ब्रिटिश भारत से लेकर स्वतंत्र भारत तक (1860 से 2022) के बजट की विशेषताएं, भारतीय बजट का ऐतिहासिक घटनाचक्र बेहद दिलचस्प रहा

भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कल 1 फरवरी 2022 को भारत का बजट पेश करने जा रही है। केंद्रीय बजट पर न सिर्फ़ भारत व पूरे विश्व की नज़र रहती है। समाज का हर वर्ग सरकार से अपने लिए कुछ न कुछ चाहता है। जिसमें चाहें मध्यम वर्ग , गरीब या उद्योग जगत हों। सभी की आशाएं वित्त मंत्री और उनके बजट पर टिकीं होती हैं।  


लेकिन क्या आप अपने भारतीय बजट के बारे में कुछ जानते हैं कि  कैसे इसकी पहली बार शुरुआत हुई थी और इसकी पहली बार भारत में शुरआत किसने की थीं। इसीलिए आज हम भारतीय बजट के इतिहास की प्रमुख घटनाओं पर विस्तार से जानकारी प्राप्त करेंगे।

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बजट शब्द की उत्त्पति

बजट शब्द की उत्त्पति फ्रेंच भाषा के लातिन शब्द बुल्गा से हुई है। जिसका अर्थ चमड़े का थैला होता है। इसी बुल्गा शब्द से फ्रांसीसी शब्द बोऊगेट की उत्पत्ति हुई थी। इसी बोऊगेट शब्द से एक अंग्रेजी भाषा के शब्द बोगेट की उत्पत्ति हुई। यहीं से बजट शब्द अस्तित्व में आया।

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प्रथम भारतीय बजट

भारतीय बजट का इतिहास लगभग 150 वर्ष पुराना है। पहली बार भारतीय बजट को एक अंग्रेज ने प्रस्तुत किया था। चूंकि उस समय भारत में ब्रिटिश शासन चल रहा था। यहीं कारण है कि 7 अप्रैल 1860 को ब्रिटिश सरकार के वित्त मंत्री जेम्स बिल्सन ने पहली बार भारतीय बजट पेश किया।

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स्वतंत्र भारत का पहला बजट

भारत को ब्रिटिश शासन से 1947 को आज़ादी प्राप्त हुईं थीं। इसी के साथ भारतीयों को अपना बजट भी पेश करने की सुविधा उपलब्ध हुई। स्वतंत्र भारत का पहला बजट पूर्व वित्त मंत्री आर० के० षणमुखम चेट्टी ने 26 नवंबर 1947 को भारतीय संसद में पेश किया। हालाकि यह मात्र साढ़े सात महीनों का ही बजट था। अर्थात् इसमें 15 अगस्त 1947 से लेकर 31 मार्च 1948 तक के महीने ही शामिल थे।

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अंतरिम बजट शब्द की उत्पत्ति

हर भारतीय ने अंतरिम बजट शब्द बहुत बार सुना होगा क्योंकि भारत की सभी सरकारें लघु अवधि के लिए भी बजट पेश किया करती हैं। जिसको हम अंतरिम बजट भी कहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अंतरिम बजट शब्द का पहली बार उपयोग कब हुआ। भारत में पहली बार अंतरिम बजट आर० के० षणमुखम चेट्टी ने 1948 से 1949 के बीच पेश किया। यही से अंतरिम बजट शब्द की शुरूआत हुई। 

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गणतंत्र भारत का बजट

पूर्व वित्त जॉन मथाई ही पहले व्यक्ती हैं, जिन्होंने गणतंत्र भारत का बजट 28 फरवरी 1950 को संसद में पेश किया।  यही वह बजट था, जिसमें पहली बार योजना आयोग की चर्चा की गई थी।

बजट पेस्ट करने वाले प्रथम प्रधानमन्त्री

भारतीय बजट को हमेशा एक वित्त मंत्री संसद में पेश करता है। लेकिन 1958 से 1959 तक तात्कालिक पीएम पंडित जवाहरलाल नेहरू ने बजट पेश किया। हालाकी उस समय वित्त मंत्रालय का कार्यभार उनके पास था। इसके बाद इंदिरा गांधी भी बजट पेश करती रहीं हैं और वह भारतीय इतिहास में बजट पेश करने वाली पहली महिला बनी। इंदिरा गांधी के बाद निर्मला सीतारमण का नाम आता है।

बजट पेश करने का समय बदला

भारत को ब्रिटिश शासन से आजादी 1947 में ही प्राप्त हो गई थी। लेकिन उनकी दासता का प्रभाव गुलामी के बाद भी मौजूद रहा था। भारत का पहला बजट 1860 को ब्रिटिश समय अनुसार शाम 5 बजे को प्रस्तुत किया गया था। जिसको स्वतंत्रता पश्चात 1999 तक जारी रखा गया था। 

किंतू 2000 में अटल बिहारी वाजपेई की सरकार के वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने बजट सुबह 11 बजे पेश किया। हालाकि इसकी तारीख में कोई परिवर्तन नहीं किया गया। क्योंकि अंग्रेजों ने भारत में  28 फरवरी को बजट पेश करने की परंपरा डाली थी। लेकिन मोदी सरकार ने बजट पेश करने की तारीख़ को 2 फरवरी कर दिया।

सबसे ज्यादा बार बजट पेश किया

भारत के इतिहास में मोरारजी देसाई ही पहले ऐसे व्यक्ती हैं जिन्होंने सबसे ज्यादा बार बजट पेश किया है। उन्होनें 10 बार भारतीय बजट को पेश किया है। जिसमें 6 बार वित्त मंत्री रहते हुए और 4 बार उप प्रधानमंत्री रहते हुए

आम बजट में रेल बजट का विलय

2017 से पहले रेल बजट आम बजट से अलग पेश किया जाता था। जोकि एक अंग्रेजो की परंपरा ही थी। लेकिन मोदी सरकार ने 2017 में रेल बजट को आम बजट में ही विलय कर दिया।

सबसे लंबा बजट

अगर हम भारतीय इतिहास के सबसे लंबे बजट की बात करें तो 2020 का सबसे लंबा बजट था। जिसको वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पेश करने में 2 घंटा 40 मिनट का समय लगा था। यहां यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि निर्मला सीतारमण भारत की पहली पूर्ण कालिक महीला वित्त मंत्री हैं। इंदिरा गांधी पूर्ण कालिक वित्त मंत्री नहीं थी।

सबसे छोटा बजट

वो कहते हैं कि इतिहास बड़ा अजीब होता है। भारतीय बजट का इतिहास भी बड़ा अजीब है। अगर आप भारत के सबसे छोटे बजट के बारे में जानना चाहते हैं तो यह सन् 1977 में वित्त मंत्री एच एम पटेल द्वारा पेश किया गया था। जोकि मात्र 700 शब्दों का बजट था। हालाकि यह एक अंतरिम बजट था।

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