इंग्लैंड ने चाइना को ब्रिटिश परिवार से दूर रहने की चेतावनी दी, कहा फोकलैंड से दूर रहे चीन

इंग्लैंड ने चाइना को ब्रिटिश परिवार से दूर रहने की चेतावनी दी। जिसका कारण दक्षिणी अमेरिकी देश अर्जेंटिना है और इसी देश के पास फोकलैंड नाम से एक द्वीपों का समूह है। इन्हीं फोकलैंड द्वीपों की वजह से अर्जेंटिना और ब्रिटेन की लड़ाई चल रही है। जबकि वर्तमान में यह एक ब्रिटिश विदेशी क्षेत्र है और इसका प्रशासन भी ब्रिटिश सरकार के अंतर्गत चलता है। 

अर्जेंटीना और चीन

दूसरी तरफ अर्जेंटिना इन द्वीपों पर अपना दावा जताता है और वास्तव में यह कभी अर्जेंटिना के हिस्से रहें हैं। ब्रिटेन ने 1883 से फोकलैंड द्वीपों पर अपना कब्ज़ा कर रखा है। हालाकि अप्रैल जून 1982 में अर्जेंटिना ने एक युद्ध के माध्यम से द्वीपों पर कब्ज़ा भी कर लिया था। लेकिन 2अप्रैल 1982 में ही ब्रिटेन ने अपनी नेवी और सेना को भेज कर वहां एक बार पुनः कब्ज़ा कर लिया। तभी से अब तक फोकलैंड द्वीपों पर ब्रिटेन कब्ज़ा है। इस ऑपरेशन का कोड नेम रोसारियो (Rosario) था।

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दक्षिण अमेरिकी देश ब्राज़ील, पेरू, चिली और दूसरे देश भी फोकलैंड द्वीपों  को अर्जेंटिना का ही हिस्सा मानते हैं और वे चाहतें हैं कि ब्रिटेन भी इन द्वीपों को अर्जेंटिना को वापस कर दें। जबकि ब्रिटेन कहता है कि यहां रहने वाले लोगों ने ब्रिटेन के पक्ष में वोट दिया है। हां ब्रिटेन ने यहां 2013 में एक  जनमत संग्रह भी कराया है। जहां 1518 लोगों ने ब्रिटेन के साथ रहने के लिए अपना वोट दिया है। किंतू अर्जेंटिना ब्रिटेन के 2013 के जनमत संग्रह को नहीं मानता है। उसका कहना है कि जनमत संग्रह संयुक्त राष्ट्र संघ के दिशा निर्देश पर हों। 

3जनमत संग्रह
प्रतिक्रियावोट%
हां 151399.80%
ना30.20%
वैध वोट151699.87%
अमान्य वोट20.13%
कुल वोट1518100.00%
पंजीकृत मतदाता165092.00%


अब इसी ब्रिटेन और अर्जेंटिना का फायदा चीन उठा रहा है। इस माह फरबरी 2022 में  बीजिंग में शीतकालीन ओलंपिक खेल चल रहे हैं। इसका प्रयोग चीन ने अपने राजनीतिक लक्ष्य को हासिल करने में कर रहा है। रूस और पाकिस्तान के साथ कुल 32 देशों के प्रमूख बीजिंग ओलंपिक में शामिल हो रहें हैं। इन्हीं में अर्जेंटिना भी शामिल है। 

अभी हाल में अर्जेंटिना ने बुनियादी ढांचे के विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से 44.5 बिलियन डॉलर का कर्ज लिया है। किंतू तब भी यह अर्जेंटिना के लिए कम पड़ रहा है। अब वह चाहता है कि चीन अपने सिल्क रोड़ परियोजना के तहत् कर्ज़ दे। 

क्योंकि अमेरीकी सहित सभी पश्चिमी देशों ने बीजिंग ओलंपिक का डिप्लोमेटिक तरीके से बहिष्कार किया है। ब्रिटेन और अमेरिका ने उइगुर मुस्लिमों के उत्पीड़न के मामले पर चीन को घेरा है। इसी जबाव चीन फोकलैंड द्वीपों के माध्यम से दे रहा है। जिसमें चीन और रूस मिलकर अर्जेंटिना पक्ष ले रहें हैं। जबकि इससे यह भी साफ़ हों रहा है कि चीन अपने सभी कुकर्मों को मानने को तैयार नहीं है। वह किसी भी अंतरराष्ट्रीय कानून को नहीं मानता है। जिस तरह वह दक्षिण चीन सागर में दूसरे देशों के अधिकार को अपनी शक्ति के दम पर इजदबा रहा है। जिससे साबित हो रहा है कि दुनिया को जल्द एक बड़े संघर्ष के लिए तैयार रहना होगा।

इस पर ब्रिटेन की विदेश मंत्री का कहना है कि हम फ़ॉकलैंड की संप्रभुता पर किसी भी प्रश्न को पूरी तरह से अस्वीकार करते हैं।  फ़ॉकलैंड ब्रिटिश परिवार का हिस्सा हैं और हम उनके आत्मनिर्णय के अधिकार की रक्षा करेंगे।  चीन को फ़ॉकलैंड की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए।



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