इस बार तेल 300 डॉलर पार, जोए बाइडेन की मूर्खता दुनिया को रूलाने जा रही

अमेरीकी राष्ट्रपति जोए बाइडेन हर तरह से गलत निर्णय लेते जा रहें हैं। जिससे भारत सहित पूरी दुनिया आर्थिक संकट में फंस सकती है। बाइडेन रूस को यूक्रेन पर आक्रमण की सजा देना चाहतें हैं। लेकिन इस सजा में तेल पूरी दुनिया का निकलना तय है। क्योंकि अभी तक रूस पर , जो आर्थिक प्रतिबंध लगे हुए थे, उससे दुनिया ज्यादा प्रभावित नहीं हुई। लेकिन बाइडेन का नया निर्णय सभी को रूलाने जा रहा है। 


रूस के तेल आयात पर प्रतिबंध

जोए बाइडेन ने आज ऐलान किया कि यूएस अब रूस से तेल और गैस आयात नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि अभी पूरी दुनिया रूस के तेल आयात को पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं लगा सकती है। इसमें थोड़ा समय लगेगा। बाइडेन रूस को ईरान और वेनेजुएला बना देना चाहतें हैं। क्योंकि अमेरिका ने ईरान पर तेल आयात पर प्रतिबंध लगा रखा है। जिस कारण से कोई भी देश ईरान के तेल का आयात नहीं करना चाहता।



किंतू अगर रूस पर तेल आयात प्रतिबंध लगा। तो अमेरिका को रूस का विकल्प तैयार करना होगा। वेनेजुएला और ईरान पर से तेल आयात प्रतिबंध हटाना पड़ेगा। यदि इन दोनों देशों से तेल आयात प्रतिबंध भी हटा और बाइडेन ने रूस पर तेल आयात प्रतिबंध लगा दिए। तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था ढह जायेगी।

तेल के दाम 300 डॉलर पार

रूस ने पूरी दुनिया को चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका और यूरोपियन यूनियन रूस के तेल आयात पर प्रतिबंध लगाती है तो इस तरह का कदम विनाशकारी परिणाम लेकर आयेगा और एक बैरल तेल के दाम 300 डॉलर पार जा सकतें हैं। अब आप सोच सकते हैं कि तेल के सहारे ही पूरी दुनिया चल रही है और अगर तेल के दाम 300 डॉलर तक बढ़ जातें है। तो विकासशील जैसे भारत, नेपाल, श्री लंका और पाकिस्तान में गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो सकता है। भारत में इसका सबसे ज्यादा गम्भीर असर पड़ेगा। क्योंकि भारत हर वर्ष 150 बिलियन डॉलर का तेल आयात करता है। लेकिन जब एक बैरल तेल के दाम 300 डॉलर तक पहुंच जायेंगे तो भारत का तेल आयात बिल सीधे 200 बिलियन डॉलर पार चला जायेगा। 

यह स्थिति भारत के लिए आत्महत्या जैसी सिद्ध होगी। क्योंकि तेल सीधे लोगों की दैनिक जरूरतों को प्रभावित करता है। खासकर भारत जैसे देश में तेल के दाम बहुत ज्यादा संवेदनशील मसला है। भारत में हर वस्तु तुरंत महंगी हो जाएगी। देश के लोगों को महंगाई हर तरह से डराएंगी।

यह हाल सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि चीन, पाकिस्तान और सभी विकासशील देशों का होगा। कुछ ऐसे भी देश होगें, जो महंगे तेल को आयात भी नहीं कर पायेंगे।

ओपेक देश(तेल उत्पादक देश)

ओपेक देशों ने साफ कर दिया है कि वे सब रुस के साथ खड़ी हैं और  तेल उत्पादन को कतई नहीं बढ़ाने वाली हैं। अब दुनिया को डर है कि कहीं रूस पर तेल आयात प्रतिबंध लग जाता है तो पूरी दुनिया में तेल की बेतहाशा कमी देखने को मिलेंगी। जिससे तेल अपने सभी पुराने रिकॉर्ड को तोड़ देगा।

वर्तमान में ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए। जो 15 वर्षों में सबसे अधिक हैं। अगर इसी तरह तेल के दाम बढ़ते रहें तो तेल जल्द ही 200 डॉलर प्रति बैरल को पार कर जायेगा।

वर्तमान में ओपेक देश

वर्तमान ओपेक देश अल्जीरिया, अंगोला, इक्वेटोरियल गिनी, गैबॉन, ईरान, इराक, कुवैत, लीबिया, नाइजीरिया, कांगो गणराज्य, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और वेनेजुएला हैं। इसमें रूस एक गैर - सदस्य देश है। लेकिन फिर भी तेल के दामों को नियंत्रित करने में सक्षम है। क्योंकि रूस विश्व का दूसरा बड़ा तेल उत्पादक और निर्यातक देश है। इसलिए रूस कोई ईरान नहीं है, जिससे दुनिया को कुछ ज्यादा फ़र्क नहीं पड़ेगा। रूस पर तेल आयात प्रतिबंध आर्थिक बर्बादी लेकर आयेगा।

रूस में लोग भूखे मरेगे

जिस तरह रूसी तेल और गैस प्रतिबंध लगाने की बात चल रही हैं। अगर रूस के तेल आयात पर प्रतिबंध लगता है। तो रूस की आम जनता भूखे पेट मरने वाले हैं

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