ईरान ने भारत के लिए अफगानिस्तान के रास्ते खोल दिए, अब भारत पाकिस्तान से न जाकर ईरान से जायेगा।

ईरान ने भारत की सबसे बड़ी समस्या का हल कर दिया है। दरअसल भारत की सरकार अफगानिस्तान के आम लोगों के लिए 50,000 टन गेहूं भेजना चाहती है। इसके अलावा कुछ दवाईयां और दैनिक जरूरतों का सामान भी अफगानिस्तान में भेजना था। लेकिन इस सबसे में सबसे बड़ा रोड़ा पाकिस्तान बन रहा था। 

भारत की अफगानिस्तान के लोगों को मानवीय आधार पर मदद

भारत सरकार ने पिछले वर्ष 2021 में पाकिस्तान के बाघा बार्डर से अफगानिस्तान मानवीय आधार पर मदद भेजनी थी। जिसके लिए पाकिस्तान सरकार के पास प्रस्ताव भी भेजा गया था। तब पाकिस्तान की इमरान खान सरकार ने मंजूरी भी दे दी थी। किंतु थोड़े दिनों बाद वह मुकर गया और बहुत सारी शर्तें थोप दी। जबकि भारत का सामान बॉर्डर पर ट्रको में भरा हुआ है। अगर ये जल्दी ही अफगानिस्तान नहीं पहुंचता है तो यह खराब भी हो सकता है।

आज ईरान के विदेश मंत्री अफगानिस्तान के बारे में ट्वीट किया। जिसमें विदेश मंत्री हुसैन अमीर-अब्दुल्लाहियन ने अफगानिस्तान में एक समावेशी सरकार बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।  इसके अलावा उन्होंने अफगानिस्तान को भारत की मानवीय सहायता का भी उल्लेख किया, जिसके तहत ईरान भारत की चबाहार बंदरगाह के रास्ते अफगानिस्तान को  गेहूं और दवा भेजने में सहायता करेगा। भारत की ओर अफगानिस्तान को यह अगस्त के बाद तीसरी मानवीय आधार पर सहायता होगी।

ईरान के विदेश मंत्री का ट्वीट

ईरान भारत के लिए बहुत कुछ कर रहा है। क्योंकि तालीबान के साथ ईरान के संबंध ठीक नहीं हैं। अभी हाल में ही ईरान अफगानिस्तान सीमा पर तालीबान के लड़ाकों ने ईरानी सैनिकों पर गोलियां चला दीं थीं। जिसका जवाब ईरान ने भी दिया था। 

किंतु सबसे खास बात यह है कि जब तालीबान  के विदेश ईरान में अपनी पहली यात्रा पर थे। तब भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री को फोन किया था। जिसमें एस जयशंकर ने अपने समकक्ष हुसैन अमीर-अब्दुल्लाहियन से कोविड की कठिनाइयों, अफगानिस्तान में चुनौतियों, चाबहार की संभावनाओं और ईरानी परमाणु मुद्दे की जटिलताओं पर चर्चा की।


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