भारत ने यूएन में यूएस निंदा प्रस्ताव से दूरी बनाई, भारत ने यूक्रेन की संप्रभुता को लेकर रूस को चेताया

आज 26 फरबरी को अमेरिका ने यूएनएससी में यूक्रेन पर रूसी हमले के खिलाफ़ निंदा प्रस्ताव पेश किया था। भारत ने यूएनएससी में रूस के खिलाफ़ निंदा प्रस्ताव से दूरी बनाई रखी।

यूएन में भारतीय राजदूत टीएस तिरमूर्ति

भारत के साथ चीन और संयुक्त अरब अमीरात समेत 3 देशों ने निंदा प्रस्ताव से दूरी बनाई। इसके अलावा 11 देशों ने निंदा प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया और रूस ने प्रस्ताव पर अपनी वीटो शक्ति का उपयोग किया और अमेरिकी निंदा प्रस्ताव को गिरा दिया।

भारत का यूएन में पक्ष

भारत के यूएन में स्थाई दूत टीएस तिरमूर्ति साहब ने कहा कि यूक्रेन में हाल के घटनाक्रम से भारत बहुत परेशान है।  हम आग्रह करते हैं कि हिंसा और शत्रुता को तत्काल समाप्त करने के लिए सभी प्रयास किए जाएं।  


• मानव जीवन की कीमत पर कोई समाधान कभी नहीं निकाला जा सकता है।  

• हम यूक्रेन में बड़ी संख्या में भारतीय छात्रों सहित भारतीय समुदाय के कल्याण और सुरक्षा को लेकर भी बहुत चिंतित हैं। 

 • समसामयिक वैश्विक व्यवस्था संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतर्राष्ट्रीय कानून और राज्यों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर आधारित है।  

 • सभी सदस्य देशों को रचनात्मक तरीके से आगे बढ़ने के लिए इन सिद्धांतों का सम्मान करने की आवश्यकता है।

 • मतभेदों और विवादों को सुलझाने के लिए संवाद ही एकमात्र उत्तर है, चाहे वह इस समय कितना भी कठिन क्यों न हो।  

 •  यह खेद की बात है कि कूटनीति का रास्ता छोड़ दिया गया।  हमें उस पर लौटना होगा।  

 • इन सभी कारणों से, भारत ने इस प्रस्ताव से परहेज करना चुना है।

यूएन में भारतीय दूत त्रिमूर्ति ने कहा कि भारत सभी पक्षों के संपर्क में रहा है और सभी पक्षों से बातचीत की मेज पर आने को आग्रह किया।  प्रस्ताव पर भारत ने अपनी सुसंगत, दृढ़ और संतुलित स्थिति बनाए रखी।

रूस को आगाह किया

भारत ने पिछली बार की तरह रूस का पक्ष नहीं लिया। क्योंकि पिछली बार भारत ने वैध सुरक्षा का उल्लेख किया था। लेकिन इस बार भारत ने ऐसा नहीं किया। भारत ने यूएनएससी में सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय कानून, दुसरे देशों की संप्रभुता और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का सम्मान करने को कहा। भारत ने रूस से यूक्रेन पर हमले रोकने के लिए कहा। भारत ने पश्चिमी देशों के दबाव में रूस के खिलाफ़ बयान दिया। क्योंकि रूस ने सीधे तौर पर एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र पर हमला किया है।

भारत चीन एक रास्ते पर

यूक्रेन रूस युद्ध पर  भारत और चीन एक ही रास्ते पर हैं। दोनों देशों ने यूएस के निंदा प्रस्ताव से यूएनएससी में दूरी बनाई रखी है। इससे साफ हो रहा है कि भारत कभी भी रूस के खिलाफ़ नही जानें वाला है। क्योंकि भारत के 70% रक्षा उत्पाद रूस से आए हैं। 

दूसरी बात यह भी है कि पश्चिमी देशों ने चीन के खिलाफ़ भारत का खुलकर साथ नहीं दिया था। अमेरीक भारत को मानवाधिकारों और लोकतन्त्र पर पाठ पढ़ाता रहता है। यहीं कारण है कि भारत सिर्फ अपने राष्ट्रीय महत्त्व देख रहा है और वह सिर्फ़ भारत की साइड चुन रहा है। भारत किसी भी देश के साथ युद्ध के मसले पर साथ नहीं खड़ा है।

रूसी वीटो पर यूएन चीफ और यूएस 

यूएन चीफ और यूएस ने अमेरिका के निंदा प्रस्ताव पर रूस के वीटो करने पर कहा कि रूस दुनिया की बेइज्जती कर रहा है। अमेरिका और पश्चिमी देश रूस के खिलाफ़ एक जुट हो रहें हैं। वे रशिया और पुतिन पर कठोर आर्थिक प्रतिबंध लगाने की बात कर रहे हैं।

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