चीन ओलिंपिक खेलों को सैन्य सैन्यीकरण कर रहा, गलवांन में घायल चीनी सैनिक को ओलंपिक मशाल वाहक बनाया

आज तक दुनिया के किसी भी देश ने ओलिंपिक खेलों का सैन्यीकरण नहीं किया है। लेकिन चीन बीजिंग विंटर ओलंपिक का अपने फायदे के लिए सैन्यीकरण कर रहा है।  


चीन ने 2022 के बीजिंग विंटर ओलंपिक में गलवाँन घाटी में घायल चीनी सैनिक को ओलंपिक मशाल वाहक बनाया। यह चीन के  युद्ध का एक दूसरा रूप है, जिसे हम मनोवैज्ञानिक युद्ध के रूप में जानते हैं। 

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15 जून 2020 की शाम को, भारत और चीन लद्दाख की गलवान घाटी में आमने-सामने हो गए थे, जो पिछले 40 वर्षों में सबसे घातक झड़प माना जाता है। इस झड़प में एक पैदल सेना बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर सहित बीस भारतीय सैनिकों की जान चली गई थी। दूसरी तरफ चीन के 38 से ज्यादा सैनिक गलवांन घाटी की झड़प में मारे गए थे। लेकिन चीन ने सिर्फ अपने 4 सैनिकों की मौत को कबूला था। जबकि ऑस्ट्रेलिया की मीडिया ने गलवांन घाटी की झड़प एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की थी। जिसमें उन्होंने दावा किया था कि चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी के 38 से ज्यादा सैनिक झड़प में मारे गए थे।


चीन की मंशा दूसरे देशों को उकसाने की रहीं है। तभी तो वह गलवांन घाटी में घायल कर्नल क्यूई फैबाओ को ओलिंपिक मशाल वाहक बना रहा है। कर्नल क्यूई फैबाओ पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) शिनजियांग सैन्य कमान के रेजिमेंटल कमांडर रह चुके हैं। यह भी 15 जून, 2020 को गलवांन घाटी के झड़प में शामिल थे। झड़प के समय इनके सिर पर गम्भीर चोट लगी थी। जोकि इनके सिर के निशानों से देखी जा सकती है।

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कर्नल क्यूई ने चीन के चार बार के ओलंपिक शॉर्ट ट्रैक स्पीड स्केटिंग चैंपियन वांग मेंग से बुधवार को शीतकालीन ओलिंपिक की लौ ली। भारत को भी चीन के शीतकालीन ओलंपिक खेलों के राजनयिक बहिष्कार के बारे में एक बार जरूर सोचना चाहिए। जिसका कारण चीन द्वारा ओलंपिक खेलों का सैन्यीकरण हो सकता है। जबकि अमेरीका और पश्चिमी देशों ने बीजिंग ओलंपिक का डिप्लोमेटिक माध्यम से बहिष्कार किया है। 


इस बार शीतकालीन ओलंपिक खेलों के लिए लगभग 1,200 और पैरालंपिक खेलों के लिए लगभग 600 ओलंपिक मशालवाहक हैं, जिनमें सबसे ज्यादा उम्र का माशलबाहक 86 वर्ष का है और सबसे छोटा 14 वर्ष का है। यह सभी माशलबाहक चीन के विभिन्न हिस्सों और क्षेत्रों में मशाल लेकर जाएंगे। यहीं कारण है कि चीन ने कर्नल क्यूई फैबाओ को ओलंपिक मशालवाहक बनाया है। ताकि उसे चीन में एक हीरो के रुप में दिखाया जा सकें।


बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक की थीम "आइए हम बर्फ और बर्फ के मिलन पर मिलते हैं; आइए हम एक साझा, उज्जवल भविष्य की ओर दौड़ें" हैं।  शीतकालीन ओलंपिक मशाल रिले को 2 से 4 फरवरी तक तीन प्रतियोगिता क्षेत्रों में आयोजित किया जाएगा।

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