इंडोनेशिया अपनी हिन्दू सनातन जड़ों की ओर लौट रहा, इंडोनेशिया अपनी नई राजधानी आखिरी हिन्दू साम्राज्य के शहर को बनाने जा रहा

इंडोनेशिया ने अपनी नई राजधानी बनाने का ऐलान कर दिया है। जिसके तहत् वह वर्तमान इंडोनेशियन राजधानी जकार्ता को छोड़कर नुसंतारा को बनाने जा रहा है। दरअसल जकार्ता बहुत तेज़ी से समुद्र में डूब रहीं है। यहीं कारण है कि यह देश अपनी राजधानी बदलने पर मजबूर है। 


जबकि इंडोनेशिया को अपनी राजधानी स्थांतरण में 36 बिलियन डॉलर से अधिक खर्च करने होंगे। क्योंकि नुसंतारा में राष्ट्रपति भवन , मंत्रालय और अच्छी सड़कों का जाल बिछाना होगा। अभी इसमें कई वर्षों का समय लगने वाला है। 

नुसंतारा का सनातन हिन्दू धर्म से जुड़ाव

नुसंतारा का सनातन हिन्दू धर्म से बहुत बड़ा जुड़ाव है। जिस पर सभी इंडोनेशियन गर्व महसूस करते हैं और इस गर्व के पिछे का कारण गजह मादा हैं। गजह मादा आखिरी हिन्दू मजापहित साम्राज्य के प्रधानमन्त्री थे। एक बार की बात है कि उन्होंने सुम्पा पलापा नामक एक शपथ दी, जिसमें उन्होंने एक तपस्वी की तरह जीवन (मसालों वाले भोजन का सेवन न करके) जीने की कसम खाई, जब तक कि वह  मजापहित साम्राज्य के लिए नुसंतारा के सभी दक्षिण पूर्व एशियाई द्वीपसमूह पर विजय प्राप्त नहीं कर ली। जिसमें इंडोनेशिया के सभी पड़ोसी देशों की भूमि शामिल थी। जिसको गजह मादा ने इंडोनेशिया में शामिल कर लिया था। 

इनके समय इंडोनेशिया अपने उच्चतम शिखर पर पहुंच चुका था। उनके शासनकाल के दौरान, रामायण और महाभारत सहित सभी हिंदू महाकाव्य की प्रदर्शनी जापानी और विश्वदृष्टि से होती थीं।

हम सब जानते हैं कि इंडोनेशिया एक मुस्लिम देश हैं जहां दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी (27.35 करोड़) रहती है। लेकिन तब भी वह अपनी सनातन संस्कृति को नही भूले हैं। उनका कहना है कि उन्होंने सिर्फ़ धर्म बदला है संस्कृति नहीं। इसलिए हम इंडोनेशिया के शासन में हिन्दू धर्म के प्रभावों को देख सकतें हैं। इंडोनेशिया की एयरलाइंस का नाम गरुण एयरलाइंस है और गरुड़ भगवान विष्णु का वाहन है। इसी तरह इंडोनेशिया के 20,000 के नोट पर भगवान गणेश की मूर्ति देखने को मिल जायेगी।

इंडोनेशिया की सनातन सोच के पीछे का कारण

इंडोनेशिया का सनातन धर्म से जुड़ाव का कारण सुकर्णों हैं। वह 1945 से 1967 तक इंडोनेशिया के पहले राष्ट्रपति थे। सुकर्णो के पिता महाभारत में कर्ण के पात्र से बहुत अधिक प्रभावित थे। लेकिन उन्होंने अधर्म की ओर से युद्ध लड़ा था। लेकिन तब भी वह अपने बेटे का नाम कर्ण के नाम पर रखना चाहते थे। किंतु उनके नाम के आगे सु शब्द जोड़ दिया। जिसका अर्थ अच्छा होया है। इसलिए वह सुकर्णो कहलाए।


उनका नाम सुकर्णो था, वह 1945 से 1967 तक इंडोनेशिया के पहले राष्ट्रपति थे। सुकर्णो के पिता, महाभारत में कर्ण के उनके चरित्र-चित्रण से प्रभावित थे, लेकिन युद्ध में गलत पक्ष को उनके समर्थन को अस्वीकार करते हुए, उनका नाम सु (अच्छा) कर्ण रखा।

सुकर्णो की पुत्री का नाम मेगावती सुकर्णो पुत्री था और जो बाद में इंडोनेशिया की पहली महिला राष्ट्रपति 2001 से 2004 के बीच बनी थीं। 

इंडोनेशिया के इतिहास को भारत के हिंदू व्यापारियों और धर्म गुरुओं ने बहुत प्रभावित किया है। इन्हीं की सहायता से हिन्दू सनातन संस्कृति का वहां उभार हुआ। वहां आखिरी हिन्दू साम्राज्य प्रारंभिक 16वीं शताब्दी तक रहा था। 

माजापहित साम्राज्य

माजापहित साम्राज्य दक्षिण पूर्व एशिया में एक जावानी हिंदू साम्राज्य था। जो इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर मौजूद था। अगर हम इसके अस्तित्व की बात करें तो वह इसका अस्तित्व 1293 से 1527 तक रहा था और इसके चरम उत्कर्ष की अवस्था हयाम वुरुक के युग के दौरान पहुंची। जिनके साम्राज्य की सीमाएं पूरे दक्षिण पूर्व एशिया में फैल गई। जिसका सबसे ज्यादा श्रेय आखिरी हिन्दू साम्राज्य के प्रधानमन्त्री गजह मादा को जाता है।

Post a Comment

Previous Post Next Post