श्रीलंका को भारत ड्रैगन के कर्ज़ जाल से बचा रहा, 7000 करोड़ रूपए की भारतीय मदद

भारत के सुदूर दक्षिण में वसा एक द्वीप देश श्री लंका, इन दिनों आर्थिक संकट से गुजर रहा है। आर्थिक संकट इतना विकट है कि श्री लंका की राजपक्षे सरकार के पास इतना पैसा नहीं है, जिससे वह तेल और कोयला आयात कर सकें। तेल और कोयले के संकट से वहां बिजली कटौती भारी मात्रा में हो रही है। हम सब जानते हैं कि बिजली ही देश के विकास के लिए आधारभूत ढांचा है। 


इसी समस्या को लेकर श्रीलंका के वित्त मंत्री बासिल राजपक्षे भारत आए थे। भारत सरकार ने भी श्रीलंका को 1 बिलियन डॉलर मदद का ऐलान किया। हालाकि भारत सरकार श्री लंका की सरकार को सीधे 1 बिलियन डॉलर देने नहीं जा रही है। इन 1 बिलियन डॉलर से श्रीलंका भारत से तेल, कोयला और दैनिक जरूरतों का समान खरीदेगा। इससे वहां के लोगों और सरकार को कुछ राहत प्राप्त होगी। 

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यूक्रेन रशिया युद्ध का प्रभाव

रूस यूक्रेन युद्ध ने श्री लंका पर बहुत ही नकारात्मक प्रभाव डाला है। इस युद्ध से तेल के दाम बढ़ते चले गए और वहां का पर्यटन उद्योग भी नष्ट हो गया। क्योंकि श्रीलंका में आने वाले अधिकतर (लगभग 30%) पर्यटक रूस, यूक्रेन, पौलेंड और बेलारूस से आते थे। यह भी श्री लंका का एक दुर्भाग्य निकला। श्री लंका ने 2019 में पर्यटन उद्योग से 3.6 बिलियन डॉलर की कमाई की थी। जोकि पहले कोविड और अब युद्ध ने बर्बाद कर दी।

भारत जैसा देश एक समय के लिए 130 से 150 डॉलर तक महंगा तेल खरीद सकता है। क्योंकि हमारे पास कई सौ बिलियन डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है। लेकिन श्री लंका का विदेशी मुद्रा भंडार खाली हो चुका है और वह महंगा तेल आयात भी नहीं कर सकता।

श्रीलंका ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का दरवाजा खटखटाया

श्री लंका की सरकार को समझ आ गया है कि बिना आईएमएफ के कर्ज़ से हालात पर काबू नहीं पाया जा सकता है और भारत भी एक हद तक ही उसकी मदद कर सकता है।  इसलिए वहां की सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का दरवाजा कर्ज़ के लिए खटखटाया है। इस पर वह आईएमएफ से बातचीत कर रही है। लेकिन इस पर समय लगेगा। यहीं कारण है कि भारत ने तब तक श्रीलंका की जरूरतों को पूरा करने का निर्णय लिया। इसके अलावा भारत सरकार श्री लंका के पर्यटन उद्योग को भारतीयों के सहारे एक बार पुनः पुर्नजीवित करना चाहती है। ताकि श्रीलंकन सरकार की आर्थिक स्तर पर मुसीबतें कुछ हद तक कम हो सकें। 

1948 में ब्रिटेन से आज़ाद होने के बाद, श्रीलंका के इतिहास में पहली बार है। उसके आर्थिक हालात सबसे बुरे हो गए हैं। सरकार को लोगों से कहना पड़ रहा है कि लोग बिजली और गैस को बचाकर देश भक्ति दिखाएं।

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