तालीबान के धार्मिक मंत्रालय ने आदेश दिया कि अफगान कपड़ा दुकानों में रखें सभी महिला पुतलों का सिर कलम कर दो।

भारत के बहुत सारे इस्लामिस्ट लोगों ने तालीबान का समर्थन किया था और कहा था कि तालीबान अब 1996 वाला तालिबान नही है। अब वह करूणा से भरा हुआ है। लेकिन दुनिया धीरे धीरे तालीबान की वास्तविक सोच को समझ रहीं और देख भी रही है। अब तालीबान दुकानों में रखें पुतलों को नही छोड़ रहा है। वह मूर्तियों के भी सिर काट काटने पर उतारू हो गया। 

दरअसल तालीबान के पश्चिमी हेरात प्रांत के एक नैतिक और पुण्य मंत्रालय ने अफ़गान व्यापारियों को आदेश दिया कि वे सभी पुतलों के सिर कलम कर दे, जो इस्लाम के शरिया कानून का पालन न कर रहें हों। इस आदेश से साफ़ हो जाता है कि तालीबान का इस्लाम कितना कठोर है और धार्मिक रूप से कितने कट्टरपंथीं हैं। 

तालीबान अब इस्लाम की परिभाषा तय करने लगा है। यहीं कारण है कि उसने सभी अफ़गान दुकानदारों से कहा था कि वे उन सभी मूर्तियों को अपनी दुकानों से हटा दे, जो इस्लाम के नियम और कानूनों का उल्लघंन करती हों। लेकिन इस पर अफगान दुकानदारों ने कहा कि हमारा छोटा सा व्यापार रह गया है और इस कृत्य से वह भी नष्ट हो जायेगा। 

लेकिन मंत्रालय के मंत्री शेख अजीज उर रहमान और इस्लामी आधिकारियों ने व्यापारियों की एक न सुनी और सभी गैर इस्लामिक मूर्तियों के सिर काटने का आदेश दे दिया।

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जबकि अफगानिस्तान के कुछ पत्रकारों ने तालीबान से कहा था कि वह मूर्तियों के सिर न काटें, बल्कि उनके सिरों  को ढक दें। 

तालीबान के कृत्य का असर अफ़गान व्यापारियों पर आवश्य पड़ेगा। क्योंकि हर पुतले की कीमत 80 से 100 डॉलर तक थीं। जिनकी भारतीय मुद्रा में कीमत 4 से 8000 रूपए तक थीं। 

इसके अलावा तालीबान शरिया कानून के नाम पर महिलाओं को विद्यालय में पढ़ने से रोक रहा है और उनको कहीं अकेले यात्रा भी नहीं करने दे रहा है। आम अफ़गान लोगों के घरों से मनोरंजन के माध्यमों को खोजकर तोड़ा जा रहा है। अफ़गान वाहन चालकों को गाने और संगीत सुनने से भी रोका जा रहा है।

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