कज़ाकिस्तान में जनता का विद्रोह पाकिस्तान के लिए एक सबक हो सकता है।

मध्य एशियाई देश कजाकिस्तान में इन दिनों भयंकर दंगे हों रहें हैं। आम जनता सड़क पर आकर तोड़ फोड़ करने पर उतारू है। जिसको देख कर लग रहा है कि कज़ाकिस्तान के लोग अपनी ही सरकार से नाराज हैं। जिस कारण से वहां के राष्ट्रपति कसीम-जोमार्ट टोकायव को पूरे देश में आपातकाल घोषित करना पड़ा और सरकार को बर्खास्त कर दिया। 

कज़ाकिस्तान में लोगों का प्रदर्शन

कज़ाकिस्तान के लोगों की गुस्सा की वजह

वैसे देखा जाए तो सभी मध्य एशियाई देश बेहद शांति प्रिय हैं और जिनमें कज़ाकिस्तान भी शामिल है। इस देश के लोगों की नाराज़गी का सबसे बड़ा कारण प्राकृतिक गैस है। क्योंकि कज़ाकिस्तान की सरकार ने नए साल की शुरुआत में प्राकृतिक गैस की कीमतों में 100% की वृद्धि कर दी। अर्थात् गैस के दाम दुगुने कर दिए। जबकि लोग खाना पकाने और पानी गर्म करने में बड़े पैमाने पर प्राक्रतिक गैस का इस्तेमाल करते हैं। किंतु दिक्कत यह है कि सरकार गैस पर से सब्सिडी वापस लेना चाहतीं है और गैस के दामों को बाजार पर छोड़ देना चाहतीं है। क्योंकि कज़ाकिस्तान की  सरकार के पास धन की कमी है। 

आम कजाकिस्तानी का दुःख

लेकिन आम जनता का कहना है कि हम मात्र 42,500 टेनेज (7500 भारतीय रूपए) महीना कमाते हैं और गैस की कीमत 120 टेन्ज प्रति लीटर हो गई। यहीं कारण है कि वहां की आम जनता अपनी ही सरकार के खिलाफ़ बगावत पर उतर आईं है। लोग पुलिस की गाडियों को नुकसान पहुंचा रहें हैं।

राजनीतिक तानाशाही

कज़ाकिस्तान 1991 में सोवियत संघ से टूटकर एक देश बना था। लेकिन यहां 32 वर्षों से एक ही पार्टी सत्ता में बनी हुई है।  इसके अलावा अभी तक मात्र 2 राष्ट्रपति ही बने हैं। जिनमें भी वर्तमान राष्ट्रपति कसीम-जोमार्ट टोकायव  एक कटपुतली है। इसलिए लोगों का क्रोध पहले राष्ट्रपति के स्टेच्यू पर भी उतरा। उन्होंने  Nur-Sultan Nazarbayev की मूर्ति को तोड़कर फेंक दिया।

कज़ाकिस्तान के पहले राष्ट्रपति का स्टेच्यू टूटा पड़ा।

यूरोप और पाकिस्तान में प्राकृतिक गैस संकट जल्द

कज़ाकिस्तान में आम जनता ने अपना रुद्र रूप सरकार को दिखा दिया। लेकिन यहीं हालात यूरोप और पाकिस्तान के भी बनने वाले हैं। क्योंकि प्राकृतिक गैस का संकट यूरोप और पाकिस्तान में खड़ा होने लगा है। यूरोप में प्राकृतिक गैस के उत्पादन में गिरावट आई है और यूरोप ज्यादातर नेचुरल गैस रूस जैसे देशों से आयात करता है। यदि यूक्रेन संकट ज्यादा गहराता है तो यूरोप प्राकृतिक गैस की कमी से जूझ सकता है। 

दूसरी तरफ पाकिस्तान में प्राकृतिक गैस के भंडार ख़त्म हो गए हैं और सरकार की समस्या यह है कि उसके पास गैस आयात करने के लिए पैसा नहीं है। हां इमरान खान सरकार ने देश में प्राकृतिक गैस के भंडारों को खोजने को कहा है। लेकिन दिक्कत बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ऐसा करने नहीं दे रही है। क्योंकि पाकिस्तान की 90% गैस बलूचिस्तान प्रांत से ही आती है।

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