चीन पाकिस्तान को परमाणु गोलों की बरसात करने वाली तोपें दे रहा। चीन का मक़सद साफ़ , भारत और पाकिस्तान को परमाणु युद्ध से बर्बाद करना

भारत के लिए एक बेहद चिंताजनक ख़बर आ रही है। दरअसल चीन पाकिस्तान को परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम तोपें दे रहा है। जिससे पाकिस्तान युद्ध के समय भारत के खिलाफ़ तोपों के माध्यम से छोटे छोटे परमाणु धमाके कर सकता है। जोकि एक बेहद चिंताजनक और खतरनाक साबित होगा। क्योंकि चीन की यह चाहत ही है कि भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार परमाणु युद्ध हो जाए। जिससे पाकिस्तान तो पूरी तरह से बर्बाद हो जायेगा और भारत एक कमज़ोर राष्ट्र बन जायेगा। इसके बाद एशिया में चीन को कोई भी रोक नहीं सकता है और उसकी शक्ति को चुनौती भी नहीं दे सकता।


पकिस्तान ने चीन से SH- 15 हॉवित्जर तोप की ख़रीद के लिए चीनी उत्तरी उद्योग निगम से एक समझौता किया था। उस समय पाकिस्तान ने SH-15 को 236 की संख्या में खरीदने के बारे में सोचा था और उनको भारत के खिलाफ़ नियंत्रण रेखा पर तैनात करना चाहता था। एक तोप से 40 से 50 किमी दूर तक मार कर सकती है।

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पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, पाकिस्तान ने लगभग 52 SH-15 तोपों  की ख़रीद का आदेश जारी किया गया। जोकि पाक के तीन रेजिमेंटों के लिए काफ़ी होगी। पाकिस्तान ने कराची में तोप के बड़े पैमाने पर परिक्षण किए हैं। यह परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम तोप है और हो सकता है कि पाकिस्तान कम दूरी सामरिक सतह से सतह मार कर सकने वाले परमाणु हथियारों का प्रयोग करें। क्योंकि पाकिस्तान 1984 से सामरिक परमाणु हथियार बनाने पर लगा है।  


अगर मान लो, पाकिस्तान ने भारत के किसी कोने पर तोप से हमला किया और अविश्वास की कमी के कारण भारत तोप के गोले को परमाणु हथियार मान लिया। तो भारत के सिद्धान्त के अनुसार, भारत पहले परमाणु हथियार का इस्तेमाल नहीं करेगा। लेकिन किसी देश ने भारतीय क्षेत्र में  परमाणु हथियार से हमला करता है तो भारत उसके खिलाफ़ सीधे भारतीय परमाणु मिसाइल पाकिस्तान की ओर लॉन्च हो जायेगी।

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2019 में भारत के साथ तनाव की ऊंचाई पर, पाकिस्तान सेना ने SH-I5 हॉवित्जर तोपखाने की तोपों की खरीद के लिए चीन उत्तरी उद्योग निगम (NORINCO) के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे।  पाकिस्तान ने तब घोषणा की थी कि वह इन 236 तोपखाने के टुकड़ों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के साथ खरीदना चाहता है और उन्हें नियंत्रण रेखा पर तैनात करना चाहता है।

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हालाकि इसी तरह का विचार अमेरिका ने कई दशको पहले लाया था। लेकिन अमेरिका को भय था कि युद्ध के समय दुश्मन देश को परमाणु हमले का भय न हो जाए। अर्थात् किसी भी प्रकार का अविश्वास पैदा न हो जाए। इसी कारण अमेरीका ने  परमाणु तोप के प्रोजेक्ट को बंद कर दिया।


लेकिन आज परमाणु  परमाणु तोपखाने लगभग पूरी तरह बदल चुके हैं। अब इनका स्थान मोबाइल सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल लांचरों ने ले लिया है। जोकि एक साथ कई लक्ष्यों को निशाना बना सकती हैं।

अमेरीकी परमाणु तोपखाने का W-48 खोल वाला तोप गोला 10 किलोग्राम का अल्फा -प्लूटोनियम का उपयोग कर बनाया गया है। इसके अलावा पाकिस्तान के पूर्व सैन्य तानाशाह परवेज मुशर्रफ ने कहा था कि पाकिस्तान ने छोटी दूरी तक मार कर सकने वाला गोला बना लिया है। इससे सबसे ज्यादा खतरा सरहदी शहरों और गांवों को ज्यादा है। 

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