सी.एस.टी.ओ. और नाटो सैन्य संगठन में अंतर, CSTO पर नाटो के भारी पड़ने का कारण

सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन (CSTO)

सीएसटीओ एक सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन है, जिसकी स्थापना 15 मई 1992 को सोवियत संघ के टूटने के बाद हुईं थीं। इसके सदस्यो ने 1992 को ताशकंद संधि पर हस्ताक्षर किए थे। जिससे यह संगठन अस्तित्व में आया। इसका नया रूप सन् 2002 में आया, जब इसे सुरक्षा संधि संगठन से बदलकर सैन्य गठबंधन में परिवर्तित कर दिया।
 

जोए बाइडेन और ब्लादिमीर पुतिन

सी.एस.टी.ओ. के सद्स्य

1.रूस , 

2.बेलारूस

3.आर्मेनिया, 

4.कजाकिस्तान, 

5.किर्गिस्तान, 

6.उजबेकिस्तान

पूर्व सदस्य

1.तजाकिस्तान

2.अज़रबैजान

3.जॉर्जिया

सीएसटीओ का मुख्यालय

इस सैन्य संगठन का मुख्यालय रूस की राजधानी मास्को में है और इसकी भाषा भी 'रूसी' है।

सीएसटीओ का उद्देश्य

इस संगठन का उद्देश्य सोवियत संघ से अलग हुए देशों को पश्चिमी और चीनी प्रभाव से मुक्त रखना है। जिसमें यह बहुत हद तक सफल भी रहा है। लेकिन तजाकिस्तान की घटना ने पश्चिमी प्रभाव को साफ़ कर दिया है। जिसमें सभी विश्व शक्तियां तजाकिस्तान को अस्थिर करने में लगीं हुईं हैं।

सीएसटीओ के प्रमुख अभ्यास

रूस के नेतृत्व में CSTO के सैन्य अभ्यास भी होते रहते हैं। अभी अगस्त 2014 में, सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन के 3000 सैनिकों ने युद्ध खेलों के तहत कजाकिस्तान में मनोवैज्ञानिक और साइबर युद्ध अभ्यास में भाग लिया।

नाटो (NATO)

नाटो पश्चिमी देशों का एक सैन्य गठबंधन है, जिसका पूर्ण नाम उत्तर अटलांटिक संधि संगठन है। इसको हम उत्तरी अटलांटिक गठबंधन भी कह सकते हैं। इसकी स्थापना के लिए पश्चिमी देशों ने 4 अप्रैल 1949 को उत्तरी अटलांटिक संधि पर हस्ताक्षर किए। 

नाटो के सद्स्य देश

नाटो विश्व का सबसे शक्तिशाली सैन्य संगठन है, इसमें 27 यूरोपीय देश, 2 उत्तरी अमेरिकी देश और 1 यूरेशियन देश शामिल है। अमेरीका नाटो का सबसे शक्तिशाली देश है, इसके अलावा फ्रांस, जर्मनी और इंग्लैंड भी शक्तिशाली देश हैं।

नाटो का उद्देश्य 

उत्तर अटलांटिक संधि संगठन का प्रमुख उद्देश्य सोवियत संघ के विरुद्ध सामूहिक रूप से लड़ना था। जिसमें सभी सद्स्य देशों ने अपनी स्वीकृति प्रदान की थी। इसमें सामूहिक सुरक्षा का प्रावधान है अर्थात् नाटो के एक देश पर हमला सभी सदस्य देशों पर हमला माना जायेगा। 

नाटो का मुख्यालय

नाटो की स्थापना 4 अप्रैल 1949 को अमरीका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में की गई थी। जिसका मुख्यालय यूरोपीय देश बेल्जियम के शहर ब्रुसेल्स में है। 

नाटो के संस्थापक सदस्य

नाटो के संस्थापक सदस्यों में 12 देश शामिल थे। जिन्होंने आरंभिक नाटो की शुरूआत की थी। जिसमें धीरे धीरे दूसरे देश भी शामिल होते चले गए।

1.बेल्जियम 

2.कनाडा

3.डेनमार्क

4.फ्रांस

5.आइसलैंड

6.इटली

7.लक्जमबर्ग

8.नीदरलैंड

9.नॉर्वे

10.पुर्तगाल

11.यूनाइटेड किंगडम 

12.संयुक्त राज्य अमेरिका

यूरोप के महत्वपूर्ण देश नाटो में शामिल

यूरोप के सभी देश नाटो की स्थापना के समय शामिल नहीं हुए थे। जिसमें बहुत महत्वपूर्ण देश शामिल हैं।

1. ग्रीस (1952)

2. तुर्की (1952)

3. पश्चिमी जर्मनी(1955)

4. स्पेन(1982)

इसके अलावा सोवियत संघ के बिखराव के बाद इसमें 14 ओर देश सद्स्य के रुप में शामिल हो गए। क्योंकि सोवियत संघ के बिखराव के साथ शीत युद्ध भी खत्म हो गया था।

नाटो के प्रमुख युद्ध

1.

नाटो का सबसे महत्वपूर्ण युद्ध शीत युद्ध था। क्योंकि दूसरे विश्व युद्ध के बाद सोवियत संघ अत्याधिक शाक्तिशाली हो गया था। जो सैन्य, आर्थिक और अंतरिक्ष के क्षेत्र में हर साल विकास कर रहा था। यहीं कारण है कि पश्चिमी देशों ने सामूहिक रूप से सोवियत संघ का सामना करने के लिए सैन्य संगठन की स्थापना की। 

2.

अफगानिस्तान युद्ध नाटो देशों के लिए शर्म की बात रहीं है। क्योंकि अमेरिका ने आंतकवाद के नाम पर अफगानिस्तान में प्रवेश किया था। जिसका सबसे बड़ा कारण इसलामिक आतंकवादी ओसामा बिन लादेन था। जिसमें अमेरिका पर इतिहास का सबसे घातक हमला किया। उसने अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर दो प्लेन से आत्मघाती हमलें करवाए। जिसमें अमेरिका के 3000 से ज्यादा लोग मारे गए थे। 

नाटो और सीएसटीओ में अंतर

नाटो अमीर पश्चिमी देशों का एक सैन्य गठबंधन है और जबकि सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन (CSTO) आर्थिक तौर पर कमजोर रूस के नेतृत्व वाला सैन्य गठबंधन है। नाटो में अमेरिका जैसा शक्तिशाली देश है, जो एक आर्थिक ताकत है। जबकि सीएसटीओ के सद्स्य देश बेहद छोटे और कमजोर देश है। 


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