तालीबान ने दुनिया की पहली अधिकारिक तौर पर सुसाइड बॉम्बर की बटालियन बनाई, दुनिया में सुसाइड हमलों में वृद्धि होना तय

जैसे जैसे समय बीत रहा है। तालिबान की सच्चाई दुनिया के सामने आ रही है। क्योंकि तालीबान के कार्यों से हर कोई डरने लगा है। खासकर सबसे ज्यादा अफगानिस्तान के पड़ोसी देश तालीबान से परेशान हैं। जिनमें ईरान और सभी मध्य एशियाई देश शामिल है। तालीबान के ईरान के साथ संबंध ठीक नहीं हैं और दूसरी तरफ पाकिस्तान के साथ डूरंड रेखा से संबंधित समस्याएं पैदा हो गई हैं। तालीबान ने पाकिस्तान को साफ़ कह दिया है कि वह डूरंड रेखा को स्वीकार नहीं करता है और इसलिए पाकिस्तान डूरंड बॉर्डर पर बाड़ निर्माण का कार्य बंद करें। इसी विषय पर पाक और तालीबान के बीच ज़ुबानी जंग छिड़ गई है।

तालीबान के आत्मघाती दस्ता का ऑफिस

हाईलाइट

2. आत्मघाती दस्तों का इतिहास

3. इस्लामिक स्टेट खुरासान

4. इराक और सीरिया में आत्मघाती हमलें

5. दुनिया में आत्मघाती हमलों से नुकसान

सुसाइड बॉम्बर की बटालियन का ऐलान

दुनिया के तब 440 बोल्ट का झटका लगा, जब तालीबान ने अपनी सेना में एक आत्मघाती दस्ता तैयार करने का निर्णय किया। जैसे ही यह खबर सामने आई। तो पूरी दुनिया में खलबली मच गई। क्योंकि वैसे देखा जाए तो कोई भी देश अधिकारिक तौर आत्मघाती दस्तों का निर्माण नहीं करता है। जिसका कारण हैं कि यह मानव मूल्यों से एक दम अलग है। मानव जीवन की एक गरिमा होती है और आत्मघाती दस्ता मानव के अधिकारो के खिलाफ़ जाता है। 


आत्मघाती दस्तों का इतिहास

आत्मघाती दस्तों का इतिहास बहुत पुराना है। यह विधि जापान और चीन युद्ध में ज्यादा प्रयोग हुईं थीं। हम सब जानते हैं कि चीन जापान युद्ध 1894 से 1895 तक चला था। जिसमें जापान एक महाशक्ति बनकर उभरा था। इसके बाद नानजिंग नरसंहार की घटना हुईं। इन दोनों युद्धों में जापान और चीन ने आत्मघाती हमलावरों का प्रयोग किया है। लेकिन इस तथ्य को भी जान लेना सही है कि इन दोनों देशों ने सुसाइड बॉम्बर का इस्तेमाल सिर्फ़ युद्ध में किया था। जिनका आम जनता के बीच इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया जाता है। दूसरे विश्व युद्ध (1944 से 1945)  में जापानी फाइटर पायलट मित्र राष्ट्रों के जहाजों पर सीधे प्लेन से टकरा जातें थे। यह भी आत्मघाती हमलावरों में गिना जाता है। लेकिन इन्होंने सिर्फ़ सैन्य बलों के खिलाफ़ किया था। 

लेकिन आधुनिक समय में आत्मघाती हमलावरों की परिभाषा ही बदल गई है। क्योंकि एक सुसाइड बॉम्बर लोगों से भरी बाजार, धार्मिक स्थल और मॉल्स में फट जाता है। इसलिए दुनिया तालीबान के द्वारा सुसाइड बॉम्बर की  बटालियन  बनाने से परेशान हैं। क्योंकि संयुक्त राष्ट्र के अनुसार तालिबान एक आतंकी संगठन है और उसके इस कृत्य से दुनिया भर के आतंकी संगठन ऐसा ही करेंगे।

इस्लामिक स्टेट खुरासान (ISSK)

तालीबान का कहना है कि उसका सामना इस्लामिक स्टेट खुरासान से हो रहा है। इसके अलावा यह संगठन आत्मघाती हमलावरों की भर्ती कर रहा है। इसलिए हम भी सुसाइड बॉम्बर की भर्ती कर रहे हैं। जिनमें महिला और पुरूष दोनों शामिल होगें। सबसे खास बात है कि अफ़गान तालीबान के विरुद्ध सबसे खतरनाक ISSK आतंकी संगठन बन उठ खड़ा हुआ है, जो अफगानिस्तान के खुरासान प्रांत में स्थित है। 

इराक और सीरिया में आत्मघाती हमलें

जब अमेरिका ने ईराक और सीरिया पर हमला किया था। तब वहां बड़े पैमाने पर आत्मघाती हमलावरों को तैयार किया गया था। जहां से आत्मघाती हमलावरों की एक सेना उठ खड़ी हुई और दुनियाभर में हजारों लोगों को मौत के घाट उतार दिया।

दुनिया में आत्मघाती हमलों से नुकसान

दूसरे विश्व युद्ध के बाद 40 से अधिक देशों में लगभग 5000 से ज्यादा आत्मघाती हमला हुए हैं और इन हमलों में 45000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। लेकिन 1980 से लेकर 1990 तक इनमें बहुत ज्यादा वृद्धि हुई।  इसके बाद 2001 से 2015 तक भी बड़े स्तर पर आत्मघाती हमलें होते रहें हैं। दुनिया का सबसे बड़ा आत्मघाती हमला अमेरिका के ऊपर 11 सितंबर 2001 को हुआ था। जिसमें दो प्लेन बहुमंजिला इमारतों से टकरा गए थे। इस हमले में करीब 3000 लोग मारे गए थे।

सबसे ज्यादा आत्मघाती हमले इराक सीरिया लीबिया अफगानिस्तान , पाकिस्तान और श्री लंका में हुए हैं। अफगानिस्तान में तालीबान ने नाटो सेना के खिलाफ़ बहुत ज्यादा सैन्य हमले किए थे। 

Post a Comment

Previous Post Next Post