जोए बाइडेन की अक्षमता के कारण यूक्रेन फंस गया, नाटो ने यूक्रेन के लिए लड़ने से इंकार किया

जोए बाइडेन के नेतृत्व में अमेरिका अफ़ग़ानिस्तान से अपनी इज्जत का चूरमा बनवा के निकला। जहां पुरा अफ़ग़ानिस्तान तालिबान को पकड़ा दिया। अब इसी तरह जोए बाइडेन यूक्रेन को रशिया के हवाले कर रहे हैं। क्योंकि आज उन्हीं के बड़बोले पन के कारण यूक्रेन फंस गया है। 


अमेरिका द्वारा युद्ध जैसे हालात पेश करना

अमेरीका ने पहले हालात ऐसे बनाएं थे कि मानो नाटो यूक्रेन की रक्षा के लिए हमेशा तैयार खड़ा रहेगा। इसके अलावा जोए बाइडेन और उनके विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकेन  के कुछ बयान ऐसे हैं। जिससे साबित हो रहा है कि अमेरीका ने यूक्रेन को रूस के विरुद्ध उकसाया है। जिसमें यूक्रेन को नाटो का सद्स्य देश भी बनाने की बातें हों रहीं थीं।  यूक्रेन नाटो सैन्य संगठन का एक सद्स्य बने। ये बात रूस को बिल्कुल पसंद नहीं थीं। क्योंकि यूक्रेन के नाटो का सद्स्य बनते ही सभी पश्चिमी देश रूस की सीमाओं तक पहुंच जायेंगे। जिससे रूस की सुरक्षा को खतरा हो सकता था। 

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अपनी इन्हीं सुरक्षा बातों को मनमाने के लिए पुतिन ने यूक्रेन की घेरा बंदी शुरू की। लेकिन अमेरिका ने रूस की सुरक्षा चिंताओं पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया। यहां तक यूक्रेन को नाटो का सद्स्य नहीं बनाने पर भी जबाव दिया। इसके बदले में अमेरिका ने यह कह दिया। कि नाटो अपनी खुली सदस्यता जारी रखेगा और इसमें कोई भी देश शामिल हो सकता था

यूरोप रूस से भिड़ने को तैयार नहीं

यूरोपीय देश रूस से सीधे तौर पर भिड़ने को तैयार नहीं हैं। क्योंकि अमेरिका रुस से काफ़ी दूर स्थित है और यूरोपीय देश उससे बेहद नजदीक स्थित हैं। यदि नाटो देश रूस से यूक्रेन मुददे पर युद्ध लड़ते हैं। तो रूस सीधे तौर पर उनको पहले निशाना बनायेगा और युद्ध पूरे यूरोप में फैल जायेगा। 

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इसके अलावा जर्मनी और दूसरे यूरोपीय देश ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस पर निर्भर हैं। क्योंकि 46% गैस सीधे रूस से आती है और यदि यूरोपीय देश रूस के खिलाफ़ युद्ध लड़ते हैं। तो रूस सबसे पहले गैस निर्यात को बंद कर देगा। जिससे यूरोप में ऊर्जा संकट खड़ा हो जायेगा।

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इन्हीं सब कारणों से आज नाटो ने एक बयान जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि कोई भी नाटो सद्स्य देश की सेनाएं यूक्रेन में तैनात नहीं की जायेगी। जर्मनी और ब्रिटेन भी अपनी सेनाएं यूक्रेन में नहीं भेजने वाले है। 

अमेरीका नाटो में अलग थलग पड़ा

जिस तरह से नाटो ने यूक्रेन के लिए लड़ने से इंकार किया है। इस बात से एक बार फिर जोए बाइडेन के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे हैं। अमेरीका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जोए बाइडेन अपनी अक्षमता के कारण अमेरीका को खतरे में डाल रहें हैं। उन्होंने आगे कहा कि यदि मैं अमेरिका का राष्ट्रपति होता तो रूस ऐसा कुछ नहीं कर पाता।

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अब अगर रूस यूक्रेन को अपने कब्जे ले लेता है। तो इससे यह संदेश जायेगा कि अमेरिका अपने सहयोगियों के लिए कुछ नहीं कर सकता है। जिसका सीधा असर चीन से परेशान देशों पर पड़ेगा। क्योंकि उन्हें लगेगा कि अमेरिका उनकी चीन से सहायता करने नहीं आने वाला है। जिसमें ताईवान प्रमुख है। क्योंकि अमेरिका यूक्रेन की तरह ताईवान को भी आश्वासन दे चुका है कि यदि चीन उस पर हमला करता है। तो वह उसकी सुरक्षा करेगा। 


लेकिन अगर अमेरिका ने रूस के हमले पर जवाब दिया तो उसकी खोई हुई इज़्ज़त वापस आ जायेगी। लेकिन यह सब निकट भविष्य व रूस पर निर्भर करता है। 

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