पीएम मोदी नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का खोया हुआ सम्मान वापस दे रहें, जिन्हें कुछ लोगों के कारण साइड लाइन कर दिया गया। आज भारत इतिहास में हुई गलतियों को ठीक कर रहा

आज भारत अपने सभी स्वतंत्रता सेनानियों का हिस्सा दे रहा है। जिन्हें 1947 के बाद भुला दिया गया था। जबकि उनका स्वतंत्रता आंदोलन में दूसरे सेनानियों से कम योगदान नहीं रहा था। उन्हीं में हमारे एक नेता जी सुभाष चन्द्र बोस हैं। जो तन और मन दोनों से एक सैनिक थे। जिनका दिल स्वतंत्र भारत के लिए हमेशा धड़कता रहा।


लेकिन एक भारतीय के रूप में हम सबने नेता जी सुभाष चन्द्र बोस को भुला दिया। या कुछ लोगों ने साजिशन उनके स्वतंत्रता आंदोलन के योगदान को देश के लोगों से छुपाया। इसकी हम बहस बाद में कर सकते हैं। किंतू भारत के इतिहास में जो गलतियां हुईं हैं। उनको आज भारत की मोदी सरकार सही कर रहीं है। क्योंकि आज देश की युवा पीढ़ी नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानती है। 

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भारत के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी जी ने एक ऐलान किया है। जिसमें उन्होंने कहा कि पूरा भारत नेता जी सुभाष चन्द्र बोस की 125 वीं जयंती मना रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि नेता जी की ग्रेनाइट से बनी भव्य प्रतिमा इंडिया गेट पर स्थापित की जायेगी। उन्होंने आगे कहा कि यह उनके प्रति भारत के ऋणी होने का प्रतीक होगा।


हालाकि अभी नेता जी सुभाष चन्द्र बोस की प्रतिमा नहीं बनी है। लेकिन तब तक उनकी होलोग्राम प्रतिमा को उसी स्थान पर स्थापित किया जायेगा। अभी हाल में ही पीएम मोदी ने 26 जनवरी से पहले 23 जनवरी को नेता जी की जंयती के रुप में मनाने  का भी ऐलान किया। इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनकी होलोग्राम प्रतिमा को जयंती  23 जनवरी को अनावरण करेंगे। 

दिल्ली में एतिहासिक बदलाव 

आज भारत का हर नागरिक दिल्ली में एतिहासिक बदलाव देख रहा है। क्योंकि नई दिल्ली को ब्रिटिश साम्राज्य ने एक गुलामी की तरह स्थापित किया था। जहां आज नेता जी सुभाष चन्द्र बोस की प्रतिमा स्थापित होने जा रही है। इससे पहले वहां 1968 तक ब्रिटिश राजा किंग जॉर्ज पंचम की मूर्ति स्थापित थीं। जबकि भारत 1947 में ही ब्रिटेन से आज़ाद हो गया था। जबकि हमने आजाद होते ही पाकिस्तान से 1947 की लड़ाई, चीन से 1962 की लड़ाई और गोवा मुक्ति संग्राम लड़ चुके थे। तब भी यह मूर्ति इंडिया गेट पर स्थापित रहीं। क्यों कोई कारण जरूर रहा होगा। 

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चलो कोई भी कारण रहा हों। लेकिन पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी ऐतिहासिक गलतियों को ठीक कर रहा है। इन्हीं गलतियों में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक भी है। जिसको बनने में 70 वर्ष बीत गए। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इंडिया गेट पर 26 जनवरी 1926 को शाश्वत अमर जवान ज्योति लौ को प्रज्वलित किया था। जोकि एक अच्छा कदम था। किंतु यह केवल बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम में शहीद जवानों को ही समर्पित थीं।

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लेकिन आज इंडिया गेट से ही थोड़ी दूर पर भारत का पहला राष्ट्रीय युद्ध स्मारक भी बनकर तैयार हो गया है। वहां भी इंडिया गेट की तरह एक अमर जवान ज्योति की शाश्वत लौ प्रज्वलित हैं। जोकि आज़ादी से और आज़ादी के बाद शहीद जवानों को समर्पित है। यहीं कारण है कि भारत सरकार ने इंडिया गेट की अमर जवान ज्योति को हटाकर राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में विलय कर दिया। कुछ लोग अफवाहें फैला रहे हैं कि अमर जवान ज्योति को बुझा दिया गया है। हालाकि ऐसा कुछ नहीं हुआ है। 

इसी तरह आज भारत में विस्टा प्रोजेक्ट के तहत् स्वतंत्र भारत का अपना संसद भवन भी बन रहा है। प्रधानमन्त्री, उपराष्ट्रपति और सभी सरकारी मंत्रालय भी बन रहें हैं। जोकि नई दिल्ली में स्वतंत्र भारत में सबसे बड़ा बदलाव हो रहा है। 

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