10 लाख करोड़ की अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन प्रशांत महासागर में 2031 में डूबने जा रही। नासा ने क्रैश कराने के निर्णय लिया

नासा ने मानव सभ्यता की सबसे महंगी (150 बिलियन डॉलर) वस्तु आईएसएस को प्रशांत महासागर में 2031 में क्रैश कराने की योजना बनाई है। क्योंकि इसको नासा 2031 के बाद सेवा मुक्त करने जा रही है। यहीं कारण है कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन एक बार पुनः धरती पर वापस आ रहीं है। 



अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का कब्रगाह विशाल प्रशांत महासागर बनने जा रहा है। नासा इसे स्पेस में नहीं छोड़ना चाहती है। क्योंकि अगर इसे स्पेस में छोड़ दिया गया तो इससे स्पेस में एक कचरा जमा होगा। जोकि मानव सभ्यता के स्पेस मिशन के लिए खतरा बनेंगे। 

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अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को 20 नवंबर 1998 को लॉन्च किया गया था। जबकि इसका परिचालन सन् 2000 में शुरू हुआ था। यह मानव सभ्यता की सबसे बड़ी और महंगी वस्तु है जो अंतरिक्ष में एक उड़ती हुई प्रयोगशाला की तरह कार्य कर रही है।  जहां वैज्ञानिक अंतरिक्ष के गूढ़ रहस्यों पर जानकारी प्राप्त करते हैं। 

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1998 में प्रक्षेपण के बाद, इस अंतरिक्ष प्रयोगशाला ने 8478 दिन स्पेस में बताएं हैं। यह हमारी पृथ्वी की कक्षा में 420 किमी मीटर ऊपर चक्कर लगा रही है। इसके अतिरिक्त 20 से अधिक देशों के 200 से ज्यादा वैज्ञानिक इस पर जा चुके हैं।

नासा की रिपोर्ट के अनुसार, 20 वर्षों से अधिक समय तक आईएसएस ने मानव को अंतरिक्ष में सुरक्षित आवास दिलाने का कार्य किया। लेकिन अब 2031  में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को पृथ्वी की कक्षा से बाहर कर दिया जायेगा और इस चरणबद्ध तरीके से प्रशांत महासागर में क्रैश करा दिया जायेगा।

जब एक बार कक्षा से बाहर आईएसएस पॉइंट निमो में स्पलैश लैंडिंग से पहले प्रशांत महासागर के ऊपर पृथ्वी के वायुमंडल में धीरे धीरे नीचे उतरेगी। हालाकि यह पृथ्वी के किसी भी भूखंड से लगभग 2,700 किमी दूर होगी।

बिंदू नीमो के अंतरिक्ष कब्रिस्तान' के नाम से विख्यात है। क्योंकि यह स्थान निष्क्रिय अंतरिक्ष स्टेशनों और अंतरिक्ष यानों के लिए एक कब्रगाह का काम कर रहा है। इसको अंतरिक्ष वस्तुओं का आश्रय स्थल भी कहा जाता है। 

आईएसएस सेवा मुक्त करने से पहले, नासा इस पर करीब 8 वर्षों तक कार्य बंद रखेगी। नासा की रिपोर्ट में बताया गया है कि इसका उपयोग मंगल ग्रह के लिए होने वाले मिशन में किया जायेगा। 

आईएसएस के निदेशक रॉबिन गैटेंस ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन एक जीरो गुरुत्वाकर्षण में 2 दशकों से रह रहीं है और यह अब तीसरे दशक में प्रवेश कर रही है। उन्होंने कहा कि यह तीसरा दशक तकनीकों का परीक्षण , मानवीय स्वास्थ और पर्यावरणीय लाभ के लिए होगा। इसके अलावा इससे कम से कम व्यावसायिक और वाणिज्यिक लाभ प्राप्त हो सकेगा।

आईएसएस नासा के मानव चंद्र मिशन में काम आयेगी। जिसके तहत् पहली महिला मून पर अपने कदम रखने जा रही है।


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