कोरियन युद्ध से भारत में 1950 महंगाई बढ़ गई थी, पूर्व पीएम नेहरु पर पीएम मोदी का हमला

प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी जी ने आज संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर बोले जिसमें उन्होंने नेहरू जी को लेकर ताबड़तोड  कांग्रेस और गांधी परिवार पर हमले किए। पीएम मोदी ने भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु के पूर्व बयान पर संसद में एक नया रूप दिखाया। आइए जानते हैं कि पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 1950 में लाल किला पर क्या कहा था।


पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू ने लाल किला भाषण 1950

पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू ने लाल किला भाषण 1950 में कहा था कि "कभी-कभी कोरिया में कुछ होता है और यह भारत में मुद्रास्फीति को प्रभावित करता है। कभी-कभी संयुक्त राज्य अमेरिका में कुछ होता है और भारत में मुद्रास्फीति बढ़ जाती है" 

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इसी बयान को लेकर पीएम मोदी ने कांग्रेस और नेहरू पर हमले किए। उन्होंने कहा कि यह मुद्रास्फीति के खिलाफ नेहरू-कांग्रेस की असहाय मानसिकता थी।  लेकिन हमने इसे नियंत्रित कर लिया है। 

सबसे अधिक वर्ष भारत के पीएम रहें

आज भारत का हर नागरिक जानता है कि भारत का प्रधानमन्त्री सबसे ज्यादा समय तक कौन रहा था। उसका सीधा उत्तर प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू होगा। जबकि उनके बाद स्थान इंदिरा गांधी, मनमोहन सिंह और वर्तमान पीएम मोदी का है। जो अधिक समय तक पीएम रहें हैं।

संख्यानामपार्टीसमयकाल
1. पंडित जवाहर लाल नेहरूकांग्रेस 17 years, 286 days
2.इंदिरा गाँधी कांग्रेस 15 years, 59 days
3.मनमोहन सिंह कांग्रेस 10 years, 4 days
4.नरेंद्र मोदीबीजेपी7 Years 257 Days
5.अटल बिहारीबीजेपी6 years, 64 days
6.राजीव गाँधी कांग्रेस 5 years, 32 days
7.पी. वी. नरसिंम्हाराव कांग्रेस 5 years, 330 days
8.मोराजी देसाई जनता पार्टी2 year, 126 days
9. लाल बहादुर शास्त्री कांग्रेस 2 year, 216 days
10. विश्व नाथ प्रताप जे. डी. पार्टी 1 year 343 days
पंडित जवाहरलाल नेहरू के समय मुद्रास्फीति

जब कोरिया युद्ध की शुरुआत हुई थी तब भारत के पीएम पंडित जवाहरलाल नेहरू थे। कोरियाई युद्ध 25 जून 1950 से 27 जुलाई 1953 तक उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच लड़ा गया था।

इस युद्ध के समय 1950 से 1960 के मध्य, दुनिया में मुद्रास्फीति की दर 2.5% के बीच रही थी। जोकि बहुत अधिक थी। इस समय दुनिया में सामानों की कीमतें आसमान छू रही थी। इस उच्च मुद्रास्फीति से भारत भी अछूता नहीं रहा था। भारत में यह 2.3 से थोड़ा ही कम थीं। लेकिन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के अंतिम चरण में मुद्रास्फीति दर का औसत बढ़कर 4.1 % हों गया। यहीं कारण है कि आज वर्तमान पीएम मोदी जवाहर लाल नेहरू पर हमलावर हैं।

हालाकि पीएम मोदी ने मुद्रास्फीति को किसी तरह से नियंत्रण में रखा है। अन्यथा अमेरिका और पश्चिमी देशों की तरह भारत में हर चीज़ की कीमत आसमान छू रही होती।

पीएम मोदी ने मुद्रास्फीति को नियंत्रण में कैसे रखा?

1992 में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने देश की अर्थव्यवस्था के लिए कुछ विशेष कदम उठाए। जिनसे हम डूबते डूबते बचे थे। लेकिन उन्होंने मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने का कोई उपाय नहीं किया था। जिसके मोदी की सरकार ने एक उपाय मार्च 2016 में खोज निकाला था। 

उन्होंने मार्च 2016 में, भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम में संशोधन में संशोधन किया और आरबीआई को मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण को हासिल करने के लिए जिम्मेदार बना दिया। जिससे आरबीआई को अधिक शक्ति प्राप्त हुईं और वह मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण के अनुपालन को ठीक ढग से लागू कर सकीं। इस संशोधन ने केंद्रीय बैंक को यह काम सुनिश्चित करने की शक्ति दी कि मुद्रास्फीति 2% से 6% के बीच बनी रहे।

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