रशिया लंबे खींचते यूक्रेन युद्ध से हताश हो गया। युद्ध क्यों और किस कारण से शुरू हुआ

रूस ने 24 फरबरी को पूरे यूक्रेन पर कब्ज़ा और शासन बदलाव के उद्देश्य से आक्रमण किया था। आक्रामण के समय रूस ने सोचा होगा कि हम वर्तमान यूक्रेनियन राष्ट्रपति जेलेंस्की को 24 घंटो में हरा देगे। लेकिन यह युद्ध 27 फरबरी तक खींच आया है।

युक्रेन युद्ध में विनाश

यूक्रेन युद्ध का लंबा खिंचने का कारण वहां के राष्ट्रपति का दिलेर व्यवहार और वहां की आम जनता के अंदर देश के लिए प्यार है। आज यूक्रेन का 18 वर्ष युवा से 59 साल का आदमी जंग लड़ने के लिए तैयार है और यूक्रेनियन लोगों के अंदर यह ताकत उनके राष्ट्रपति के कारण आई है। जिन्होंने अमेरिका के यूक्रेन से बाहर निकालने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और वहीं रुककर अपने देश की रक्षा करने का वचन लिया। उन्होंने अमेरिका और सभी पश्चिमी देशों से हथियार मुहैया कराने को कहा। 

यूक्रेन के राष्ट्रपति के इस ऐलान से पश्चिमी देशों में भी हिम्मत आई और उन्होंने ताबड़तोड़ यूक्रेन को हथियार सप्लाई करने का निर्णय लिया। जो जर्मनी कभी यूक्रेन को हथियार सप्लाई करने को तैयार नहीं था। उसने यूक्रेन रॉकेट लॉन्चर देने का ऐलान किया। इसी के साथ आर्थिक मदद भी देने को कहा।

राष्ट्रपति पुतिन और रूसी आर्मी की हताश

जैसे जैसे यूक्रेन युद्ध लंबा खिंच रहा है। वैसे वैसे रूस की परेशानियां दुगनी होती जा रही हैं। क्योंकि रूस को एक दिन के युद्ध का खर्चा 20 करोड़ डॉलर पड़ रहा है। इससे रूस की आर्थिक हालत गंभीर होती जायेगी।

 दूसरी तरफ अमेरिका और पश्चिमी देशों का उद्देश्य सफल होता जा रहा है। क्योंकि वे सभी चाहते हैं कि यूक्रेन युद्ध लंबा चले। ताकि रूस को अर्थव्यवस्था बर्बाद हो जाए। 

इसके अलावा पश्चिमी देशों को यूक्रेन आक्रमण से रूस पर कठोर आर्थिक प्रतिबंध लगाने का बहाना मिल गया है। जिससे वे पुतिन को घरेलू स्तर पर फंसा देना चाहते हैं। ताकि कुछ महीनों बाद पश्चिमी देशों के आर्थिक प्रतिबंध अपना प्रभाव दिखाएंगे। तो रूस की आम जनता परेशान होगी और वह पुतिन के ख़िलाफ़ सड़को पर उतर आयेगी।

यूक्रेन युद्ध लंबा खिंच रहा

यूक्रेन पर पुतिन की सेना ने आर्मी क्षेत्रों के अलावा आम लोगों के घरों को भी निशाना बनाया है। जिससे यूक्रेन में रूस के खिलाफ़ लोगों में बहुत ज्यादा नाराजगी की है और वे सब अब रशियन सेना के खिलाफ़ हथियार उठा रहें हैं। इसमें यूक्रेन का मकसद साफ़ दिख रहा है कि हम तो डूबे ही सनम तुमको को भी ले डूबेगै और यह होते भी दिख रहा है। क्योंकि यूक्रेन में जैसे ही रूसी सेना शहरों में घुसती है। उस पर हमले होने लगते हैं। यहीं कारण है कि युद्ध लंबा खिंच रहा है। जबकि रूस ने बहुत मात्रा में मिसाइल और हवाई हमले किए हैं।

हालाकि देश पर कब्ज़ा करना है तो हवाई हमलों से ज्यादा कुछ नहीं होने वाला है। रशियन सेना को जमीन पर लड़ना होगा और यूक्रेनियन तो इसी समय के लिए तैयार बैठे हैं कि कब रूसी सेना शहरों में घुसती है। ताकि यूक्रेन की आर्मी और लोग गोरिल्ला युद्ध कर सकें। इसी गोरिल्ला युद्ध के कारण अमेरिका और सोवियत संघ को अफगानिस्तान छोड़ना पड़ा था। 

एक बात साफ़ नज़र आ रही है कि रूस अमेरीका और पश्चिमी देशों की चाल में फंस गया है। अब युद्ध में तो नहीं कूदे हैं। लेकिन यूक्रेन को हथियार सप्लाई कर रहे है। दूसरी तरफ आर्थिक प्रतिबंधो का रूस के खिलाफ़ जाल भी बिछा रहें हैं। 

अमेरीकी नाटो विस्तार से रूस को खतरा लगा

किंतू अगर रूस को देखा जाए। तो वह अपने स्थान पर ठीक है। क्योंकि अमेरिका और नाटो ने सोवियत संघ के हिस्सा रहे देशों को बड़ी चालाकी से नाटो में शामिल करा रहें हैं। नाटो को सदस्य देशों की संख्या 12 से 30 तक पहुंच चुकी है। उनका साफ उद्देश्य है कि किसी भी तरह रशिया की सीमाओं तक पहुंच बनाना है। ताकि अमेरिकी मिसाइल रूस की सीमाओं तक पहुंच जाए। अमेरिका भी नाटो का विस्तार करने पर तुला था। ताकि वे रूस पर ज्यादा दबाव डाल सकें।

रूस अमेरिका से कह रहा है कि यूएस को कैसा लगेगा। जब रूस यूएस के पड़ोसी देश कनाडा में अपनी मिसाइल तैनात कर दे। इसमें यूक्रेन की सरकार की भी गलती थी। उसे भारत सरकार की भांति निष्पक्ष रहना था। ताकि रुस को सुरक्षा खतरा यूक्रेन से महसूस न होता। 

किंतू रूस ने यूक्रेन में युद्ध का विकल्प चुना है। जोकि बेहद गलत है। खासकर इस युद्ध में अब आम जनता मारी जा रही है। जाबकी यह युद्ध जरूरी नहीं था। रूस ने बेवजह इस युद्ध की शुरूआत की है। अब रूस यूक्रेन में घूस गया है। किंतू अब वहां से निकलना रूस के लिए बहुत ही मुश्किल होने वाला है।

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