

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