एक पेशेवर सेना और दूसरी फिल्मी एक्शन वाली सेना में फर्क, पीपल्स लिबरेशन आर्मी कहां फिट बैठती है

आज भारतीय सेना की ओर से गलवान घाटी के जश्न की तस्वीरें पूरी दुनिया को दिखा दी गई हैं। भारत के सैन्य बलों ने नए साल के उपलक्ष्य में 1 जनवरी को गलवान घाटी में तिरंगा झंडा फहराया था और न्यू ईयर का आनंद भी लिया था। लेकिन एक पेशेवर सेना होने के कारण तस्वीरों को सोशल मीडिया पर जारी नहीं किया और यहीं एक वास्तविक सेना का गुण होता है। भारतीय सेना ने तिरंगा झंडा PP14  पेट्रोलिंग बिंदु पर फहराया है। सबसे बड़ी बात है कि यह पेट्रोलिंग बिंदु भारत के कब्जे में है। जहां से एक गलवान नदी बहती है, जो गलवान घाटी को दो हिस्सों में बांटती है। 

क्रेडिट सैन्य बल

जबकि दूसरी तरफ चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी है। जो पूरी दुनिया में प्रोपेगेंडा युद्ध लड़ रही है। अभी हाल ही में पीएलए ने गलवांन घाटी पर पूरी एक फिल्म रिलीज़ की है। जिसको पता नहीं कितने कैमरों और कलाकारों ने बनाया होगा। क्योंकि कोई भी फिल्म बिना कांट छांट से मजेदार नहीं बनती है और यहीं सब चीनी सेना कर रहीं हैं, जो जब चाहें हॉलीवुड जैसी फ़िल्मों को सोशल मीडिया पर लॉन्च कर देते हैं। इसके बाद चीन की प्रोपेगेंडा मशीन अपने काम पर जुट जाती है। ताकि अपने दुश्मन देश के आत्मविश्वास को हिलाया जा सके। जिसमें कुछ उसी देश के नेता और वामपंथी विचारधारा वाले लोग भी शामिल हो जातें हैं। ताकि अपने राजनीतिक एजेंडा को सफल बनाया जा सकें। 

चीनी सेना की प्रोपेगेंडा तस्वीर

चीन की पीएलए (पीपल्स लिबरेशन आर्मी) ने जो वीडियो शेयर किया था। वह पिछले साल के संघर्ष से 1.5 किलोमीटर दूर स्थित है।  जिसका भारतीय सीमा तक दूर दूर तक नाता नहीं है। जबकि चीन 1962 के युद्ध से भारतीय क्षेत्र पर कब्ज़ा कर रखा है।

हालाकि एक बात समझ लेनी चाहिए कि भारतीय सेना एक पेशेवर सेना है। जिसको इस तरह के फिल्मी स्टाइल में वीरता दिखानी नहीं आती है।  यह काम तो चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी को ही शोभा देता है।  चीनी सेना फिल्मी युद्ध लड़ रही है। इनकी जिस देश से लड़ाई होती है, ये इसी तरह के फिल्मी स्टाइल में वीडियो रिलीज कर देते हैं। पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने अमेरिका को एक चेतावनी वीडियो जारी किया था। जिसमें ताईवान युद्ध के बारे में बताया गया था। कि यदि अमेरिकी फ़ौजी ताइवान की रक्षा के लिए आयेगा तो वह उन्हें अपने वीडियो की तरह हमला करेंगी। 

किंतु चीन को पता नहीं है कि जब अमेरिका युद्ध करेगा तो वह वास्तविक युद्ध होगा। क्योंकि अमेरिका चीन की तरह प्रोपेगेंडा नहीं करता है। एक वास्तविक युद्ध और काल्पनिक कहानी में आसमान का अंतर होता है। चीन 1962 के युद्ध की याद दिलाता है। लेकिन वह दुनिया को यह नही बताता है कि उसने धोखे से भारत पर हमला किया था।

यह सच्चाई है कि चीन की पीएलए ने अभी कोई युद्ध नहीं लड़ा है। इसलिए ये आभासी दुनिया में रह रहें हैं। जबकि भारतीय सेना हर दिन पाकिस्तान के आतंकवाद से लड़ रही है। इसके अलावा पाकिस्तान को चार बार युद्धों में भी हराया है। भारतीय सेना के सामने 93,0000 पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया था। यह पूरी दुनिया ने देखा था। 

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