रामानुजाचार्य की 216 फिट की स्टैच्यू ऑफ इक्वलिटी, 1100 वर्ष पहले भारत में भक्ति, एकता और समानता की अलख जगाई , रामानुजाचार्य का जीवन परिचय world affairs in hindi

आज भारत के प्रधान मंत्री मोदी ने समानता की प्रतिमा (स्टैच्यू ऑफ इक्वलिटी) का अनावरण किया और इसे महान संत-दार्शनिक श्री रामानुजाचार्य जी को समर्पित किया। जिन्होंने असमानता और सामाजिक अन्याय के उन्मूलन की वकालत की। इसके अनावरण समारोह में पीएम मोदी तेलंगाना के हैदराबाद शहर गए थे।

स्टेच्यू ऑफ इक्वलिटी

रामानुजाचार्य के जीवन के बारे में

रामानुजाचार्य का जन्म भारत के दक्षिणी राज्य तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में सन् 1017 को हुआ था। रामानुजनचार्य जी भारत की महान वैष्णव संत परंपरा से आतें हैं। यह भारत और पूरे विश्व में एक वैदिक दार्शनिक और समाज सुधारक के रूप में विख्यात हैं। इन्होंने हमेशा अपने श्रेष्ठ विचारों से भारत वर्ष में फैले जाति व्यवस्था , असमानता और धार्मिक दोषों को दूर करने का प्रयास किया। जिसके लिए उन्होंने पूरे भारत का भ्रमण किया और अपने समय के सभी राजाओं तथा साम्राज्यओ को समानता का पाठ पढ़ाया।

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रामानुजाचार्य ही वह संत हैं। जिन्होंने भक्ती आंदोलन में एक बार पुनः प्राण प्रतिष्ठा की और अपने महान उपदेशों से अन्य भक्ति विचारधाराओं को प्रेरित किया। इन्हीं के कारण भारत में अन्नामाचार्य, भक्त रामदास, त्यागराज, कबीर और मीराबाई जैसे महान भक्ति विचारधारा के कवियों ने जन्म लिया। 

स्टैच्यू ऑफ इक्वलिटी

स्टैच्यू ऑफ इक्वलिटी भारत के तेलंगाना राज्य मुचिन्तल हैदराबाद में स्थापित है। स्टैच्यू ऑफ इक्वलिटी की ऊंचाई 216 फीट है। जिसे महान भक्ती आंदोलन के संत श्रीरामानुजाचार्य जी की यादों में बनाया गया है। इसका नाम इक्वलिटी रामानुजाचार्य जी के सत कर्मों के कारण पड़ा है। इन्होंने हमेशा आस्था, जाति और पंथ सहित जीवन के सभी पहलुओं में समानता के विचार को बढ़ावा दिया। 

रामानुजाचार्य की मूर्ति को पांच लौह धातुओं से बनाया गया है। जिनमें सोना, चांदी, सिल्वर, कॉपर, पीतल और जिंक शामिल हैं। इसको दुनिया में सबसे लंबी मूर्तियों में से एक माना जाता है। 


इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि स्टैच्यू ऑफ इक्वलिटी को बनाने में सरकार का कोई योगदान नहीं रहा है। इसको चंदे के 1000 करोड़ के पैसों से बनाया गया है, जो रामानुजाचार्य के भक्तों से प्राप्त हुआ है। क्योंकि भारत और अमेरिका जैसे पश्चिमी देशों में फैले रामानुजाचार्य जी के भक्तों ने दिया है। 

रामानुजाचार्य के भक्त की परिकल्पना

स्टैच्यू ऑफ इक्वलिटी की परिकल्पना श्री रामानुजाचार्य आश्रम के श्री चिन्ना जीयर स्वामी ने की है।  उनके अधिकारिक बयान के अनुसार, स्टैच्यू ऑफ इक्वलिटी का उद्घाटन 12 दिवसीय श्री रामानुज सहस्रब्दी समारोह का एक हिस्सा है, इस समय श्री रामानुजाचार्य की 1000वा जयंती समारोह है।

यह स्टैच्यू ऑफ इक्वलिटी  क्यों कहीं जाती है?

रामानुजाचार्य ने समानता और सामाजिक न्याय की  बात कही है। जिन्होंने वंचित और सामाजिक न्याय सुनिश्चित किया। इसके अलावा "वसुधैव कुटुम्बकम" की अवधारणा को बड़े पैमाने पर फैलाया। जिसका हिंदी में मतलब "सारा ब्रह्मांड एक परिवार है" के रूप में होता है।

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