कश्मीरी पंडित टिका लाल टपलू को 19 जनवरी 1990 के नरसंहार से पहले मारा गया। यहीं से कश्मीरी आतंकियों की लहर उठी और कश्मीरी पंडितों का नरसंहार और पलायन हुआ

टीका लाल टपलू कश्मीर घाटी में भारतीय जनता पार्टी के एक विख्यात नेता थे। जो कश्मीर में दोनों समुदायों के बीच खूब पसंद किए जाते थे। टीका लाल हिंदुस्तान से बेहद प्यार किया करते थे, यहां तक उन्होंने राममंदिर के लिए धन मुहैया कराया था। उनकी यहीं गुण भारी पड़े और वह 14 सितंबर 1989 को इस्लामिक कश्मीरी आतंकवादियों की गोलियों का शिकार हो गए। 

टीका लाल टपलू और उनकी दुखद अंतिम क्रिया की तस्वीरें

"द कश्मीर फाइल्स" द्वारा भंडा फोड़ 

विवेक अग्निहोत्री की फिल्म "द कश्मीर फाइल्स" ने कश्मीरी पंडितों के पुराने जख्म हरे कर दिए हैं। जिन पर पाकिस्तान प्रेरित आतंकवादियों और कट्टरपंथियों ने राक्षसों से भी ज्यादा क्रूरता की। टीका लाल टपलू की हत्या के बाद, 19 जनवरी 1989 का दिन कश्मीर घाटी के इतिहास में एक काला अध्याय सिद्ध हुआ। जिसमें इस्लामिक आतंकवादियों और कट्टरपंथियों द्वारा कश्मीरी पंडितों का नरसंहार और पलायन लिखा हुआ है।

14 सितंबर "शहीद दिवस" और कश्मीरी पंडितों के पलायन की शुरूआत

14 सितंबर 1989 को टीका लाल तपलू की हत्या की गई थी, इस तारीख़ को बीजेपी व कश्मीरी पंडित "शहीद दिवस" के रूप में मानते हैं। क्योंकि टीका लाल की हत्या पहली बार कश्मीरी आतंकवादियों की लहर द्वारा की गई। यहीं से कश्मीरी पंडितों के नरसंहार और पलायन की शुरूआत हुई। आज से 32 वर्ष पहले, कश्मीरी आतंकवादियों और इस्लामिक कट्टरपंथियों ने मस्जिदों से ऐलान किया कि सभी कश्मीरी पंडित काफ़िर हैं। वे सभी कश्मीर छोड़ कर चले जाएं या हिन्दू से मुस्लिम में धर्मांतरण कर लें। सभी कश्मीरी पंडित अपनी मां बहन और बेटियों को अपने पिछे ही छोड़कर जाएं।

टीका लाल टपलू का आरंभिक जीवन

बीजेपी नेता और कश्मीरी पंडित टीका लाल का जन्म 1930 में ब्रिटिश भारत में हुआ था। उन्होंने 1945 पंजाब विश्वविद्यालय से मैट्रिक की परीक्षा पास की और उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से MALLB ( 1958 में) की पढ़ाई पूरी की। कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद, वह जम्मू कश्मीर बार एसोसिएशन में शामिल हो गए। उन्होंने कश्मीर उच्च न्यायालय में एक वकील (1971 में) के रुप में प्रवेश किया।


टीका लाल इंदिरा गांधी के खिलाफ़ खड़े हुए

टीका लाल का जुड़ाव राष्ट्रीय स्वंसेवक संघ से काफ़ी समय से था। यहीं कारण है कि जब इंदिरा गांधी ने 1975 आपातकाल घोषित किया था तब उन्होंने इसका जमकर विरोध किया। जय प्रकाश नारायण के नेतृत्व में देश भर में आपातकाल के खिलाफ़ आबाजें उठ रही थी। तब उन्होंने भी कश्मीर के श्री नजर के लाल चौक पर विरोध प्रदर्शन किया।

टीका की कश्मीर में लोकप्रियता और बीजेपी नेता होना हत्या का कारण बना

टीका लाल टपलू कश्मीर में निडर रूप से रहते थे, वह हब्बा कदल जैसे मुस्लिम बहुल निर्वाचन क्षेत्र में रह रहे थे। टपलू को कश्मीर में "लालाजी" के नाम एस जाना जाता था। वह कश्मीरी पंडितों और मुस्लिमों के बीच बेहद विख्यात नेता थे। उनका उद्देश्य कश्मीरी पंडितों और मुस्लिमों को एक साथ लाने का था। लेकिन कश्मीरी आतंकवादियों और कट्टरपंथियों को यह पसंद नहीं आया। आतंकवादी किसी भी तरह से कश्मीर घाटी में आतंक का माहौल बनाना चाहते थे। जिससे टीका लाल टपलू का जीवन खतरे में पड़ गया।

टीका लाल टपलू कश्मीर का माहौल समझ चुके थे। तभी तो अपनी हत्या से पहले वह अपने पूरे परिवार को दिल्ली छोड़ आए थे। जिससे वह अपने परिवार की सुरक्षा से चिंताबिहीन हो गए। 

दिल्ली से वह  8 सितंबर 1989 को कश्मीर वापस लौट आए।  किंतू चार दिनों के अंदर ही घर पर उन्हें मारने का प्रयास हुआ। लेकिन इसमें आतंकी विफल हुए।

लेकिन जब वह उच्च न्यायालय जा रहे थे तब उन्होंने एक लड़की को स्टेशनरी के पास रोते हुए देखा था। उन्होंने बड़े प्यार से लड़की का 5 रूपए का बिल दिया और आगे बढ़ गए। वह थोड़ी ही दूर चल पाए थे। तभी उन्हें तीन नकाबपोशों ने घेर लिया। उनमें से एक ने अपनी बंदूक निकाली और टीका लाल टपलू को गोली मार दी। तीनों आतंकवादियों ने टीका लाल पर आठ राउंड फायरिंग की। टीका लाल की हत्या की खबर से कश्मीर घाटी में भूचाल आ गया। 

रिपोर्ट के मुताबिक, टीका लाल की हत्या जावेद अहमद अली उर्फ जावेद नलका द्वारा की गई थी। नलका को टीका लाल टपलू के द्वारा राममन्दिर के लिए ईंटें और भेजने के लिए क्रोधित था। उनकी हत्या इन्हीं कामों के प्रतिशोध का अंजाम थी।

उनकी अंतिम क्रिया में बीजेपी के सभी शीर्ष नेता एलके आडवाणी, और केदार नाथ सहनी आदि नेता शामिल हुए थे। उनकी अंतिम क्रिया में भी "जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट" अर्थात् यासीन मलिक के संगठन ने पत्थरबाजी करने का प्रयास किया। किंतू वह इसमें सफ़ल नही हुए।



टीका लाल टपलू की पत्नी

टीका लाल ने अपने परिवार को दिल्ली शिफ्ट कर दिया था। उनकी पत्नी "सरला टपलू" थीं जो टीका लाल टपलू के बदौलत और दूरदर्शिता के कारण जीवित रह सकीं। सरला एक स्कूल शिक्षक रहीं हैं और इसके अलावा उन्होंने बीजेपी को भी ज्वाइन किया। कश्मीर घाटी में उन्होंने विधानसभा चुनाव भी लड़ा था। सरला टपलू का निधन 30 दिसम्बर, 2021 को दिल्ली में हो गया।

Post a Comment

Previous Post Next Post