भारत-फिलिपिंस ब्रह्मोस मिसाइल डील पर अमेरीकी CAATSA कानून के प्रतिबंध की सच्चाई क्या है, जानें विस्तार से

आखिरकार भारत की फिलिपिंस के साथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की डील हो ही गई है। यह भारत की हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के लिए महत्वपूर्ण बात है क्योंकि हम पहली बार अपनी मिसाइल को दूसरे देश को बेच रहें हैं। इससे दूसरे देश भी अनुसरण लेंगे। जिनमें आसियान देश प्रमुख हैं। क्योंकि भारत की तरह इनका भी प्रमुख शत्रु चीन ही है और फिलिफिंस को भी चीन से बड़ा खतरा है।

भारत और रूस का  संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस 

ब्रह्मोस मिसाइल डील

भारत ने फिलिपिंस के साथ ब्रह्मोस मिसाइल का $374 मिलियन डॉलर (2800 भारतीय रूपए)) तय किया है। इस डील के विषय में , फिलिपिंस ने एक अधिकारिक प्रस्ताव भी प्रकाशित किया है।  जिसके तहत् वह ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड से अपनी नौसेना के लिए तट-आधारित एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम ले रहा है। इसके लिए उसने 374 मिलियन डॉलर की राशि का प्रस्ताव स्वीकार किया है।

फिलिपिंस को ब्रह्मोस मिसाइल का प्राप्त होने वाला वर्जन

भारत फिलिपिंस को 300 किलोमीटर से ऊपर की ब्रह्मोस मिसाइल नहीं दे सकता है। क्योंकि फिलिपिंस मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (एमटीसीआर) का सद्स्य नहीं है।  जबकि भारत 2016 में ही एमटीसीआर का सदस्य बन चुका है और  इसके सद्स्य देशों को अपने सैन्य बलों के लिए अधिक दूरी तक मार कर सकने वाली क्रूज मिसाइलों को विकसित करने का अधिकार प्राप्त है।यहीं कारण है कि भारत फिलिपिंस को  290 किलोमीटर (180 मील) तक मार कर सकने वाली ब्रह्मोस मिसाइल दे रहा है और इसकी गति 2.8 से लेकर 3.0 मैक तक होंगी।

भारत का डिफेंस लाइन ऑफ क्रेडिट

भारत फिलिपिंस के सहारे चीन की शक्ति को संतुलित कर रहा है। क्योंकि चीन दोनों देशों के लिए एक बड़ा खतरा है। फिलिपिंस का चीन के साथ दक्षिण चीन सागर में द्वीपों को लेकर विवाद है और भारत के साथ सीमा विवाद है। 

भारत की विदेश नीति का प्रमुख हथियार लाइन ऑफ क्रेडिट बनता जा रहा है। जिसका प्रत्यक्षीकरण फिलिपिंस के साथ ब्रह्मोस मिसाइल डील है। भारत ने रक्षा खरीद के लिए फिलीपींस को $100 मिलियन डॉलर की लाइन ऑफ क्रेडिट की पेशकश की थी।  भारत पिछले कुछ वर्षों में थाईलैंड, इंडोनेशिया और वियतनाम सहित कई दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के साथ बातचीत कर रहा है, ताकि उन्हें ब्रह्मोस के भूमि और समुद्र-आधारित संस्करण बेचे जा सकें।

फिलिपिंस का रक्षा प्लान 2028

फिलिपिंस, उन देशों में शामिल है, जिसे अमेरिका की तरफ़ से संजीवनी बूटी प्राप्त है। अर्थात् फिलिपिंस का अमेरिका के साथ एक रक्षा संधि है। जिसके अनुसार यदि कोई देश फिलिपिंस पर आक्रमण करता है तो वह आक्रमण यूएस पर माना जाएगा। किंतु फिलिपिंस भी पूरी तरह से यूएस पर निर्भर नहीं रहना चाहता है। जिसका प्रमुख कारण चीन की बढ़ती सैन्य शक्ती है। क्योंकि अगले 10 वर्षों में चीन सैन्य ताकत के मामले में यूएस पर भारी पड़ सकता है। यहीं हाल जापान का है। वह भी यूएस पर निर्भर नहीं रहना चाहता है और अपनी सेना, नेवी और वायु सेना को आधुनिक बनाने पर लग गया है। 

फिलिपिंस ने चीन की बढ़ती सैन्य शक्ती से निपटने के लिए एक रक्षा प्लान बनाया है। जिसके लिए उसने 5.6 बिलियन डॉलर अपने सैन्य बलों को आधुनिक बनाने पर खर्च करने हैं। उसने 2.6 बिलियन डॉलर अपनी वायु सेना, 1.4 बिलियन डॉलर नौसेना और 890 मिलियन डॉलर स्थल सेना पर खर्च करने हैं। लेकिन इसका बड़ा हिस्सा करीब 400 मिलियन डॉलर ब्रह्मोस मिसाइल डील पर खर्च हो गया है। लेकिन भारत सरकार ने यहां पर फिलिपिंस को 100 मिलियन डॉलर का डिफेंस लाइन ऑफ क्रेडिट दे दिया है। जिसकी ब्याज की दर बहुत ही कम हैं और फिलिपिंस को किस्तों में चुकाना पड़ेगा। 

अमेरीका के CAATSA कानून का डर

फिलीपींस ने भारत के सामने ब्रह्मोस मिसाइल की वार्ता के समय CAATSA कानून का मुद्दा भी उठाया होगा। क्योंकि फिलीपींस की CAATSA कानून को लेकर कुछ चिंताएं थी। क्योंकि ब्रह्मोस मिसाइल भारत और रूस का संयुक्त उपक्रम है। जिसमें भारत की हिस्सेदारी 51% और रूस की 49 % है। हालाकि भारत ने फिलीपींस की इस चिंता को नकार दिया। क्योंकि अमेरिका का CAATSA कानून सिर्फ़ रूस में बने रक्षा उत्पादों पर लगता है।  इससे यह साफ़ हो जाता है कि ब्रह्मोस मिसाइल की इस डील से रूस को भी बड़ा फायदा हो रहा है।

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