कज़ाकिस्तान समस्या से तेल संकट गहरा रहा, तेल के दामों में आग लग गई

पूरा कज़ाकिस्तान  3 जनवरी से दंगो की आग में झुलस रहा है। जो आग कजाकिस्तान के दक्षिण भाग से शुरू हुईं थीं। वह धीरे धीरे पुरे देश में बिकराल हो गई। अब हालात यह हैं कि यह देश बिखरने के कगार पर पहुंच चुका है। दंगाई किसी की बात सुनने को तैयार नहीं हैं, जो सरकारी संपतियो को आग के हवाले कर रहे हैं।

कज़ाकिस्तान में चारों तरफ अराजकता फैली हुई है और इस अराजकता की आग दूसरे देशों को भी झुलसाना शुरू कर चुकी है। जिसमें भारत भी शामिल है। हम सब जानते हैं कि भारत एक तेल आयातक देश है और कजाकिस्तान तेल का महत्वपूर्ण निर्यातक देश है।

कज़ाकिस्तान का शीर्ष तेल क्षेत्र

रॉयटर्स के अनुसार, आज 6 जनवरी को कजाकिस्तान के प्रमुख तेल क्षेत्र तेंगिज़ में तेल उत्पादन बहुत कम हो गया है,  जिसके विषय में ऑपरेटर शेवरॉन (सीवीएक्सएन) ने बताया है कि ठेकेदारों ने कज़ाकिस्तान में हो रहें विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया है और उन्होंने ट्रेन यातायात को बाधित कर दिया। नव वर्ष में देश के पश्चिम भाग में तेल की कीमतों की वृद्धि को लेकर प्रदर्शन शुरू हुए थे। जो पूरे देश भर में घातक सरकार विरोधी दंगो में बदल गए हैं। 

दुनिया के आर्थिक विशेषज्ञों ने अंदाजा लगाया है कि कज़ाकिस्तान की वजह से तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। इससे पूरे विश्व में आर्थिक संकट गहराता जायेगा। क्योंकि भारत में तेल के अधिक दामों के कारण हंगामा शुरू हो जाता है और आर्थिक गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं। 

भारत पर कजाकिस्तान संकट का प्रभाव

भारत के लिए कजाकिस्तान बेहद महत्वपूर्ण देश है। क्योंकि भारत कजाकिस्तान से तेल के अलावा यूरेनियम का भी आयात करता है। लेकिन यह देश सरकार विरोधी दंगो में फस गया और देश के भविष्य के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। जिस वजह से विश्व स्तर पर तेल और यूरेनियम के दामों में बढ़ोतरी दर्ज़ हुईं है। क्योंकि कजाकिस्तान पीछले महीनों से लगभग 1.6 मिलियन बैरल कच्चा तेल प्रति दिन उत्पादित कर रहा था और अब लग रहा है कि देश में अशांति से तेल उत्पादन बाधित हुआ है।

क्रेडिट सीआईए

यह मध्य एशियाई देश यूरेनियम उत्पादन में अग्रणी स्थान रखता है जो पूरे विश्व का लगभग 40% यूरेनियम उत्पादन कर रहा है। लेकिन कजाकिस्तान के वर्तमान हालातों की वजह से यूरेनियम के दामों में 8% की वृद्धि हुई है। भारत के लिए दिक्कत की बात है क्योंकि हम अपना 80% यूरेनियम कजाकिस्तान से ही आयात करते हैं। 

ओपेक देशों की मंशा

ओपेक देश पहले से ही तेल उत्पादन को निचले स्तर पर ले गए हैं। ताकि तेल के दामों अप्राकृतिक रूप से बढ़ाया जा सकें। लेकिन अब कजाकिस्तान संकट ने सऊदी अरब और दूसरे प्रमुख तेल उत्पादक देशों को एक अवसर दे दिया। क्योंकि तेल के दाम जितने ऊपर जाएंगे। उससे इन सभी ओपेक देशों को लाभ होगा। 

जबकि भारत और अमेरिका ने अभी महीनों पहले मिलकर अपने आरक्षित स्टॉक  से कई मिलियन बैरल तेल बाजार में उपलब्ध कराया था। लेकिन अब लग रहा है कि भारत और अमेरिका के प्रयास  बेकार साबित हो रहें हैं।

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