जर्मनी के नेवी प्रमुख ने अपनी ही सरकार की पोल खोल दी। कह दिया कि पूर्व जर्मन चांसलर एंजेला रूस और चीन समर्थक थीं।

जर्मनी के नेवी प्रमुख इस समय भारत यात्रा पर दिल्ली में हैं। उन्होंने भारत में बैठकर ऐसा कुछ कह दिया है। जिससे जर्मनी की पूरी दुनिया में पोल खुल गई और उसकी विदेश नीति दुनिया के सामने आ गई। इसी के साथ जर्मनी में उनके बयान पर भूचाल आ गया। वहां की सरकार अपने ही जनरल की बात को झूठ मान रही है। 


जर्मन नेवी प्रमुख ने रूस के राष्ट्रपति के बारे में कहा है कि "क्या रूस वास्तव में यूक्रेन की मिट्टी की एक छोटी सी छोटी पट्टी चाहता है? या देश में एकीकृत करना चाहता है? नहीं, यह बकवास है। उनका मानना है कि  पुतिन शायद दबाव डाल रहे हैं, पुतिन जानते हैं कि वह ऐसा कर सकतें हैं और वह यूरोपीय संघ को विभाजित भी कर सकता है। उन्होंने आगे कहा कि पुतिन में वास्तव में क्या चहते हैं। तो वह उच्च स्तरीय सम्मान है।


उन्होंने आगे कहा, "पुतिन उच्च-स्तरीय सम्मान चाहते हैं और किसी को कुछ सम्मान देना कम लागत है, यहां तक ​​​​कि  उसकी कोई कीमत भी नहीं होती है। अगर मुझसे पूछा गया, तो रूस को वह सम्मान देना आसान है। जो रूस वास्तव में मांगता है और शायद वह भी उसका अधिकार हों। रूस एक पुराना देश है और महत्वपूर्ण भी है।

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जर्मनी के नेवी प्रमुख की इन बातों से ऐसा लगता है कि उनके देश की सरकार अमेरिका के साथ साथ नाटो के खिलाफ़ जा रही है। क्योंकि उन्होनें जो भी कुछ कहा है। उसमें कुछ गलत नहीं है। उन्होंने बस अपने देश की सरकार की विदेश नीति को दुनिया के सामने लाकर रख दिया। 

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अभी हाल ही में, जर्मनी ने कहा है कि वह किसी भी कीमत पर यूक्रेन को हथियार सप्लाई नहीं करेगा। खासकर ऐसे देश को जो रूस के खिलाफ़ युद्ध लड़ने जा रहा हों। इसी के साथ जर्मनी ने एस्टोनियन के भी हथियार सप्लाई पर रोक लगा दी। इससे साफ़ हो रहा है कि जर्मनी रूस को बिल्कुल नाराज़ नहीं करना चाहता है। जिसका सबसे बड़ा कारण ऊर्जा जरूरत है। क्योंकि जर्मनी के लिए गैस रूस से ही आती है और अगर ये गैस आना बंद हो जाए। तो जर्मनी के साथ पूरे यूरोप में भयंकर ऊर्जा संकट खड़ा हो सकता है।

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एडमिरल शॉनबैक ने जर्मनी की पूर्व चांसलर एंजेला मर्केल की चीन के प्रति उनकी नीतियों की पोल खोल दी। उन्होंने कहा कि जर्मनी की पूर्व चांसलर एंजेला मर्केल चीन के प्रति बेहद नरम रही थी।  उन्होंने ने प्रौद्योगिकी चोरी के चीनी प्रयासों का हवाला देते हुए उदाहरण दिया कि कैसे एक जर्मन कंपनी कूका रोबोटिक्स को एक चीनी कंपनी ने निवेश कर अपने कब्जे में ले लिया और चीन को कम्पनी की तकनीक चली गई। जबकि चीन ने कोई भुगतान भी नहीं किया है।


उन्होंने अफ्रीका में चीन के कर्ज़ जाल पर चिंता व्यक्त की और कहा कि अफ्रीका में चीनी कर्ज़ के कारण अनेकों समस्याओं पैदा हो रहीं हैं। क्योंकि चीन एक अच्छा देश नहीं है। वह तानाशाहों और हत्यारों को पैसा दे रहा है। उनका इशारा उत्तर कोरिया की तरफ़ हो सकता है। 

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