आर्यों के इतिहास की संपूर्ण जानकारी, भारत में ऋग्वैदिक काल 6000 वर्ष पुराना है। World Affairs in hindi करेंट अफेयर्स हिन्दी

भारत दुनिया के टॉप 10 बडे़ देशों में शामिल है, जो क्षेत्रफल और जनसंख्या के हिसाब से बहुत बड़ा भूभाग है। जिसमें 27 राज्य और 9 केद्र शासित प्रदेश शामिल हैं। हालाकि 2019 से पहले राज्यों की संख्या 28 और संघ शासित राज्यों की संख्या 7 हुआ करती थी। लेकिन 2019 में भारत सरकार ने जम्मू कश्मीर राज्य से राज्य का दर्ज़ा वापस ले लिया और उससे लद्दाक तथा जम्मू कश्मीर नाम से दो नए केंद्र शासित प्रदेशों की रचना की। 

भारत 


भारतीय राज्य गठन वर्ष
पंजाब 1 नवंबर 1966
हिमाचल प्रदेश 25 जनवरी 1971
उत्तराखंड 9 नवंबर 2000
उत्तर प्रदेश 26 जनवरी 1950
बिहार 1 अप्रैल 1936
झारखंड 15 नवंबर 2000
पश्चिम बंगाल 1 नवंबर 1956
छत्तीसगढ़1 नवंबर 2000
मध्य प्रदेश 1 नवंबर 1956
राजस्थान 1 नवंबर 1956
मध्य प्रदेश 1 नवंबर 1956
केरल 1 नवंबर 1956
गुजरात 1 मई 1960
महाराष्ट्र 1 मई 1960
ओडिशा 18 अप्रैल 1936
तमिलनाडु 26 जनवरी 1950
आंध्र प्रदेश 1 अक्टूबर 1953
गोवा 30 मई 1987
गुजरात 1 मई 1960
सिक्किम 16 मई 1975
त्रिपुरा 21 जनवरी 1972
असम 15 अगस्त 1947
मणिपुर 21 जनवरी 1972
अरुणाचल प्रदेश 20 फरबरी 1987
मिज़ोरम 20 फरबरी 1987
नागालैंड 1 दिसंबर 1963
मेघालय 20 जनवरी 1972
विद्वान निवास स्थल
बाल गंगा धर तिलक आर्कटिक प्रदेश (उत्तरी ध्रुव )
स्वामी दयानन्द सरस्बती तिब्बत
डॉ अविनाश चंद्र सप्त सैंधव क्षेत्र
मैक्स मूलर मध्य एशिया (बैक्ट्रिया )
बिलियम जोंस यूरोप
बेन्डेनिस्टन दक्षिणी रूस
पेन्का व हर्ट जर्मनी के मैदानी भागो से
प. गंगानाथ ब्रह्मर्षि देश

ऋग्वैदिक काल के पुरातात्विक स्रोत

बोगाजकोई अभिलेख

•यह अभिलेख 1400 ईसा पूर्व  का है, जिसमें हित्ती राजा सुब्विलिम्मा और मितन्नी राजा मतिउअजा के मध्य एक संधि का उल्लेख मिलता है। इसमें मुख्य वैदिक देवताओं इंद्र, वरुण, मित्र और नासत्या का उल्लेख है।

कस्साइट अभिलेख

•इसमें ईरान से आने वाली एक आर्यों की शाखा का उल्लेख मिलता है। जो 1600 ईसा पूर्व में भारत आईं थीं।

ऋग्वेद

•ऋग्वेद इस काल का प्रथम साहित्यिक स्रोत है। जिसको हम एक संहिता कहते हैं। इसमें कुल 10 मंडल और 1028 सूक्त हैं।

ऋग्वेद के कुल 3 पाठ हैं।

1. साकल -1017 2. बालखिल्य -11 मंत्र 3. वाष्कल -56 मंत्र 

विद्वान ऋग्वेद की रचना तिथि
बाल गंगा धर तिलक 6000 ई. पू.
मैक्स मूलर 1200 से 1000 ई. पू.
जैकोबी 3000 ई. पू.
मान्य समय 1500 से 1000 ई. पू.
विन्टर नित्स 2500 से २००० ई. पू.

• ऋग्वेद के 2 से  7 तक के मंडल प्राचीन मंडल हैं, इनमे 1।और 10 अंत में जोड़ें गए थे।

• ऋग्वेद के मंत्रों का जाप करने वाला होत्त् कहलाता था।

• ऋग्वेद के चौथे मंडल की रचना 3 राजाओं द्वारा की गई है। जिनमें त्रसदस्यु अजमीढ़ और पुरमीढ़ हैं।

• इस वेद का नौवां मंडल देवता सोम को अर्पित है। इसलिए इसे सोममंडल भी कहा जाता है।

• दसवां मंडल नया मंडल था, जिसको अंत में जोड़ा गया था। इसी के पुरुष सूक्त में चतुर्वर्ण व्यवस्था की सूचना मिलती है। 10वे मंडल में ही देवी सूक्त का भी उल्लेख है, इसमें वाक शक्ति की पूजा की गई है।

• सरस्वती ऋग्वैदिक काल की सबसे पूजनीय नदी थी। इन्हें नदीतमा (नदियों में श्रेष्ठ) कहा जाता था। 

• इस वेद में यमुना (3 बार) और गंगा (1 बार) का भी उल्लेख है।

• ऋग्वेद में अफ़ग़ानिस्तान की कुर्रम और कुभा नदी के बारे में जानकारी मिलती है। इसके अलावा सिंधु और उसकी 5 सहायक नदियों का भी उल्लेख मिलता है।

शब्दउल्लेख
पिता 335 बार
जन 275
इंद्रा 250
माता 234
अश्व 215
अग्नि 200
गौ (गाय) 176
विश 170
सोमदेवता 144
विष्णु 100
रूद्र 3
पृथवी 1
राजा 1
गंगा 1
शूद्र 1
राष्ट्र 10

ऋग्वैदिक नदियों के प्राचीन नाम

प्राचीन नाम आधुनिक नाम
वितस्ता झेलम
परूष्णी रावी
विपाशा व्यास
कुरुमु कुर्रम
कुभा काबुल
सदानीरा गंडक
अस्किनी चिनाब
शतुद्री सतलुज
गोमल गौमती
सिंधु सिंध
सरस्वती घग्घर
सुषोमा सोहन

भारत में आर्य

• कुछ पश्चिमी विद्वानों का मानना है कि भारत में आर्य लोगों का आगमन 1400 ईसा पूर्व हुआ है। लेकिन बहुत सारे भारतीय विद्वान इन्हें भारत का निवासी ही मानते हैं

• आर्य  शब्द एक जाति को इंगित करता है। क्योंकि यह वास्तव में एक श्रेष्ठ नस्ल की जाति थी।

• आर्य शब्द को प्राचीन संस्कृत भाषा से आया है, जिसका अर्थ  उत्तम, श्रेष्ठ या उच्च कुल से उत्पन्न होने वाले से है।

• प्रारभिक आर्य लोग पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और भारत के पंजाब,  हरियाणा राज्य में रहते थे।


सामाजिक व्यवस्था

परिवार

•समाज का आधार परिवार था, ऋगवेदिक समाज में परिवार को गृह के नाम से जाना जाता था।

•समाज पितृ सत्तात्मक था, इसलिए परिवार में पिता मुखिया के रोल में होता था। कई पीढ़ियां एक साथ रहा करती थी।

•ऋगवेदिक काल में व्यक्ती की पहचान कुल या गोत्र से होती थीं। इसलिए लोगों की आस्था अपने कबीले के प्रति रहती थी। जिसको जन के नाम से जाना जाता था।

•ऋग्वेद में जन शब्द का 275 बार उल्लेख हुआ है। हालाकि जनपद शब्द का कहीं उल्लेख नहीं हुआ है।

•विश ऋग्वेद का दूसरा प्रमुख शब्द रहा है, इसका ऋग्वेद में 170 बार उल्लेख है।

•ऋगवेदिक काल महिलाएं सभा और समितियों में हिस्सा ले सकती थी और पतियों के साथ हवन में बैठती थी।

•ऋग्वेद की ज्यादातर सूक्त मौखिक रूप से लिखी गई हैं। क्योंकि इस काल का कोई लेख नहीं मिला है।

•ऋग्वेद में विधवा विवाह और नियोग प्रथा का उल्लेख है। लेकिन बाल विवाह का कोई प्रमाण नहीं मिला।

सामाजिक वर्गीकरण

•ऋग्वेद में वर्ण शब्द का उल्लेख रंग को लेकर हुआ था, जिससे विद्वानों को प्रतीत होता है कि आर्य भाषा भाषी गौर वर्ण से संबंधित थे और मूलनिवासी काले रंग से।

•ऋग्वेद में आर्य वर्ण और दास दो वर्णों का उल्लेख मिलता है। लेकिन कुछ समय बाद काबिलियाई आर्य तीन प्रमुख वर्गों में बंट गए।

योद्धा

पुरोहित

सामान्य लोग

•चौथा और आखिरी वर्ण शुद्र कहलाता था। इस वर्ण का उल्लेख दसवें मंडल में मिलता है।

•ऋगवेदिक काल में समाज कर्म के आधार पर विभाजित था, न कि जाति के आधार पर।

•आप इस बात को इस तरह से समझ सकते हैं कि एक परिवार में पिता कवि, बेटा वैद्य और माता ग्रहणी। अलग अलग व्यवसाय के लोग साथ साथ रहा करते थे।

•जीवन भर अविवाहित रहनी वाली महिलाओं को अमाजू कहा जाता था।

आर्थिक जीवन

•आर्य लोग पशुचारक और पशुचारण उनका प्राथमिक व्यवसाय था। कृषि उनका दूसरा मुख्य व्यवसाय था।

•ऋग्वेद में गाय मुद्रा की तरह थी। आर्यों के लिए गाय सर्वोत्तम धन था। 

•ऋग्वेद में गविष्टी शब्द का उल्लेख है।

•इस काल में घोड़ा एक बेहद उपयोगी पशु बन चुका था। दूसरे पशुओं में हाथी, ऊंट, बैल, भेड़ और  बकरी थे।

• ऋग्वेद में बढ़ई, रथकार , बुनकर, कुम्हार और चर्मकार का उल्लेख है।

• आर्य लोग ताबें या कांसे की धातु से परिचित थे। जिसको अयस कहा जाता था। 

राजनीतिक व्यवस्था

•ऋगवेदिक काल में समाज कबिलाई था। संपूर्ण कबीले को विश कहा जाता था और कबीले का प्रमुख राजन कहलाता था। इस काल में राजा का पद अनुवांशिक हो गया था। 

•इस समय भी राजा स्वतंत्र नहीं होता था, उसे अपने कबीले से विचार विमर्श करना पड़ता था।

•ऋगवेदिक काल के परिवारों के समूह को ग्राम और ग्राम के मुखिया को ग्रामणी कहा जाता था।

•परिवार समाज से सबसे छोटी इकाई था।

•कबीले की  आम सभा को समिति कहा जाता था, जो अपने राजा को नियुक्त करती थी। 

•ऋगवेदिक काल की महिलाएं सभा और विदथ में भाग ले सकती थी।

•ऋग्वेद में सभा शब्द का 8 बार प्रयोग किया गया है। सभा के पुरूष लोगों को सभेय और स्त्री सदस्यों को सभावती कहा जाता था।

•ऋग्वेद समिति का 9 बार उल्लेख मिलता है। अर्थवेद में सभा और समिति को प्रजापति की पुत्रियां कहा गया। समिति में भी महिलाए भी प्रवेश कर सकती थी।

धार्मिक जीवन

•ऋग्वेद काल में इंद्र एक प्रमुख देवता थे, इनको पुरंदर कहा गया है, जिसका अर्थ होता है कि किले को तोड़ने वाला।

•ऋग्वेद में इंद्र पर 250 सूक्त हैं। इन्हें वर्षा का देवता माना जाता है।

•ऋग्वेद में अग्नि देवता दूसरे स्थान पर हैं। इन पर ऋगवेद में 200 सूक्त हैं।

•वरुण ऋग्वेद के तीसरे प्रमुख देवता हैं, जिन्हें  जल या समुद्र का देवता माना जाता है। 

•देवता सोम को वनस्पतियों का अधिपति माना गया। इन्हीं पर देवताओं के प्रिय पेय पदार्थ सोमरस का नाम पड़ा।

•ऋग्वेद में भगवान रुद्र (शिव) को त्रयंबक कहा गया है।

•हर कबीले का अपना एक अलग देवता होता था।

•पुषन ऋगवेदिक काल में पशुओं के देवता हुआ करते थे, लेकिन उत्तर वैदिक काल में यह शूद्रो के देवता बन गए।

•पृथ्वी को जगतमाता कहा जाता था।

ऋग्वैदिक देवता कार्य क्षेत्र
विष्णु विश्व के संरक्षक और पालनकर्ता
वरुण जल के देवता
सूर्य तेज के देवता अश्विन दुर्भाग्य और रोग को दूर करने वाले देवता
ऊषा प्रगति व उत्थान की देवी
सविता अमरतत्व का देवता
मित्र प्रकाश का देवता
अदिति सार्वभौम भावना की देवी
अग्नि आग के देवता
पृथ्वी सृजन देवी
बृहस्पति यज्ञ के देवता
सोम वनस्पति के देवता
सरस्वती विद्या की देवी
इंद्रा युद्ध के देवता , देवताओ के राजा, वर्षा के देवता
मारुत तूफ़ान के देवता
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भारतीय संघ शासित राज्य गठन वर्ष
दिल्ली 1965
जम्मू कश्मीर 2019
लद्दाख 2019
दमन और दीव 23 मई अगस्त 1987
दादर नगर हवेली 11 अगस्त 1961
पुदुचेरी 1 नवंबर 1954
अंडमान निकोबार द्वीप समूह 1 नवंबर 1956
लक्ष्यदीप 1956
चंडीगढ़ 1 नवंबर 1966

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