भारत में उठती आग में हाथ गर्म करने वाले, कैनेडियन पीएम जस्टिन ट्रुडो को भारतीय किसान आंदोलनकारियों की बड़ी याद आ रही होगी।

कनाडा में इन दिनों ट्रक ड्राइवरों का वहां की केंद्र सरकार के खिलाफ़ आंदोलन चल रहा है। सभी आंदोलनकारियों ने कनाडा की राजधानी को बंधक बना लिया। जैसे भारत में किसान आंदोलनकारियों ने किया था। उसी तरह आज कनाडा गुजर रहा है। हालाकि तब कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रुडो भारतीय किसान आंदोलन में कूद पड़े थे और आंदोलनकारी किसानों का समर्थन कर रहे थे। जबकि भारत सरकार ने कनाडा से कह दिया था कि आप हमारे आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करें।   


वह कहते हैं कि दूसरों के घरों में पत्थर तभी फेंका करें। जब आपके घरों की खिड़कियों पर शीशे की न हों। यही हाल कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रुडो का हुआ है। जब कनाडा की राजधानी में हजारों की संख्या में ट्रक ड्राइवर घुस आए और उन्होंने वहां जमकर तोड़फोड़ मचाई। यहां तक कि उन्होंने देश के सैनिकों की याद में 'राष्ट्रीय युद्ध स्मारक' को भी क्षति पहुंचाई। इसके अलावा कनाडा के 'राष्ट्रीय हीरो फॉक्स' की मूर्ति को कनाडा का उल्टा झण्डा  लपेट दिया। एक राष्ट्रीय नायक, जिन्होंने अपनी युवावस्था में ही हड्डी के कैंसर की वजह से एक टांग खो दी थी और तब भी उन्होंने पूरे कनाडा की यात्रा की थी। 


ट्रक ड्राइवरों ने कनाडा की संसद को घेरने का ऐलान किया है और उसमें वे लगभग कामयाब हो गए हैं। क्योंकि वे संसद से ज्यादा दुरी पर नहीं है। इसी वजह से कनाडा के पीएम को उनके सुरक्षाकर्मियों ने किसी अनजान स्थान पर पहुंचा दिया है। क्यों कि अभी केवल 10,000 की संख्या में ही ट्रक ड्राइवर आए हैं और अभी यह संख्या 1 लाख के पार भी पहुंच सकती है। 

कैनेडियन ट्रक ड्राइवरों का आंदोलन क्यों

दरअसल कनाडा की केंद्र सरकार ने 15 जनवरी, 2022 को कोविड 19 से संबंधित एक अधिसूचना जारी की। जिसके अनुसार, कनाडा में उन्हीं ट्रक ड्राइवरों को घुसने की आज्ञा होंगी। जिन्होंने कोरोना वायरस की वैक्सीन लगवा ली होगी। ऐसे बहुत से ट्रक ड्राइवर हैं, जो अमेरिका से सामान लातें हैं। वहां के ट्रक ड्राइवरों को वैक्सीन से कोई आपत्ति नहीं है। उन्हें आपत्ति उनकी स्वतंत्रता छिनने की है। इसी मसले पर 29 जनवरी 2022 को पार्लियामेंट हिल में एक रैली की योजना बनाई गई। जहां भारतीय किसान आंदोलन की तरह कुछ कुछ प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो का भी विरोध किया है।

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अगर हम संयुक्त राज्य अमेरिका की बात करें तो वहां की सरकार ने गैर अमेरिकी लोगों के लिए एक वैक्सीन डोज को आवश्यक कर दिया। कनाडाई ट्रकिंग एलायंस की बात मानें। तो वहां के 120,000 ट्रक ड्राइवरों में से 85% को पहले ही कोविड 19 लग चुका है। जबकि कनाडा में नियमित रूप से 160,000 ट्रक ड्राइवर रजिस्टर्ड हैं। लेकिन पीएम जस्टिन ट्रुडो का वैक्सीन वाला निर्णय 26000 व्यक्तियों को प्रभावित करने वाला है। लेकिन अब यह आंदोलन बड़ा होता जा रहा है। जिसमें जस्टिन ट्रुडो की सरकार को आंदोलनकारियों से सुलह समझौता करना ही होगा। 

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अन्यथा जिस तरह से कुछ लोगों ने लाल किला पर तिरंगे के स्थान पर धार्मिक झंडे को फहरा दिया गया था। जिससे भारत सरकार को विश्व  के सामने शर्मिंदा होना पड़ा था। इसी तरह कुछ आज कनाडा में हो था। जहां के प्रधानमन्त्री को अपनी राजधानी से ही बेनाम जगह पर भागना पड़ा है। 

फ्रीडम कॉन्वे आंदोलन का नाम

ट्रक आंदोलनकारियों ने आंदोलन का नाम फ्रीडम कॉन्वे रखा है। जिसका हिंदी में शाब्दिक अर्थ "स्वतंत्रता का काफिला" है। इन सभी ट्रक ड्राइवरों का कहना है कि जस्टिन ट्रुडो की सरकार उनकी स्वतंत्रता को कुचल देना चाहती है। 

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