1990 में कश्मीरी मस्जिदों से ऐलान, कश्मीरी पण्डित काफ़िर हैं, पण्डित अपनी मां बहन और बेटियों को पीछे छोड़ कर चले जाएं।

कश्मीर का नाम कश्यप ऋषि एक नाम से पड़ा है और जहां के मूल निवासी कश्मीरी पंडित थे। लेकिन  1990 में इस्लामिक आतंकियोंं और कट्टरपंथियों ने एक साजिश के तहत् कश्मीरी पंडितों को वहां से क्रूरता पूर्वक भगा दिया। इस्लामिक कट्टरपंथियों और आतंकवादियों ने कश्मीरी पंडितों की मां और बहनों के गैंग रैप और उनके शरीर के साथ बड़ी क्रूरता की। हजारों की संख्या में कश्मीरी पंडितों मौत के घाट उतारा गया। 1990 में पूरा कश्मीरी कश्मीरी पंडितों से विहीन हो गया। आज हम कश्मीर पंडितों और उनके इतिहास के बारे में जानेंगे।

कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर आधारित "द कश्मीर फाइल्स फिल्म"

कश्मीर पंडित

कश्मीरी पंडित
जनसंख्या 2 से 8 लाख 1990 से पहले तक
प्राचीन निवास कश्मीरी मूल निवासी
प्राचीन हिन्दू कश्मीरी राजवंश हिन्दू लोहार राजवंश
बोलियां संस्कृत, शारदा कश्मीरी
जातीय भाषा कश्मीरी
अन्य भाषाएं हिंदी, कश्मीरी, अंग्रेजी
संबंधित जातीय समूह कश्मीरी हिन्दू, सारस्वत ब्राह्मण समुदाय
राज्य संघ शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर
नागरिक भारतीय

•कश्मीरी पंडित कश्मीर के हिंदुओं का एक समूह है। जिनको कश्मीरी ब्राह्मण या कश्मीरी पंडित भी कहा जाता है। 

•कश्मीर के पंडित भारत के सारस्वत ब्राह्मण समुदाय का एक हिस्सा हैं, जो सभी कश्मीरी घाटी के पंच गौड़ा ब्राह्मण समूह से आतें हैं।

•कश्मीरी पंडितों को तीन उपजातियों में बंटे हैं।

1. गुरु/बचाबत (पुजारी), 

2.जोतीश (ज्योतिषी), 

3.कारकुन (जो ऐतिहासिक रूप से मुख्य रूप से सरकार द्वारा नियोजित हैं।

हालाकि यह भी सच है कि तीनों आपस में मिलकर रहती हैं। किंतू जोतीश और कारकुन उपजातियों में ही अंतर्जातीय विवाह का प्रचलन है।

कश्मीरी पंडितों का निवास स्थान

•कश्मीरी पंडित भारतीय संघ शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर की घाटी कश्मीर से आतें हैं। कश्मीर घाटी पहाड़ी क्षेत्रों से घिरी हुई है। इसी में प्राचीन हिन्दू कश्मीरी पंडितों का निवास स्थान था। 

•कश्मीर घाटी में मूल निवासी कश्मीरी पंडित थे। कश्मीर में मुस्लिम प्रभाव और इस्लामिक अत्याचार बढ़ने से बड़ी संख्या में इस्लाम में परिवर्तित हो गए या बहुत से कश्मीर से भाग कर देश के दूसरे हिस्सों में बस गए।

•कश्मीरी पंडितों का सबसे बड़ा पलायन आजाद और लोकतांत्रिक भारत में 1990 में हुआ था और इसका सबसे बड़ा कारण इस्लामिक आंतकवाद, कट्टरपंथ और उग्रवाद था।

कश्मीरी पंडितों का इतिहास

•कश्मीर में कश्मीरी पंडितों का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। कश्मीर का नाम ही कश्यप ऋषि के नाम पर पड़ा है। 

•कश्मीर में कश्मीरी पंडितों का निवास 3 ईसा पूर्व से है। इस समूह में महिलाओं का उच्च सम्मान था। सभी लोग पहाड़ों से घिरी घाटी में रहते थे। 

•कश्मीर में 3 ईसा पूर्व बुद्ध धर्म का प्रचार प्रसार होता है। जिससे यहां जाति व्यवस्था प्रभावित होती है। अशोक ने के शासन काल में यहां बुद्ध धर्म का विकास हुआ।

•जम्मू और कश्मीर क्षेत्र अरब और तुर्किश शासन का अधीन रहा था। लेकिन इन्होंने ने कश्मीर घाटी से दूरी बनाई रखी। किंतू मुगल काल के दौरान यहां बड़ी तेजी से धर्मपरिवर्तन हुआ। 

•चौदहवीं शताब्दी तक यहां मुस्लिम आबादी बहुमत में नहीं थी। लेकिन बाद में मुस्लिम प्रभाव यहां बड़ी तेजी से बढ़ा। अब कश्मीर की कुल संख्या में मुस्लिमों की हिस्सेदारी 99% है।

•कश्मीर का प्राचीन राज वंश हिंदू लोहारा राजवंश था। जिस पर सभी कश्मीरी पंडितों की अच्छी खासी पकड़ थी। लेकिन भ्रष्ट शासन और ब्राह्मण्डो पर टैक्स लगाने के कारण  यह राजवंश कमजोर होता गया।

कश्मीरी पंडितों काध्यकालीन इतिहास

•मध्यकाल में ज़ुल्जू ने 1320 में कश्मीर घाटी में जमकर कत्लेआम किया। ज़ुल्जू एक तुर्किस्तान का मंगोल मुस्लिम था। 

•इसने कश्मीर घाटी को जीत लिया और यहीं से कश्मीर से कश्मीरी पंडितों के खात्मे की शुरुआत हुई।

सिकंदर बुतशिकन, यह कश्मीर का सातवां मुस्लिम सुल्तान था। इसको हिंदू नरसंहार और मूर्तिभंजक के नाम से जाना जाता था। इसने 1389-1413 के बीच कश्मीर घाटी में एक विशेष सैन्य अभियान चलाया था। जिसका उद्देश्य कश्मीरी पंडितों के पूजा स्थलों और मंदिरों को नष्ट करना था। इसने गैर मुस्लिम प्रतीकों को नष्ट किया और कश्मीरी पंडितों का इस्लाम में जोर जबरदस्ती परिर्वतन कराया। लेकिन बहुत से धार्मिक समुदाय ने मुस्लिम बनना स्वीकार नहीं किया और वह देश के दूसरे हिस्सों में पलायन कर गए।

•मूल जनसंख्या के लगातार पलायन और मुस्लिम धर्म के प्रभाव से कश्मीर घाटी पूरी तरह से मुस्लिम बहुल हो गई।

आधुनिक इतिहास

•कश्मीर में 1846 से 1947 तक डोंगरा वंश के शासकों का राज था। इनके राज के दौरान कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडित फले फूले थे और इस समय यह कश्मीर का एक बड़ा समूह बन गया।

• 1950 में हुए भूमि सुधार के कारण लगभग 20% कश्मीरी पंडितों ने कश्मीर घाटी को छोड़ दिया। 1985 तक कश्मीर घाटी में 5 लाख कश्मीरी पंडित रह गए थे।

•कश्मीरी पंडितों का सबसे ज्यादा शोषण धारा 370 के कारण हुआ। जिसका सबसे ज्यादा फायदा इस्लामिक कट्टरपंथियों और आतंकवादियों द्वारा उठाया गया। जिसके कारण भारतीय सरकार और कोर्ट वहां असहाय महसूस करता था। कोई भी नियम और कानून वहां लागू ही नहीं होता था। 

1990 कश्मीरी पंडितों के कत्लेआम की तारीख

•1990 में कट्टरपंथी इस्लामवादियों और आतंकवादियों ने कश्मीरी पंडितों के खिलाफ़ साजिश रची। 

19 जनवरी 1990 की घटना भारतीय इतिहास की सबसे काली घटना थी। क्योंकि इसी दिन कश्मीर की मस्जिदों से घोषणाएं हुआ करती थी कि कश्मीरी पंडित काफ़िर हैं और वे अपनी बहू बेटियां छोड़कर यहां से भाग जाए।

•कश्मीरी पंडितो को सिर्फ़ दो विकल्प दिए गए थे। 

1. कश्मीरी पंडित मुस्लिम बन जाएं।

2. अगर कश्मीरी पंडित मुस्लिम नहीं हैं। तो वे अपने पीछे अपनी बहू बेटियां को छोड़ कर चले जाएं।

•मस्जिदों से कश्मीरी मुसलमानों को कश्मीरी पंडितों के घरों को चिन्हित करने को कहा जाता था। ताकि उनका आसानी से धर्मांतरण या हत्या की जा सकें।

•कई रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 1,50,000 कश्मीरी पंडितों में से 1,00,000  कश्मीरी पंडितों का पलायन हुआ। लेकिन कुछ अन्य संगठनों और रिपोर्ट्स के अनुसार, कश्मीर में कुल। कश्मीरी पंडितों की आबादी 150,000 से 1,00,000 की थी।  जिनमें से 1,00,000, से लेकर 800,000 तक लोग पलायन कर गए।

•हजारों की संख्या में कश्मीरी पंडितों का वीभत्स रूप से हत्या की गई। कश्मीरी पंडितों की कई मां बहनों के साथ गैंग रैप हुए। उनकी लाशों को बुरी तरह नोचा खसोटा गया।

•महाराष्ट्र के बाल ठाकरे, वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने पहली बार कश्मीरी पंडितों की मदद के लिए आगे आए। उन्होंने कश्मीरी पंडितों के लिए इंजीनियरिंग कॉलेजों में सीटें आरक्षित करवाईं। 

कश्मीर में हिन्दू स्थल

•कश्मीर में ललितादित्य मुक्तापीडा द्वारा स्थापित मार्तंड सूर्य मंदिर भी स्थापित है। यहां बड़ी संख्या में सूर्य पूजा होती थी। 

•वानवुन गायन कश्मीरी पंडितों का एक धार्मिक समारोहों का एक अभिन्न अंग था।

•हरमुख पर्वत कश्मीरी पंडितों का एक पूजनीय स्थल है।इस साइट को 2009 के बाद फिर एक बार पुनः स्थापित किया गया

•कश्मीर के श्रीनगर में स्थित माता खीरभवानी का मंदिर बहुत प्रसिद्ध है। इसको सबसे पवित्र हिंदू मंदिरों में से एक माना जाता है। यह मन्दिर तुल्लामुल्ला गांव में स्थित है, जो  श्रीनगर से 24 किमी दूर गांदरबल जिले में स्थित है।

कश्मीरी पंडितों के मुख्य धार्मिक स्थल
मार्तंड सूर्य मंदिर ललितादित्य मुक्तापीडा द्वारा स्थापित
माता खीरभवानी मन्दिर कश्मीर के श्रीनगर में स्थित, भारत के पूजनीय मंदिरों में से एक
शारदा पीठ स्थित पाक अधिकृत कश्मीर, जिला नीलम घाटी
शारदा पीठ नष्ट किया सिकंदर बुटकिशन खान
कश्मीर में मंदिरो की संख्या 464, जिनमें 164 नष्ट हो चुके
शंकरगौरीश्वर मंदिर स्थित, पट्टन, बारामूला के पास, भारत

कश्मीरी पंडितों का समारोह

•कश्मीरी पंडित महाशिवरात्रि पर्व को धूम धाम से मनाया करते थे।  इसे कश्मीरी भाषा में हेराथ कहा जाता था।

•नवरेह, जो कश्मीरी पंडितों का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इसको कश्मीरी चंद्र नव वर्ष के नाम से भी जाना जाता है।

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