15 जून की गलवांन घाटी की झड़प में चीन के भारत से 9 गुना सैनिक मारे गए, ऑस्ट्रेलियन अखबार का दावा

आस्ट्रेलिया के प्रसिद्ध अखबार "द क्लैक्सन" ने जून 2020 की गलवान वैली झड़प पर चौकाने वाले तथ्य पेश किए हैं। जिसमें उन्होंने खुलासा किया है कि भारत से 4 गुणा चीनी सैनिक जून 2020 की रात को गलवान वैली की झड़प में मारे गए थे। जिसमें अधिकतर सैनिक गलवान नदी में डूबने से मरे। क्योंकि जब यह घटना हुईं थीं तब गलवान वैली का तापमान शून्य से काफ़ी नीचे था। The klaxon के अनुसार, चीन के करीब 38 सैनिक गलवांन घाटी में मारे गए थे। जोकि भारतीय क्षति से काफ़ी अधिक है।


इस अखबार ने आगे बताया कि भारत-चीन की गलवांन घाटी में 15 जून 2020 को बड़ी झड़प हुई थी। जिसमें भारत के एक कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू सहित 21 सैनिक शहीद हो गए थे। भारत ने अधिकारिक तौर पर अपनी क्षति को स्वीकार कर लिया था। 

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जबकि चीन ने अपनी पीपल्स लिबरेशन आर्मी की क्षति को तुंरत स्वीकार नहीं किया था। चीन ने अंतरराष्ट्रीय और अपने घरेलू दबाव के कारण 8 सप्ताह बाद 4 सैनिकों की मौत को  स्वीकार किया था। इससे पता चलता है कि चीन अपने युद्ध अपराध को दुनिया और चीनी लोगों से छुपा रहा है। अखबार के अनुसार, चीन ने अपने जिन चार सैनिकों की मौत को स्वीकार किया है। उनमें सेना के जूनियर सार्जेंट वांग जुओरान की मौत नदी में डूबने से बताई गई है। 

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इसी रिपोर्ट में चीनी सोशल मीडिया वीवो के कई उपयोगकर्ताओं के हवाले से कहा गया है कि  उस जून 2020 की रात को भारतीय सेना ने पीपल्स लिबरेशन आर्मी के कम से कम  38 सैनिकों को मौत के घाट उतारा था। जिसमें जूनियर सार्जेंट वांग जुओरान की मौत भी शामिल है। 


चीन का सरकारी मीडिया गलवान झड़प को कवर करने में विफल रहा था। जबकि वहां के कुछ स्थानीय ब्लॉगर्स ने इस ख़बर को कवर किया था। लेकिन चीनी सरकार द्वारा इन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। कई वीवो के उपयोगकर्ताओं को बैन कर दिया। क्योंकि उन्होंने गलवान वैली में घायल चीनी सैनिकों के बारे में अपने वीवो अकाउंट पर जानकारी डाली थी।

गलवांन घाटी की झड़प का कारण

आस्ट्रेलियन अखबार के खोजकर्ताओ ने बताया कि 15 जून की घातक घटना एक अस्थाई पुल पर हुईं थीं। जिसको भारतीय सेना 22 मई के तीन सप्ताह पहले गलवांन नदी पर बनाया था। 

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भारतीय और चीनी सेना एक बफर जोन बनाने पर राज़ी हो गई थी। ताकि संघर्ष को कम किया जा सके। लेकिन पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने गैरकानूनी तरीके से बफर जोन में निर्माण कार्य शुरू कर दिया और उस क्षेत्र में भारी मशीनों को ले आई थी।  इस बात को एक चीनी वीवो यूज़र क्वांग ने भी स्वीकार किया। जिसने माना है कि पीएलए बफर जोन में निर्माण कार्य कर रही है। जोकि आपसी सहमति और समझौतों का उल्लंघन है। इसने यह भी माना है कि वह भी इस क्षेत्र में काम कर चुका है। तभी वह इतने दावे से बता रहा है।

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भारत और चीन ने 1996 में एक समझौता किया था। जिसके अनुसार वास्तविक नियंत्रण रेखा पर हथियारों का प्रयोग नहीं किया जायेगा। जबकि 15 जून की घटना को चीनी सैनिकों ने नुकीले हथियारों से भारतीय सैनिकों पर हमला किया था। जोकि सीधे तौर पर 1996 के समझौता का उल्लंघन था। 


गलवान घटना को अंजाम देने वाले पीएलए के कर्नल क्यूई फैबाओ को चीन ओलंपिक मशाल वाहक बना रहा है। जबकि कर्नल क्यूई फैबाओ भी 150 पीएलए सैनिकों के साथ 15 जून की घटना के समय मौजूद था। जब इसने भारतीय सेना की बिहार रेजीमेंट पर हमला किया। तब भारतीय सैनिकों ने इसके सिर पर गम्भीर हमला किया था। जिससे यह घायल हो गया और वहां से भाग गया था।

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