चाइन दुनिया का सबसे बड़ा रोबोट बना रहा, पीएलए भारत के खिलाफ़ लद्दाख में इस्तेमाल करेंगी। अमेरीका पहले ही चीन के तरह के प्रयोग में विफल रहा

चीन के सरकारी न्यूज चैनल ग्लोबल टाईम्स ने एक समाचार प्रकाशित की। जो पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोर रही है। दरअसल चीन दुनिया का सबसे बड़ा रोबोट बना रहा है। जिसका इस्तेमाल चीन अपने विरोधियों के लिए करेगा। सबसे ख़ास बात यह है कि इसका परीक्षण लद्दाख के निकट किया गया है। चीनी मीडिया के अनुसार, इसको चीन भारत के लद्दाख क्षेत्र से सटे तिब्बत सीमा पर करेगा। लेकिन क्या इसके इस्तेमाल से लद्दाख की स्थिति पर कोई विशेष प्रभाव पड़ेगा। क्योंकि इसी प्रकार के प्रयोग अमेरिका भी कुछ वर्षों पहले कर चुका है। 

चीन का याक रोबोट

चीन का भारी भरकम रोबोट

चीन ने विद्युत ऊर्ज़ा से चलने वाला दुनिया का सबसे बड़ा बायोनिक रोबोट विकसित किया है। जिसका इस्तेमाल जटिल वातावरण में रसद वितरण और टोही मिशन को करने में किया जायेगा। इसका उपयोग दूर दराज क्षेत्रों और अधिक जोखिम वाले युद्ध क्षेत्रों में सैन्य बलों के लिए चुनौतीपूर्ण है। 

चीन ने अपने इस रोबोट का नाम याक रखा है। जो करीब 160 किलोग्राम तक का भार उठाने में सक्षम है। इसके अलावा बड़ा आकार होने के बावजूद , यह 10 किमी प्रति घंटा के हिसाब से दौड़ सकता है।

याक रोबोट के अतिरिक्त चीन ने एक मशीनी कुत्ता भी बनाया है। जोकि वास्तव में एक कुत्ते की तरह ही दिख रहा है। इसका वजन 32 किलोग्राम है। हालाकि यह 40 किलोग्राम भार ही उठा सकता है।

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अमेरीकी की शुद्ध रूप से नकल

चीन,जो दुनिया का सबसे बड़ा रोबोट विकसित करने का दावा कर रहा है। तो वह सच हो सकता है लेकिन अगर इसका प्रयोग युद्ध क्षेत्र और जोखिम वाले क्षेत्रों में सफलतापूर्वक किया जा सकें। तो इसमें एक बड़ा संदेह है। क्योंकि आज जो काम चीन कर रहा है। उसको अमेरिका भी बहुत पहले कर चुका है। इसमें अमेरीका पूर्णतः निकल विफल रहा है।

अमेरीका ने "बिगडॉग" नाम से एक सैन्य रोबोट विकसित किया था। जिसको 2005 में बोस्टन डायनेमिक्स द्वारा फोस्टर-मिलर, नासा जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी कॉनकॉर्ड फील्ड स्टेशन के साथ मिलकर बनाया था। इसमें निवेश डीएआरपीए द्वारा किया गया। इसका प्रयोग युद्ध क्षेत्र में बड़े जोर शोर से हुआ था। 

अमेरिका का बिगडॉग रोबोट्स

लेकिन दिसंबर 2015 के अंत में, बिगडॉग परियोजना को अचानक बंद कर दिया गया था। इस आशा के बावजूद कि यह कभी युद्ध क्षेत्र में अमेरीकी सेना के लिए खच्चर का भी काम कर सकता है। इसका प्रयोग बंद करने का सबसे बड़ा कारण था कि इसका इंजन युद्ध क्षेत्र में बहुत ज्यादा शोर कर रहा था। जोकि एक जोखिम वाले क्षेत्र में ठीक नहीं होता है। अफगानिस्तान में भी अमेरिका ने इस रोबोट का प्रयोग किया था लेकिन इससे उत्पन्न शोर बड़ी समस्या बना। 

बिगडॉग परियोजना के अलावा, स्पॉटमिनी नाम की एक ऑल-इलेक्ट्रिक रोबोट की परियोजना को भी बंद कर दिया गया। जोकि केवल 18 किलोग्राम ( 40 पाउंड ) भार ही उठाने में सक्षम थी। हालाकि स्पॉट मिनी नाम के रोबोट को 2019 में लॉन्च किया गया है।

अमेरिका का स्पॉट मिनी रोबोट

डीआरडीओ के मिनी रोबोट

जब किसी संस्था के पास ज्यादा मात्रा में फंडिंग के स्रोत नहीं होते हैं। तब वह हमेशा प्रायोगिक और दिमाग़ से काम लेते हैं। यहीं कारण है कि भारत का सरकारी रक्षा संस्थान डीआरडीओ अमेरिका और चीन की तरह बड़े रोबोट्स नही विकसित कर रहा है। क्योंकि जब रोबोट्स का इस्तेमाल टोही मिशन और सीमा पर गस्त करना ही है

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तब वहां भारी भरकम रोबोट्स की क्या जरूरत है। जबकि छोटे रोबोट्स से यह सब काम किया जा सकता है। बडे़ रोबोट्स अभी वर्तमान में युद्ध क्षेत्र कोई ज्यादा प्रभाव नही दिखा सकते हैं। यही कारण है कि डीआरडीओ छोटे किश्म के रोबोट्स बनाने पर जोर दे रहा है। चीन और अमेरिका चार टांगों वाले रोबोट्स बना रहें हैं। जबकि डीआरडीओ 6 टांगों वाले रोबोट्स बना रहा है।

डीआरडीओ का 6 टांगों वाला टोही रोबोट

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