काल्पनिक दुनिया के खलीफा एरदोगन रिचब तैय्यब ने तुर्की का नाम बदल दिया, लेकिन यूएन में नया नाम लटक गया

टर्की को पूरी दुनिया टर्की नाम से ही जानती है। लेकिन अब टर्की का नया नाम तुर्कीय हो गया है। टर्की की सरकार ने अपने ही देश का नाम बदल दिया है और अब वह टर्की के नए नाम को  अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलवाने की योजना बना रहा हैं। जिसके अंतर्गत टर्की सरकार आने वाले दिनों में संयुक्त राष्ट्र संघ में तुर्किये नाम को पंजीकृत करके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कर लेना चाहता।

तुर्किश राष्ट्रपति एर्डोगन

संयुक्त राष्ट्र में तुर्किये (Turkiye) के "U" पर पेंच फसा

एरदोगन सरकार ने तुर्की का नाम तो बदल दिया। लेकिन इसको अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलवाना सबसे कठिन काम है। क्योंकि जब तक संयुक्त राष्ट्र संघ नए नाम को मान्यता नहीं दे देता है। तब तक दुनिया का कोई दुसरा देश स्वीकार नहीं करेगा। 


जबकि संयुक्त राष्ट्र में तुर्किये नाम पर पेंच फस रहा है। क्योंकि संयुक्त राष्ट्र की कुल छह आधिकारिक भाषाएं हैं। जिनमें  अरबी, चीनी, अंग्रेजी, फ्रेंच, रूसी और स्पेनिश हैं। इन्हीं भाषाओं की सही व्याख्या और अनुवाद, मौखिक और लिखित रूप में, संयुक्त राष्ट्र संघ के काम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। क्योंकि यह विश्व के महत्वपूर्ण मामलों पर स्पष्ट और संक्षिप्त संचार को सक्षम बनाती हैं। 


टर्की के नए नाम Turkiye को यूएन में पंजीकृत नहीं किया जा सकता है। क्योंकि यूएन की लैटिन वर्णमाला U अक्षर मौजूद ही नहीं है। जबकि टर्की के नए नाम में U अक्षर आता है। जोकि टर्की के अधिकारियों के लिए एक समस्या बन सकता है। तुर्की के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अभी तुर्किश सरकार ने यूएन के साथ U अक्षर के मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं की है। हालाकि उम्मीद है कि U अक्षर की समस्या का समाधान मिल जायेगा। कुछ जानकारों ने कहा कि तुर्की की समस्या का एक उपाय है। कि यदि नए नाम में "Ü" के बजाय "U" का उपयोग किया जाए।

सऊदी अरब के लोग तुर्की की खिल्ली उड़ा रहे

तुर्की और सऊदी अरब एक दूसरे के प्रतिद्वंद्वी देश हैं। जिनमें मुस्लिम जगत का खलीफा बनने की होड़ मची हुई है। यही कारण है कि दोनों देश समय मिलने पर एक दूसरे को नीचा दिखाने की कोई कोशिश नहीं छोड़ते हैं। एरदोगन ने जैसे ही तुर्की का नाम बदला। वैसे ही सऊदी अरब के एक पत्रकार ने तुर्की की यह कहते हुए खिल्ली उड़ाई कि तुर्की ने एक ही नाम के पक्षी के साथ भ्रम से बचने के लिए अपना नाम बदलकर तुर्किये कर लिया। 

दरअसल तुर्किये एक पक्षी है। जिसको अमेरिका में लोग मार कर खा जातें हैं। यही बात है कि सऊदी अरब के नागरिक तुर्की की खिल्ली उड़ा रहे हैं।

दुनिया भर के तुर्किस दूतावासो में नए नाम की शुरुआत

तुर्की के दुनिया भर में मौजूद दूतावास नए नाम का उपयोग भी करने लगे हैं। जैसे कि फ्रांस के पेरिस में तुर्की दूतावास अब खुद को "एंबेसेड डे ट्रकिये पेरिस" नाम से बुलाता है, न कि तुर्की दूतावास, जैसा कि पहले हुआ करता था।  जर्मनी के बर्लिन में तुर्किस दूतावास स्वयं को "बॉट्सचाफ्ट डेर रिपब्लिक ट्रकिये" कहता है, न कि तुर्की। इसी तरह इटली के रोम में उपस्थित दूतावास भी ख़ुद को  "अंबासियाटा डेला रिपब्लिका डि तुर्चिया" कहता है। इसी प्रकार से भारत में भी टर्किश दूतावास में नए नाम का उपयोग होगा। हालाकि दुनिया तभी नए नाम को मान्यता देगी जब संयुक्त राष्ट्र संघ मान्यता दे देगा।

टर्की के नाम बदलने के कारण

सेकंड विश्व युद्ध से पहले तुर्की को तुर्कीय के नाम से ही जाना जाता था। लेकिन अंग्रेज तुर्की के नाम का सही उच्चारण नहीं कर पा रहे थे। इसलिए उन्होंने तुर्कीय को टर्की के नाम से पुकारने लगे। जबकि तुर्कीय नाम की जनजाति बहुत से देशों में पाई जाती है। तुर्कमेनिस्तान और चीन के शिंजियांग प्रांत में बड़ी संख्या में तुर्कीय जाति के लोग रहते हैं। 

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