रक्षा क्षेत्र बजट 4.98 लाख करोड़ से बढ़कर 5.25 लाख करोड़ तक पहुंच गया, पाकिस्तान से 6 गुना अधिक भारतीय रक्षा बजट

भारत सरकार ने बजट में रक्षा क्षेत्र को 5.25 लाख करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं। चीन और पाकिस्तान के खतरों को देखते हुए। इसमें पीछले वर्ष की तुलना में 9.7% की वृद्धि हुई है। जबकि 2021 में भारत का रक्षा बजट 4.98 लाख करोड़ रुपए था।


इसमें सबसे खास बात यह है कि 1,52,369 करोड़ रुपए केवल पूंजीगत व्यय के लिए रखें गए हैं। जिनका इस्तेमाल भारतीय सेना, एयरफोर्स और नेवी को आधुनिक हथियारों से लैस करने के लिए हैं। इसी से नए लड़ाकू विमान, युद्धक जहाज और अन्य सैन्य सामान खरीद जायेगा। हालाकि 2021-2022 में पूंजीगत व्यय 1,35,060 करोड़ रुपए था। लेकिन कुल पूंजीगत खर्च 1,38,850 करोड़ दिखाया गया है।


रक्षा बजट का ज्यादा हिस्सा वेतन भुगतान, भत्तों और सैन्य प्रतिष्ठानों के रखरखाव पर चला जाता है। इस वित्त वर्ष 2022-2023 के लिए राजस्व व्यय 2,33,000 करोड़ आवंटित  किया गया है। इसके अलावा पेंशन के लिए 1,19,696 करोड़ रूपए अलग से आवंटित किए गए हैं।

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संसद में केंद्रीय बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि घरेलू रक्षा उपकरण निर्माताओं से पूंजी का 68% रक्षा खरीद की जायेगी। इसके अतिरिक्त 25% निजी कंपनियों, स्टार्ट-अप और अकादमिक के अनुसंधान और विकास  के लिए आरक्षित किया गया है। भारत सरकार ने मन बना लिया है कि भारत में भी विदेशों की तरह प्राइवेट रक्षा उत्पाद कंपनियां होनी चाहिए। इस 25% का काम आज से 4 वर्ष बाद दिखना शुरू होगा। तब भारत में बड़े पैमाने पर प्राइवेट रक्षा निर्माण कंपनियां मौजूद होगी।


भारत सरकार ने रक्षा ख़रीद का कुल 68% भारतीय कंपनियों से खरीद का वादा किया। जोकि भारतीय मेक इन इण्डिया मुहिम के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।

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इस रक्षा बजट की यह विशेषता भी है कि भारतीय रक्षा बजट पाकिस्तान से 6 गुना अधिक है। हालाकि चीन से हम काफ़ी दूर हैं। इसलिए भारत को अपना रक्षा बजट लगभग 100 बिलियन डॉलर तक ले जाना चाहिए। अभी यह मात्र 75 बिलियन डॉलर तक ही डोल रहा है।

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वित्त वर्ष 2022-23 में बॉर्डर रोड संगठन (BRO) का पूंजीगत बजट 40% बढ़ाकर 3,500 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जबकि वित्त वर्ष 2021-22 में 2,500 करोड़ रुपये ही था। यह महत्वपूर्ण सुरंगों (सेला और नेचिफू सुरंग) और प्रमुख नदी अंतराल पर पुलों सहित सीमावर्ती बुनियादी ढांचे के निर्माण की प्रगति में तेजी लाएगा। इन तथ्यों को खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताए हैं।


वित्त वर्ष 2022-2023 का केंद्रीय बजट 39.45 लाख करोड़ रुपए का था। जिसमें रक्षा क्षेत्र का हिस्सा 5.25 लाख करोड़ रुपए था। जोकि कुल केंद्रीय बजट का 13.31% था।

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